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रेलफैनों को आता है ज़िन्दगी का मज़ा लेना

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Tue Jan 26 23:43:26 IST
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News Posts by Anupam Enosh Sarkar

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Today (20:46) कटिहार रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को नहीं मिलती हाईटेक सुविधाएं (www.livehindustan.com)
Commentary/Human Interest
NFR/Northeast Frontier
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News Entry# 435183  Blog Entry# 4857599   
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Jan 26 2021 (20:46)
Station Tag: Katihar Junction/KIR added by Anupam Enosh Sarkar/401739
Stations:  Katihar Junction/KIR  
कटिहार | एक संवाददाताकोरोना काल में एक ओर जहां पैसेंजर ट्रेनों का परिचालन शुरू नहीं होने से पिछले दस महीनों से सीमांचल के यात्री परेशान हैं, जो यात्री एक्सप्रेस टे्रनों से यात्रा करने के लिए कटिहार जंक्शन पर आते हैं। उन्हें रेलवे द्वारा पूर्व से दिए गए हाईटेक सुविधा नहीं मिल रही है।रेल मंत्रालय का दावा का यहां पर हवा-हवाई होता दिख रहा है। एक ओर पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के अधिकारी दावा करते हैं कि इस रेल के सभी स्टेशनों पर हाईटेक सुविधाओं रेल यात्रियों को दी जा रही है कटिहार जंक्शन पर पिछले कई माह से कोच इंडिकेटर और ट्रेन के समय सारणी का इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड खराब है। इस कारण से यात्रियों को यात्रा के शुरू करते समय काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यात्रियों को छोड़ने आये लोगों में ममता पाल, सुबोध कुमार, अशोक कुमार सिंह, अमर कुमार, प्रिया घोष, सुलेखा आदि ने कहा कि यात्रियों की...
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सुविधा के लिए कटिहार रेलवे जंक्शन के बाहर और एक नंबर प्लेटफार्म संख्या के प्रवेश द्वार और पूछताछ काउंटर के पास लाखों रुपये की लागत से एक बड़ा इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड लगाया गया है। उक्त बोर्ड में केवल वेलकम टू कटिहार जंक्शन या कटिहार जंक्शन पर आपका स्वागत है या फिर रेलवे आपका स्वागत करती है आदि लिखा हुआ मिलता है। आने व जाने वाली ट्रेनों का नाम व समय खोजने पर भी नहीं मिलता है।उन्होंने कहा कि सबसे अधिक परेशानी कोच इंडिकेटर के खराब रहने से होता है। उन्होंने आरक्षित यात्रियों का आरक्षण किस कोच में है और वह कोच प्लेटफार्म पर कहां पर आकर रूकेगी। इसकी जानकारी देने के लिए कोच इंडिकेटर लगाया हुआ है लेकिन उनमें से सभी खराब है। इससे यात्रियों को ट्रेन आने पर अपनी कोच को खोजने में काफी समस्या का सामना करना पड़ता है। अपनी कोच को खोजने के लिए भागम-भाग की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इससे कई यात्री गिर जाते हैं और हादसा के शिकार हो जाते हैं।उन्होंने कहा कि ट्रेन का ठहराव का समय मात्र दस से पंद्रह मिनट रहता है । ट्रेन में चढ़ने के क्रम में अफरा-तफरी का माहौल रहता है। कभी-कभी यात्री गिर कर हादसा का शिकार होते रहते हैं। खास कर मरीज या वृद्ध लोगों को जब यात्रा करना होता है तो उन्हें अपना कोच खोजते समय काफी परेशानी होती है। सीनियर सिटीजन अकेले हों तो उनका ट्रेन छुट जाती है। रिर्जवेशन इंफोरमेशन बोर्ड भी खराब होने के बाद हटा दिया गया है।इससे यात्रियों को पता नहीं चल पाता है कि आगमी एक माह में किस ट्रेन में कितना सीट खाली है या रिजर्वेशन की क्या स्थिति है। डिजिटल रिजर्वेशन चार्ट डिस्प्ले बोर्ड भी खराब है। यह कभी ठीक रहता है तो कभी खराब हो जाता है। जिसके पास मोबाइल है वह तो अपना काम चला लेते हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्वालियर स्टेशन पर नए काेच डिस्प्ले बोर्ड के साथ ट्रेन डिस्प्ले बोर्ड भी लगाए जा रहे हैं। इससे प्लेटफार्म नंबर 4 पर सीधे पहुंचने वाले यात्रियों को ट्रेनों की जानकारी लेने के लिए प्लेटफार्म-1 पर बने पूछताछ केंद्र में ट्रेनों की जानकारी लेने के लिए नहीं आना पड़ेगा। रेलवे ने नए कोच डिस्प्ले बोर्ड और ट्रेन डिस्प्ले बोर्ड लगाने का काम शुरू कर दिया है। यह एक माह के अंदर चालू हो जाएंगे। इससे यात्रियों को ट्रेनों की जानकारी लेने के लिए भाग दौड़ नहीं करनी पड़ेगी।
तीन साल से ट्रेन डिस्प्ले बोर्ड खराब हैं। इस कारण यात्रियों को ट्रेन की जानकारी लेने के लिए पूछताछ केंद्र तक जाना पड़ता है। अब सभी प्लेटफार्म में ट्रेन डिस्प्ले बोर्ड लगाए जा रहे हैं,
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जिससे यात्रियों को प्रत्येक प्लेटफार्म में ट्रेन की आने और जाने की जानकारी मिल सके।
अभी पुराने बड़े साइज के ट्रेन डिस्प्ले बोर्ड प्लेटफार्म पर टगे हैं। इनका कोई उपयोग नहीं है, लेकिन इन्हें हटाया नहीं गया है। वहीं कोच डिस्प्ले बोर्ड आधुनिक हैं, जो सीधे एनटीईएस से जुड़ेंगे। इससे काेच की पाेजीशन खुद-ब-खुद अपडेट हाे जाएगी। अभी पुराने पद्धति के काेच डिस्प्ले बाेर्ड लगे हैं।
इससे पूछताछ केंद्र में बैठे कर्मचारी को जानकारी लेकर कोच पोजीशन को अपडेट करना पड़ता है। कई बार कोच पोजीशन बदल जाती है, लेकिन यह कंप्यूटर में फीड नहीं होती। इससे ट्रेन के प्लेटफार्म पर आने के समय भगदड़ मचती है, लेकिन नई तकनीकी के कोच डिस्प्ले बोर्ड लगने से यात्रियों को बिना किसी परेशानी की सही जानकारी मिलेगी।
कोरोना काल में बनाए आइसोलेशन कोच, फिर से यात्री कोच में बदलेंगे
कोरोना संक्रमण के बढ़ने पर उत्तर मध्य रेलवे ने अप्रैल 2020 में आइसोलेशन कोच तैयार किए थे। इन कोचों का उपयोग नहीं हो सका है। अब ये धूल खा रहे हैं। जैसे-जैसे ट्रेनों की संख्या बढ़ रही है, रेलवे को जनरल कोच को कमी पड़ रही है।
इस बात को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने फिर से आइसोलेशन कोच काे यात्री कोच बनाने की तैयारी कर ली है। झांसी मंडल में 70 कोच को आइसोलेशन कोच में तब्दील किया था। अब इनमें से आधे से अधिक कोच को फिर से यात्री कोच बनाकर ट्रेन में जोड़ने की तैयारी कर ली है।
26 जनवरी गणतंत्र दिवस के अवसर पर शहर के ऐतिहासिक महत्व के भवनों को विभिन्न रंगों की आकर्षक लाइट से सजाया गया है। रेलवे स्टेशन के सिंधिया कालीन भवन को फसाड़ लाइट से सजाया गया है, जो हर तीन सेकंड के बाद रंग बदलती हैं। स्टेशन तिरंगा के तीन रंग की लाइट्स से सजाया गया है। इसी तरह शहर मोतीमहल, जल विहार, महाराज बाड़ा स्टेट बैंक के भवनों पर भी सजावट की गई है। ऐतिहासिक भवनों के साथ-साथ शासकीय कार्यालयों और भवनों पर भी लाइटिंग की गई है।
ग्वालियर रेलवे स्टेशन
ग्वालियर रेलवे
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स्टेशन की स्थापना सन 1878 में सिंधिया राज घराने के तत्कालीन महाराज जयाजी राव ने कराई थी। इसके भवन का निर्माण 1895 में किया गया था। इसकी शैली भी रोमन बताई जाती है। अभी इसे फसाड़ लाइट से सजाया गया है। तिरंगा के तीन रंग में यह लाइट जल रही है जो पूरे स्टेशन भवन को आकर्षक बना रही है।
मोतीमहल
शहर के मोतीमहल भवन का निर्माण सिंधिया रियासत काल में सन 1872 में हुआ है। मोतीमहल का निर्माण सिंधिया घराने के तत्कालीन महाराज जयाजी राव ने अपने रहने के लिए कराया था, पर सन 1874 में जयविलास पैलेस बनने के कारण वह इसमें रह नहीं सके थे। मोतीमहल में वर्तमान में अलग-अलग विभागों के 100 से अधिक दफ्तर संचालित होते हैं। मोतीमहल में मध्य भारत प्रांत की विधानसभा भी लगती थी। यहां मोतीमहल की दीवारों कई कलाओं के चित्र उकेरे गए हैं। यहां एक हजार से अधिक कमरे हैं जिस कारण यह भवन अपने आप में एक भूल भुलैया है।
जल विहार
जल विहार भी ग्वालियर की ऐतिहासिक इमारतों में से एक है। यह भी सिंधिया घराने की देन है। 19वीं शताब्दी के प्रारंभ में इसे तत्कालीन महाराज माधवराव सिंधिया प्रथम ने निर्माण कराया था। यह रोमन शैली में बना हुआ है। यहां झरने और तालाब मुगल कालीन सभ्यता की झलक दिखाते हैं। यहां अभी नगर निगम परिषद संचालित होती है। जल विहार मोती महल के ठीक पास ही स्थित है। ऐसा बताया जाता है कि इसका निर्माण गर्मी से राहत देने के लिए बनवाया गया था। यहां चाहे जितना भी अधिक तापमान हो, लेकिन गर्मी का अहसास नहीं होता है।

Rail News
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Today (21:07)
😎😎HWH Raj ▶️ Poorva Exp meri Jaan ♥️♥️😘😘
SakshamMaheshwa~   28567 blog posts
Re# 4857597-1            Tags   Past Edits
Amazing look 🤩🤩🤩😎😎😎

Rail News
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Today (21:23)
Need stoppage of Singrauli Exp
aryan89~   1143 blog posts
Re# 4857597-2            Tags   Past Edits
Beautiful....
अहमदाबाद। महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से गुजरात के अहमदाबाद शहर के बीच चलने वाली देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना में ब्रिज का निर्माण कार्य होने जा रहा है। इन ब्रिज का ठेका लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) और आईएचआई इंफ्रास्ट्रक्चर सिस्टम्स के ज्वाॅइंट कंसोर्टियम को दिया गया है। जिसमें एक कंपनी भारतीय है, जबकि दूसरी जापानी। दोनों को यह 1390 करोड़ रुपए का ठेका नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने दिया है। एनएचएसआरसीएल की ओर से बताया गया कि, मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए के लिए 28 स्टील ब्रिज (सुपर स्ट्रक्चर) के निर्माण और खरीद का ठेका दिया है। 28 ब्रिजों के निर्माण में लगभग 70,000 मीट्रिक टन स्टील लगेगा।

बुलेट
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ट्रेन: यह सबसे बड़ा सिंगल आर्डर

वहीं, इससे पहले बुलेट ट्रेन का वडोदरा-सूरत-वापी रूट के निर्माण-कार्य का ठेका भी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को दिया गया था। जो कि देश का अब तक का सबसे बड़ा सिंगल आर्डर (अनुबंध) माना जा रहा है। लार्सन एंड टुब्रो ने 24000 करोड़ का यह आर्डर मिलने के बाद कहा कि, हमने बुलेट ट्रेन के 46% हिस्से का काम 4 साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसी साल के अंत तक काम शुरू किया जा सकता है। जिसमें उसके द्वारा वडोदरा से वापी रूट पर एलिवेटेड पुल, स्टेशन, रिवर ब्रिज और डिपो तैयार किए जाने हैं।

4 साल में काम पूरा करने का लक्ष्य

नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन (एनएचएसआरसीएल) ने रूट के निर्माण-कार्य को लेकर बीते 19 अक्टूबर को फाइनेंशियल बिड खोली थी। जिसमें लार्सन एंड टुब्रो ने सबसे कम खर्च की बोली लगाई थी। इस फाइनेंशियल बिड में 3 बड़ी इंफ्रा कंपनियां शामिल हुई थीं। 10 दिन तक चली मूल्यांकन प्रक्रिया के बाद यह ठेका लार्सन एंड टुब्रो ने प्राप्त कर लिया। जिसके बारे में बताते हुए मुख्य कार्यकारी अधिकारी व प्रबंध निदेशक एसएन सुब्रमणियम ने कहा कि, सरकार की ओर से अब तक सबसे प्रतिष्ठित अनुबंध हमें हासिल हुआ है। हम अगले 4 वर्षों में अपना काम पूरा करेंगे।' उन्होंने बताया कि, इस समयावधि में बुलेट ट्रेन के 237 किमी हिस्से का निर्माण किया जाएगा।

सितंबर में जारी हुई थी तकनीक-बिड

एनएचएसआरसी ने इस प्रोजेक्ट के सबसे बड़े 47% हिस्से के वापी-बिलिमोरा-सूरत और वडोदरा के बीच 237 किमी कॉरिडोर बनाने की तकनीकी बिड 23 सितंबर को जारी की थी। इससे पहले एनएचएसआरसीएल ने इसके निर्माण के लिए मार्च 2019 में टेंडर जारी किया था। 23 सितंबर 2020 में इसकी टेक्निकल बिड खोली थी। तीन कंपनियां फाइनेंशियल बिड में शामिल हुईं थीं। लार्सन एंड टुब्रो (L&T) उन्हीं में से एक थी। यह वही कंपनी है, जिसने दुनिया की सबसे उूंची मूर्ति स्टैच्यू आॅफ यूनिटी बनवाई थी। देश के कई अन्य बड़े प्रोजेक्ट भी इसके पास हैं।

508 किमी का है हाई स्पीड रेल का पूरा प्रोजेक्ट

मुंबई से अहमदाबाद के बीच चलने वाली देश की पहली सेमी-हाई स्पीड बुलेट ट्रेन का कुल रूट 508 किमी लंबा है। इस 508 किमी के हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का 155 किमी रूट महाराष्ट्र में, 4.3 किमी रूट यूनियन टेरेटरी दादरा नगर हवेली में और 348 किमी हिस्सा गुजरात में है। अधिकारियों के मुताबिक, पैकेज सी 4 यानी वडोदरा-सूरत-वापी तक परियोजना का 46.66% हिस्सा है। इसी हिस्से का काम अब लार्सन एंड टुब्रो (L&T) पूरा करेगी। उसके द्वारा यहां एलिवेटेड मार्ग, नदियों पर ब्रिज, सूरत डिपो एवं अन्य इंजीनियरिंग कार्य भी होंगे।


कितने स्टेशन बनेंगे पहली बुलेट ट्रेन के?

एनएचएसआरसी के इस प्रोजेक्ट में कुल 12 स्टेशन बनेंगे। एनएचआरसीएल के मैनेजिंग डायरेक्टर अचल खरे के मुताबिक, रूट पर देश की पहली हाईस्पीड ट्रेन 2023 के अंत तक दौड़ सकती है। इस हाई स्पीड रेल की रफ्तार 320 किमी प्रति घंटा होगी। यानी यह ट्रेन अहमदाबाद से मुंबई की दूरी 2 घंटे में तय कर सकती है। तेज स्पीड के चलते एक ट्रेन सीमित स्टेशनों पर ही रुकेगी। वहीं, स्लो बुलेट ट्रेन यह दूरी 3 घंटे में तय करेगी और सभी 12 स्टेशनों पर ठहरेगी।

कितना किराया हो सकता है ट्रेन का?

मुंबई-अहमदाबाद के 508 किमी लंबे मार्ग पर दौड़ने वाली बुलेट ट्रेन के किराए की बात अभी स्पष्ट नहीं हुई। हालांकि, नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के एक अधिकारी ने कहा था कि, इसमें सफर करने के लिए करीब 3000 रुपये चुकाने होंगे। महज 2:07 घंटे में इसके जरिए 508 किमी की दूरी तय की जा सकेगी। यानी ट्रेन की रफ्तार लगभग 320 किमी प्रति घंटे होगी।



प्रोजेक्ट से 25,000 लोगों को रोजगार का दावा

नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) के मैनेजिंग डायरेक्टर अचल खरे ने पिछले साल बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में आ रही अड़चनों का जिक्र किया था। जिसमें लोगों को रोजगार मुहैया कराने का वादा करते हुए खरे ने यह भी कहा कि बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत 25,000 लोगों को रोजगार दिया जाएगा। यह बिलियन डॉलर्स का प्रोजेक्ट है तो इसमें कर्मचारियों की संख्या भी काफी ज्यादा होगी। 24 हजार करोड़ रुपए बड़ी राशि का अनुबंध तो अकेले एलएंडटी के साथ हुआ है।
भारतीय रेलवे की खानपान व्यवस्था, पर्यटन और ऑनलाइन टिकट संबंधी गतिविधियों का कार्यभार संभालने वाली आईआरसीटीसी विशेष रेलगाड़ियों में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए ई-खानपान सेवाओं को फिर से शुरू करने जा रहा है।

भारतीय रेलवे की खानपान व्यवस्था, पर्यटन और ऑनलाइन टिकट संबंधी गतिविधियों का कार्यभार संभालने वाली आईआरसीटीसी विशेष रेलगाड़ियों में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए ई-खानपान सेवाओं को फिर
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से शुरू करने जा रहा है।

लखनऊ: कोरोना का असर कम होने के बाद धीरे-धीरे जिन्दगी सामान्य होने की तरफ है पर अब तक ट्रेनों को संचालन को लेकर कोई नीति सामने नहीं आ पाई है। कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार को रोकने और लॉकडाउन की वजह से भारतीय रेलवे की सेवाएं लंबे समय तक प्रभावित है। लॉकडाउन के बाद कई ट्रेनें तो पटरी पर दोबारा नजर आईं, लेकिन रेलवे ने 100 प्रतिशत रेल चलाने का फैसला अब तक नहीं लिया है। संभावना इस बात की है कि सभी ट्रेनों को वापस ट्रैक पर लौटने में 2 महीने और लग सकते हैं।



इस समय केवल 65 प्रतिशत ट्रेनों का ही संचालन किया जा रहा है। रेलवे दिल्ली-एनसीआर में लोकल रेल सेवा को फिर से शुरू करने की तैयारी में भी है। इधर भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (आईआरसीटीसी) अगले महीने से अपनी ई-खानपान सेवाओं को फिर से शुरू करना चाहता है।

ई-खानपान सेवाओं को फिर से शुरू करने जा रहा है

भारतीय रेलवे की खानपान व्यवस्था, पर्यटन और ऑनलाइन टिकट संबंधी गतिविधियों का कार्यभार संभालने वाली आईआरसीटीसी विशेष रेलगाड़ियों में यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए ई-खानपान सेवाओं को फिर से शुरू करने जा रहा है। इसकी शुरूआत में लगभग 250 रेलगाड़ियों के लिए लगभग 30 रेलवे स्टेशनों पर सेवाएं शुरू की जाएंगी। पर सवाल यह है कि उन 150 ट्रेनों का क्या होगा जो प्राइवेट चलनी थी।

जुलाई 2020 में भारतीय रेलवे ने 109 रूटों पर ट्रेन चलाने के लिए निजी कंपनियों से ‘रिक्वेस्ट फॉर क्वालिफिकेशन’ यानी आरएफक्यू आमंत्रित किया था। जिसमें रेलगाड़ियां अप्रैल 2023 में शुरू किए जाने का प्रस्ताव है। लेकिन अब सवाल इस बात का है कि पहली प्राइवेट ट्रेन तेजस का हश्र देख कर अब दूसरी प्राइवेट कंपनियाँ ट्रेन चलाने के लिए कितना आगे आएंगी। पिछले साल अक्टूबर में बेहद तामझाम से शुरू हुई देश की पहली कॉरपोरेट ट्रेन तेजस का संचालन बंद हो गया है।

रोजाना 13 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ रहा था

इसके पीछे सबसे बड़ा कारण कि तेजस चलाने के एवज में रेलवे को रोजाना 13 लाख रुपये का भुगतान करना पड़ रहा था । यह ट्रेन पहली बार पिछले साल 4 अक्टूबर को पहली बार लखनऊ से यात्रियों के साथ चली थी। लखनऊ-नई दिल्ली के बीच चल रही तेजस का संचालन आईटीआरसी के जिम्मे था। कोरोना काल में 23 नवंबर के बाद 20 से 30 यात्री ही रोजाना सीटों की बुकिंग करा रहे थे।

सफर के साथ कई और भी सौगातें दी जाती थीं

कोरोना महामारी के बाद लॉकडाउन की वजह से तेजस एक्सप्रेस का परिचालन पिछले साल 19 मार्च यानी करीब सात महीने से बंद था। इसके बाद गत वर्ष नवरात्र के पहले दिन ही तेजस ट्रेन को फिर से चलाया गया। लेकिन यात्रियों की संख्या लगातार कम होने के कारण आईआरसीटीसी ने रेलवे बोर्ड को गत 23 नवंबर से ट्रेन को निरस्त करने के लिए पत्र लिखा था। दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस में यात्रियों को बेहतर सफर के साथ कई और भी सौगातें दी जाती थीं। प्रत्येक यात्री को 25 लाख रुपये का यात्रा बीमा मुफ्त में दिया जाता था।

लखनऊ से नई दिल्ली का एसी चेयरकार का शुरुआती किराया 1125 रुपये रखा गया था। जबकि शताब्दी एक्सप्रेस का चेयरकार का किराया 1180 रुपये था। तेजस स्पेशल का एक्जक्यूटिव क्लास का लखनऊ से नई दिल्ली का किराया 2310 रुपये था। इस ट्रेन के यात्रियों को एयरलाइंस जैसी बेहतरी सुविधाएं भी दी जाती हैं।

लखनऊ-दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस अक्टूबर 2019 में शुरू की थी

लखनऊ-दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस अक्टूबर 2019 में शुरू की थी। इस ट्रेन की खास बात यह थी कि यात्रियों का सामान उनके घर से ट्रेन में उनकी सीट तक लाने की सुविधा दी जा रही थी। इसके लिए अलग से शुल्क चुकाने के साथ ही भारतीय रेलवे ने अपनी कुछ ट्रेनों को निजी कंपनियों को सौंपने की योजना के तौर पर आईआरसीटीसी को पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस ट्रेन का जिम्मा सौंपा था। इस ट्रेन की खासियत ये थी कि आईआरसीटीसी की दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस के यात्रियों को मुफ्त में 25 लाख रुपये का रेल यात्रा बीमा दिया जा रहा था। इस ट्रेन के यात्रियों को लखनऊ जंक्शन स्टेशन पर रिटायरिंग रूम और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक्जिक्यूटिव लाउंज का उपयोग करने की भी सुविधा दी जा रही थी।

देश की पहली कॉरपोरेट ट्रेन तेजस लखनऊ से दिल्ली के बीच चल रही थी

देश की पहली कॉरपोरेट ट्रेन तेजस लखनऊ से दिल्ली के बीच चल रही थी। इस बीच वाराणसी से इंदौर के बीच महाकाल एक्सप्रेस का संचालन आईआरसीटीसी को दे दिया गया। अब सवाल इस बात का है कि केन्द्र सरकार की निजी कम्पनियों को ट्रेनों के संचालन की भावी योजना का अब क्या होगा। तेजस एक्सप्रेस और वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के बाद भारतीय रेलवे (प्दकपंद त्ंपसूंले) 100 और नए रूट्स पर प्राइवेट ट्रेन चलाने की योजना में है। इसको लेकर रेल मंत्रालय ने पूरा प्लान बना लिया है। भारतीय रेलवे ने 150 प्राइवेट ट्रेन चलाने के लिए 100 रेल मार्ग का चयन किया है। लेकिन तेजस एक्सप्रेस ने इस पूरी योजना पर सवाल खडे कर दिए हैं।

कोरोना के कारण जब देश में लॉकडाउन लगाया गया

कोरोना के कारण जब देश में लॉकडाउन लगाया गया। उसके पहले जनवरी में देष के कई रूटों पर प्राइवेट ट्रेन चलाने की योजना को अंतिम रूप दिया जा चुका है जिसमें मुंबई-कोलकाता, मुंबई-चेन्नई, मुंबई-गुवाहाटी, नई दिल्ली-मुंबई, तिरूअनंतपुरम-गुवाहाटी, नई दिल्ली-कोलकाता, नई दिल्ली-बेंगलुरु, नई दिल्ली-चेन्नई, कोलकाता-चेन्नई और चेन्नई-जोधपुर के अलावा न्य रेल मार्ग में मुंबई-वाराणसी, मुंबई-पुणे, मुंबई-लखनऊ, मुंबई-नागपुर, नागपुर-पुणे, सिकंदराबाद-विशाखापट्टनम, पटना-बेंगलुरु, पुणे-पटना, चेन्नई-कोयंबटूर, चेन्नई-सिकंदराबाद, सूरत-वाराणसी और भुवनेश्वर-कोलकाता शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही रेलवे नई दिल्ली से पटना, इलाहाबाद, अमृतसर, चंडीगढ़, कटरा, गोरखपुर, छपरा और भागलपुर रेल रूट पर भी निजी ट्रेन चलाने की योजना बना चुका है।

भारतीय रेलवे के इन 100 रूट में से 35 नई दिल्ली से कनेक्ट होंगे। जबकि 26 मुंबई से, 12 कोलकाता से, 11 चेन्नई से और आठ बेंगलुरु से कनेक्ट होंगे। कुछ अन्य प्रस्तावित गैर महानगर मार्गों में गोरखपुर-लखनऊ, कोटा-जयपुर, चंडीगढ़-लखनऊ, विशाखापट्टनम-तिरुपति और नागपुर-पुणे शामिल हैं। रेलवे यूनियन के एक पदाधिकारी बताते हैं कि तेजस को चलाकर एक बड़ा दांव चला गया था जो पूरी तरह से असफल हो गया। ट्रेन होस्टेस के नाम पर ग्लैमर दिखाने की एक कोशिश की गई थी, लेकिन भारत में ऐसी कोशिशें नहीं चल सकती।
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