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Mangala Lakshadweep: meri raah tujhse, meri chaah tujhse; mujhe bas yahin reh jaana - Kirti Solanki

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Wed May 27 04:08:03 IST
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प्रवासी पहले सड़क पर, फिर रेलवे ट्रैक पर और अब ट्रेन में मरने को मजबूर
17 मई को गुजरात के सूरत से सीवान के लिए चली ट्रेन 25 मई को पहुंची
पटना. सड़क हादसों में, रेल पटरियों पर और अब लोग ट्रेनों में दम तोड़ने लगे हैं। प्रवासियों को उनके जिलों तक छोड़ने के लिए रेलवे की श्रमिक स्पेशल ट्रेनों का कोई माई-बाप नहीं है। ट्रेनें रास्ता भटक जा रही हैं। कहीं की कहीं पहुंच जा रही हैं। 
गुजरात
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के सूरत से 17 मई को चली जिस ट्रेन को 2 दिन में बिहार के सीवान पहुंचना था, लेकिन वह 8 दिनों बाद 25 मई को सीवान पहुंची। ट्रेन को गोरखपुर के रास्ते सीवान आना था, लेकिन छपरा होकर आई। सूरत से ही सीवान के लिए निकली दो ट्रेनें ओडिशा के राउरकेला और बेंगलुरु पहुंच गईं। ट्रेनों के भटकने का सिलसिला यहीं खत्म नहीं होता, बल्कि जयपुर-पटना-भागलपुर 04875 श्रमिक स्पेशल ट्रेन रविवार की रात पटना की बजाय गया जंक्शन पहुंच गई।
रेल मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक ट्वीट में इसे आधा सच करार दिया, लेकिन सीवान के उप विकास आयुक्त सुनील कुमार ने भास्कर से बातचीत में इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि सूरत से चली ट्रेनें भटक गई थीं और देरी से सीवान पहुंची थीं।
भीषण गर्मी, अव्यवस्था निगल रहीं जिंदगियां
1. ट्रेन में चढ़ने के दौरान चार वर्षीय इरशाद की मौतपश्चिम चंपारण जिला के चनपटिया थाना के तुलाराम घाट निवासी मोहम्मद पिंटू शनिवार को दिल्ली से पटना के लिए चले। सोमवार सुबह दानापुर से मुजफ्फरपुर जंक्शन पहुंचे। मुजफ्फरपुर में बेतिया की ट्रेन में चढ़ने के दौरान इरशाद की मौत हो गई। पिंटू ने बताया कि उमस भरी गर्मी और पेट में अन्न का दाना नहीं होने के कारण उन लोगों ने अपने लाड़ले को खो दिया।
2. जब उठाने की कोशिश की तो पता चला मौत हो गईमहाराष्ट्र से आ रहे मजदूर को आरा में लोगों ने जब उठाना चाहा तो पाया कि उसकी मौत हो चुकी है। उसकी पहचान नबी हसन के बेटे निसार खान के रूप में हुई। वह गया का रहने वाला था।
3. बरौनी में टूट गई अनवर की सांस, 4 दिन से भूखे थेमहाराष्ट्र के बांद्रा टर्मिनल से 21 मई को श्रमिक स्पेशल ट्रेन से घर लौट रहे कटिहार के 55 साल के मोहम्मद अनवर की सोमवार शाम बरौनी जंक्शन पर मौत हो गई। अनवर बरौनी ने 10 रुपये का सत्तू खरीद कर खाया और कर्मनाशा से कटिहार जा रही श्रमिक स्पेशल ट्रेन पर सवार होने से पहले वह पानी लेने उतरा था, इसी बीच उसकी मौत हो गई।  
4. ओबरा की महिला ने पति की गोद में दम तोड़ दियासूरत से श्रमिक स्पेशल से दोपहर 1 बजे सासाराम पहुंची महिला ने पति से कहा भूख लगी है। स्टेशन पर ही पति के सामने नाश्ता किया और उसके बाद कांपने लगी। पति की गोद में ही उसने दम तोड़ दिया। वह ओबरा प्रखंड के गौरी गांव की रहने वाली थी। महिला की मौत होते ही सासाराम स्टेशन पर कई लोग इधर-उधर भागने लगे। पति ने कहा मैं असहाय, क्या करता?
5. ट्रेन में तबीयत खराब हुई, अस्पताल में सांस टूट गईमहाराष्ट्र से आ रहे एक श्रमिक की ट्रेन में हालत खराब होने के बाद उसकी मौत हो गई। वह मोतिहारी जिले के कुंडवा-चैनपुर का निवासी बताया जा रहा है। दरअसल, उसकी तबियत खराब होने के बाद उसे ट्रेन से उतारकर जहानाबाद सदर अस्पताल लाया गया। वहां पहुंचते ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।  
6. कानपुर से गया तक बच्चे की लाश के साथ सफरराजकोट-भागलपुर श्रमिक स्पेशल ट्रेन से गया में सोमवार को 8 माह के बच्चे के शव को उतारा गया। परिवार मुंबई से सीतामढ़ी जा रहा था। आगरा में बच्चे का इलाज हुआ। कानपुर के पास मौत हो गई। दंपती देवेश पंडित सीतामढ़ी के खजूरी सैदपुर थाना क्षेत्र के सोनपुर गांव का रहने वाले हैं।  
7. कटिहार जा रही अवलिना की ट्रेन में ही निकली जानअहमदाबाद से जंक्शन मुजफ्फरपुर पहुंची स्पेशल ट्रेन में कटिहार की रहने वाली 23 साल की अलविना खातून मौत हो गई। वह अपने जीजा इस्लाम खान के साथ अहमदाबाद से घर लौट रही थी। अलविना विक्षिप्त थी। उसका इलाज चल रहा था।
  
आईजी ने बिलासपुर जोन के रेलवे अफसरों के साथ कटनी-सतना के पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर उन्हें इसके बारे में सूचित किया
इसके बाद रेलवे व पुलिस के सामंजस्य से सतना में 300 यात्रियों को पानी के बोतल व खाना उपलब्ध कराया गया
 बिहार के दरभंगा से दुर्ग के लिए रविवार सुबह 300 छत्तीसगढ़वासियों को लेकर निकली ट्रेन में 34 घंटे तक न तो पानी मिल पाया न ही खाना। भूख-प्यास से तड़प रहे बच्चों, महिलाओं व बुजुर्गों की हालत खराब होती जा रही थी।
इस
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दौरान ट्रेन में सफर कर रही माधुरी धारीवाल और रायगढ़ आ रहे कुंदन शाही ने ट्वीट व व्हाट्सअप कर मदद मांगी। इस मैसेज को किसी व्यक्ति ने रेलवे अफसरों के साथ बिलासपुर आईजी दीपांशु काबरा को ट्वीट कर मदद करने को कहा। आईजी ने बिलासपुर जोन के रेलवे अफसरों के साथ कटनी-सतना के पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर उन्हें इसके बारे में सूचित किया। इसके बाद रेलवे व पुलिस के सामंजस्य से सतना में 300 यात्रियों को पानी के बोतल व खाना उपलब्ध कराया गया। रायगढ़ के यात्री कंदन शाही ने कुछ दोस्तों व लोगों ने सोशल मीडिया में यहां मदद करने व भूख से तड़प रहे खाना-पानी की व्यवस्था करने के लिए गुहार लगाई। ट्रेन में सफर कर रही माधुरी धारीवाल ने भी ट्वीट कर रेलवे व अन्य से मदद मांगी। माधुरी ने लिखा कि अभी ट्रेन प्रयागराज से निकली है, अगले तीन घंटे में कोई यह व्यवस्था करा दे।
इसके बाद इसे बिलासपुर आईजी को किसी ने यह ट्वीट पौन 6 बजे रीट्वीट किया। इसके बाद आईजी दीपांशु काबरा ने बिलासपुर जोन जीएम के सेक्रेटरी समेत अन्य रेलवे अफसरों के साथ अपने बैच के कटनी आईजी डी श्रीनिवास वर्मा से बात की। रेलवे की तरफ से भी जबलपुर डीआरएम को यह सूचना गई। जैसे ही 7-8 बजे के करीब यह ट्रेन सतना पहुंची तो रेलवे ने 390 बोतल पानी और 300 खाने के पैकेट यात्रियों को उपलब्ध कराए। खाना व पानी बांटने तक ट्रेन रोकी गई। इसके बाद ही उसे रवाना किया गया।
  
Yesterday (23:34) 1 जून से चलने वाली 6 ट्रेनाें का टाइम-टेबल जारी, स्पेशल के तौर पर दोनों रूट पर चलेंगी ट्रेनें, स्टॉपेज भी तय (www.bhaskar.com)
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SECR/South East Central
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May 26 2020 (23:35)
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May 26 2020 (23:35)
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May 26 2020 (23:35)
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May 26 2020 (23:35)
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May 26 2020 (23:35)
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May 26 2020 (23:35)
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रायपुर.  रेलवे ने 1 जून से 100 जाेड़ी ट्रेनें चलाने की तैयारी है। रायपुर समेत छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली 6 ट्रेनों का टाइम-टेबल जारी हो गया है। रेलवे ने हावड़ा-अहमदाबाद एक्सप्रेस, मुंबई-हावड़ा मेल और रायगढ़-गोंदिया जनशताब्दी के स्टेशनों में पहुंचने और छूटने के समय को तय कर दिया है। रायगढ़ से लेकर बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग व डोंगरगढ़ तक प्रदेश के स्टेशन हैं। सभी स्टेशनों पर स्टॉपेज के साथ ही उसके आगमन और प्रस्थान के समय को तय कर दिया गया है। सभी ट्रेनें स्पेशल के तौर पर चलाई जाएंगी। 
रायपुर पहुंचने का समय
हावड़ा-अहमदाबाद
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1.35 बजे 
अहमदाबाद-हावड़ा रात 10.55 बजे
हावड़ा-मंुबई मेल 9.05 बजे 
मुंबई से हावड़ा शाम 4 बजे 
जनशताब्दी एक्सप्रेस : रायगढ़ से सुबह 6.20 बजे छूटकर बिलासपुर सुबह 8.40 बजे, रायपुर 10.25 बजे, दुर्ग 11.20 बजे, राजनांदगांव 11.47 बजे, 12.14 बजे डोंगरगढ़ पहुंचेगी।
गोंदिया से रायगढ़ तक जाने वाली जनशताब्दी शाम 5.45 बजे रायपुर, 6.48 बजे बिलासपुर व रात 10 बजे रायगढ़ तक जाएगी। टाइम-टेबल के साथ ही स्टेशनों में स्टॉपेज भी निर्धारित हो गए हैं। ढाई महीने बाद रायपुर से गुजरने वाली छह ट्रेनों में यात्रियों के सफर करने संबंधित पूरी तैयारी हो गई है।-तन्मय मुखोपाध्याय, सीनियर डीसीएम, रायपुर
  
Yesterday (23:31) 45 ट्रेनाें से 56 हजार से अधिक मजदूर लाैटे, 10 दिनों में सवा लाख और आएंगे (www.bhaskar.com)
Commentary/Human Interest
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May 26 2020 (23:31)
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Stations:  Raipur Junction/R  
रायपुर. (अमनेश दुबे ) देशभर के विभिन्न प्रांतों में फंसे छत्तीसगढ़ के मजदूरों को वापस लाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। अभी तक रायपुर सहित प्रदेश में 45 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें आ चुकी हैं। इन ट्रेनों से अबतक 56 हजार से भी अधिक मजदूरों को वापस लाया गया है। श्रमिकों को अन्य प्रदेशों से लाने की कवायद तेज कर दी गई है। राज्य सरकार की एजेंसियां फंसे हुए मजदूरों का आंकलन करके ट्रेन चलाने का प्रस्ताव भेज रही है। मिली जानकारी के मुताबिक श्रमिक ट्रेनों से सवा लाख तक श्रमिकों को लाने का लक्ष्य तय किया गया है।इसी के हिसाब से पूरी तैयारी की गई है। पिछले एक हफ्ते से रोजाना औसतन चार से पांच ट्रेनें रायपुर स्टेशन पहुंच रही हैं। इसी तरह राजनांदगांव, दुर्ग, बिलासपुर व चांपा स्टेशन में भी श्रमिक ट्रेनें पहुंच रही हैं। एक ट्रेन में 800 से 2 हजार तक यात्री आए। इनमें मजदूरों के साथ...
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ही आम नागरिक भी आए हैं। रेलवे अफसरों से मिली जानकारी के मुताबिक अगले 10 दिनों तक देशभर में 2600 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलेंगी। इसमें अन्य राज्यों से छत्तीसगढ़ आने वाली ट्रेनें भी शामिल हैं। राज्य शासन ने मजदूरों के पंजीयन को देखते हुए ट्रेनों की संख्या को बढ़ाने का फैसला किया है। जम्मू, आंध्रप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में फंसे मजदूरों को लाने के लिए भी कई ट्रेनें चलाने की तैयारी हैै। 11 मई को अहमदाबाद से पहली श्रमिक स्पेशल: श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से मजदूरों को लाने का सिलसिला 11 मई से शुरू की गई। 15 दिनों से छत्तीसगढ़ के श्रमिकों को लाने का क्रम जारी है। पहली ट्रेन गुजरात के अहमदाबाद से बिलासपुर पहुुंची। इसके बाद रायपुर सहित अन्य स्टेशनों में भी श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में प्रदेशभर के विभिन्न जिलों से मजदूर आए। पहले से रायपुर व बिलासपुर में रूकने वाली ट्रेनों के स्टॉपेज को दुर्ग और भाटापारा व राजनांदगांव में बढ़ाया गया। ताकि जिला मुख्यालय से नजदीक ही मजदूरों को उतारकर सरकारी क्वारेंटाइन में भेजा जा सके।
15 प्रदेशों से आए श्रमिक, सबसे अधिक गुजरात से :अब तक छत्तीसगढ़ के श्रमिकों को देशभर के 15 प्रदेशों से सकुशल वापस लाया गया है। सबसे अधिक गुजरात के विभिन्न स्टेशनों से 15 ट्रेनेें छत्तीसगढ़ आ चुकी हैं। गुजरात से लगभग 23 हजार श्रमिक ट्रेनों से आ चुके हैं। इसके बाद महाराष्ट्र से छह और उत्तरप्रदेश से पांच ट्रेनें आई हैं। जम्मू-कश्मीर से 04, तेलंगाना से 03 और पंजाब से 02 श्रमिक ट्रेनें से मजदूरों को लाया गया है। इसी तरह आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक, उत्तराखंड, ओड़िशा, बिहार, राजस्थान और तमिलनाडु से भी 1-1 ट्रेनें आई हैं। मंगलवार को केरला से एक ट्रेन मजदूरों को लेकर आएगी।
मेडिकल काॅलेज अस्पताल के कोरोना आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कोरोना संदिग्ध युवक का शव सोमवार शाम को फांसी से लटका मिला। जब कर्मचारी चाय देने वार्ड में गए तो पता चला। कमरे के दरवाजे के रोशनदान में लुंड्रा थाने के ग्राम छेराडीह निवासी 25 वर्षीय करमचंद गीरी का शव गमछे से लटका था। सूचना पर एडिशनल एसपी ओम चंदेल, मणिपुर चौकी प्रभारी प्रमोद यादव पहुंचे। पुलिस ने आइसोलेशन वार्ड को दूर से देखा। युवक कुछ दिन पहले ही दिल्ली से लौटा था।  उसे लुंड्रा के क्वारेंटाइन सेंटर से लाकर मेडिकल काॅलेज अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया था। युवक की कोरोना जांच रिपोर्ट भी अभी नहीं आई है।
 हालांकि रैपिड टेस्ट निगेटिव था। उसे अंबिकापुर मेडिकल काॅलेज अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में 23 मई को भर्ती किया गया था। युवक जिस कमरे में था, उसमें दो और कोरोना संदिग्ध थे जो डिस्चार्ज होकर रविवार को ही चले गए थे। इस वार्ड के अन्य कमरों में अभी करीब 7 कोरोना संदिग्ध है। युवक जिस कमरे में भर्ती था। अभी उसमें दूसरे मरीज नहीं थे।
  
May 25 (10:21) Indore News : सुरंग भरने का ही खर्च 90 करोड़ आएगा, इतने में तो धार तक लाइन बिछ जाएगी (www.naidunia.com)
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May 25 2020 (10:22)
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May 25 2020 (10:22)
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May 25 2020 (10:22)
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इंदौर । Indore News इंदौर-दाहोद रेल लाइन के काम को होल्ड पर रखने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इसमें एक महत्वपूर्ण तथ्य यह पता चला है कि मौजूदा हालत में प्रोजेक्ट के तहत टीही से पीथमपुर के बीच बनाई जा रही तीन किलोमीटर लंबी सुरंग का काम बंद नहीं किया जा सकता। आगे बारिश का सीजन है और सुरंग को यदि जस का तस छोड़ दिया तो पानी भरने से सुरंग धंसने का खतरा रहेगा। यदि रेलवे काम बंद करने के लिए सुरंग को बंद करने का फैसला लेता है तो इस पर 80 से 90 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इतनी राशि में तो धार तक लाइन बिछाने का काफी काम हो सकता है। दूसरा अहम तर्क यह है कि रेलवे टेंडर निरस्त करेगा तो कई ठेकेदार क्षतिपूर्ति के लिए कानून का सहारा लेंगे। इससे रेलवे को कानूनी लड़ाई लड़ने में काफी राशि खर्च करनी...
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पड़ेगी। जानकार कहते हैं कि पीथमपुर से सागौर के बीच का बचा काम जल्द पूरा हो सकता है। रेलवे चाहे तो सागौर होते हुए धार तक का काम पूरा कर सकता है।
रेलवे का तर्क
- पश्चिम रेलवे मुंबई के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी रवींद्र भाकर ने बताया कि रेलवे बोर्ड की गाइडलाइन के अनुसार 90 प्रतिशत जमीन अधिग्रहण के बाद नई लाइन का काम शुरू किया जा सकता है। यह इस उद्देश्य से किया गया है जिससे राष्ट्रीय संसाधनों का अधिकतम उपयोग हो सके और रेल लाइनों का काम समय पर पूरा हो सके।
- इंदौर-दाहोद रेल प्रोजेक्ट के लिए 1118 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है और अब तक लगभग 402 हेक्टेयर जमीन ही अधिग्रहित हो सकी है। यानी अब तक केवल 36 प्रतिशत जमीन ही मिल पाई है।
- सीपीआरओ के अनुसार प्रोजेक्ट के लिए वन और पर्यावरण विभाग की अनुमतियां लेने के प्रयास भी जारी हैं। इसलिए अस्थायी रूप से 90 प्रतिशत जमीन मिलने तक काम रोका गया है।
विशेषज्ञ का जवाब
- रेलवे मामलों के वरिष्ठ जानकार नागेश नामजोशी ने बताया कि रेलवे बोर्ड ने ईपीसी (इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट कांट्रेक्ट) के अंतर्गत 15 अक्टूबर 2015 को एक परिपत्र जारी किया था। उसके एनेक्सचर क्रमांक 1 के छठे बिंदु पर 90 प्रतिशत जमीन अधिग्रहण संबंधी बात का उल्लेख है।
- पश्चिम रेलवे ने टीही के पास सुरंग बनाने के लिए 2017 में टेंडर बुलाए थे। क्या तब अफसरों को बोर्ड के परिपत्र की जानकारी नहीं थी? ऐसी स्थिति में अब यह कहना कि 90 प्रतिशत जमीन उपलब्ध नहीं होने से प्रोजेक्ट बंद किया जा रहा है, यह गलत है।
- इसी सुरंग पर लॉकडाउन में काम जारी रखने के लिए पश्चिम रेलवे ने धार कलेक्टर से अनुमति मांगी थी। कलेक्टर ने 15 मई को अनुमति दे भी दी। क्या तब भी पश्चिम रेलवे को परिपत्र की जानकारी नहीं थी? परिपत्र को ध्यान से पढ़ा जाए तो यह केवल नए प्रोजेक्ट के लिए गाइडलाइन के बतौर जारी किया गया है।
- दाहोद लाइन पुराना प्रोजेक्ट है और उस पर पहले से ही काम हो रहा था और टेंडर भी स्वीकृत हो चुके थे। दाहोद लाइन के संदर्भ में बोर्ड के हालिया आदेश में साफ लिखा है कि टेंडर निरस्त कर जो काम हो रहा है, उसे रोका जाए।
- इंदौर-दाहोद लाइन का भूमिपूजन हुए 12 साल गुजर चुके हैं। इतना समय गुजरने के बावजूद रेलवे अब तक रेल लाइन के लिए जरूरी जमीन भी नहीं ले पाया। इससे कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
काम रोकना महामूर्खता, सीएम को साथ लेकर लड़ेंगे लड़ाई
पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन ने कहा कि इंदौर-दाहोद रेल लाइन प्रोजेक्ट को मैं बहुत अलग नजर से देखती हूं। यह लाइन न केवल पीथमपुर, धार, झाबुआ या इंदौर नहीं बल्कि समूचे मध्य भारत के विकास के लिए जरूरी है। यह परियोजना मूल रूप से आदिवासी क्षेत्र के औद्योगिक विकास की है। जिस हिसाब से विदेशी कंपनियों का आगमन हो रहा है, उसके लिए पीथमपुर का रेल लाइन से जुड़ना बेहद जरूरी है।
लाइन के बिछने से यात्री और मालगाड़ियां महू होते हुए खंडवा की ओर आ-जा सकेंगी। झाबुआ में भूमिपूजन होने के बाद से प्रोजेक्ट को कोई तवज्जो नहीं दी गई। रेलवे को चाहिए कि फिलहाल इंदौर से धार तक का प्रोजेक्ट पूरा कर ले। टीही से सागौर के बीच सुरंग का काम रोकना महामूर्खता होगी। बारिश के दिनों में कोई सुरंग का काम आधा-अधूरा कैसे छोड़ सकता है? सुरंग पर करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं और काम बंद करने से काफी नुकसान होगा।
मुझे विश्वास है कि बोर्ड ने बिना रेल मंत्री को जानकारी दिए काम रोकने का फैसला लिया है। निर्णय के खिलाफ सांकेतिक आंदोलन शुरू करेंगे महाजन ने कहा कि इस निर्णय के खिलाफ सब मिलकर सांकेतिक आंदोलन शुरू करेंगे। इसमें मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और पीथमपुर के उद्योगपतियों को जोड़ेंगे।
मुख्यमंत्री से आग्रह करेंगे कि वे विकास की लड़ाई लड़ें। जरूरत पड़ी तो उन्हें नई दिल्ली ले जाएंगे। विकास के लिए काम करने वाले सभी संगठनों से मेरा आग्रह है कि वे सब एकजुट हों और इस प्रोजेक्ट को पूरा करवाने का लक्ष्य रखकर काम करें। इस विषय को लेकर इंदौर, धार, झाबुआ और दाहोद के सांसदों से भी बात कर रही हूं।
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