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Sat Dec 15 16:38:23 IST
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नई दिल्ली: गांधीनगर देश का पहला रेलवे स्टेशन होगा जिसमें एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं मिलेंगी. इसे विश्व स्तरीय रेलवे स्टेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है और 2019 की शुरुआत में इसकी सौगत देश को मिलने वाली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2017 में इसका भूमिपूजन किया था. इस स्टेशन के ऊपर एक फाइव स्टार होटल का निर्माण जारी है. इस पांच सितारा होटल में 300 कमरे होंगे. पूरे स्टेशन में तीन बिल्डिंग होंगी और यह फूल की पंखुड़ियों के आकार की होंगी. इस स्टेशन के नीचे से रेलगाड़ियां गुजरेंगी.
इसके अलावा, ट्रांजिट हॉल, कियोस्क, दुकानें, बुक स्टॉल, फूड स्टॉल्स, मॉड्यूलर क्लीन टॉयलेट्स होंगे. स्टेशन में यात्रियों के बैठने के लिए 600 सीटों का इंतजाम होगा. इस प्रोजेक्ट की अनुमानित
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लागत 250 करोड़ रुपए है. यह एसपीवी प्रोजेक्ट है जिसमें IRSDC और गुजरात सरकार की हिस्सेदारी है. होटल का ग्राउंड फ्लोर जमीन से 22 मीटर ऊपर होगा. इसके अलावा, स्टेशन में एक प्रार्थना स्थल, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र होगा. स्टेशन में तीन लिफ्ट और 2 एस्कलेटर होंगे. 
यात्रियों के सुविधा के लिए मल्टीप्लेक्सइस रेलवे स्टेशन पर मल्टीप्लेक्स और ब्रांडेड रिटेल स्टोर्स खोलने की योजना है. इन मल्टीप्लेक्स में यात्री अपनी पसंद की मूवी और स्टोर्स पर शॉपिंग कर सकेंगे. इंडियन रेलवे स्टेशन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (आईआरएसडीसी) पीवीआर सिनेमा, बिग बाजार और शॉपर्स स्टॉप से बातचीत कर रहा है.  
गांधीनगर की सबसे ऊंची बिल्डिंग होगा होटल65 मीटर की ऊंचाई के साथ यह बिल्डिंग गांधीनगर में सबसे ऊंची होगी. होटल 21,000 वर्ग फीट में बन रहा है जिसमें 2900 वर्गमीटर में ऑफिस खोले जाएंगे. स्वीमिंग पूल की भी सुविधा इस होटल में होगी. इस प्रोजेक्ट के तहत तीन टॉवर होंगे.   
हबीबगंज रेलवे स्टेशन भी होगा वर्ल्ड क्लास हबीबगंज हबीबगंज रेलवे स्टेशन का पुनर्विकास किया जा रहा है. इसे वर्ल्ड क्लास लेवल का स्टेशन बनाया जा रहा है. यह भी जनवरी-फरवरी 2019 तक बनकर तैयार हो जाएगा. इसमें करीब 450 करोड़ रुपये खर्च होंगे. सौ करोड़ रुपये स्टेशन पर और 350 करोड़ रुपये कॉमर्शियल डेवलपमेंट पर खर्च किए जाएंगे. विश्वस्तरीय सुविधाओं की बात करें तो हबीबगंज में यात्रियों के लिए दुकानें, गेमिंग जोन और म्यूजियम आदि भी होंगे. आलीशान प्रतीक्षालय, फूड प्लाजा, कैफेटेरिया, साफ शौचालय आदि भी होंगे.
  
Today (16:04) Stuck on railway Fence Meant to Protect it, Elephant Suffocates To Death in Karnataka’s Nagarhole National Park (www.news18.com)
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New Delhi: Being chased away by villagers, a wild male elephant met a tragic end in Karnataka’s Nagarhole National Park after it got stranded on a railway fence, suffocated on its own body weight and died. The fence was erected by the forest department as part of a Rs 212 crore project to mitigate the elephant conflict.The 42-year-old wild tusker, sources in the forest department said, was being driven away by villagers for attempting to return to the Veerahosahalli range of the national park when it came across the railway fence and attempted to scale it.
It got stranded atop the fence, dangling midair and died due to suffocation after its own weight crushed its diaphragm, the sources added.
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Due to their sheer size, the elephants have several adaptations that allow them to respire. Unlike other mammals, the massive lungs of an elephant are directly attached to the chest cavity and the diaphragm and they breathe by reflexively moving their chest and diaphragm. "What this means is that if the chest or diaphragm is squeezed too much, the animal will die. Its body is adapted to ensure that it doesn't ever put any pressure on its chest. However in this case, the more the elephant struggled to get free, the more it exerted pressure on its chest and eventually suffocated," a forest department official told News18. Envisaged in 2015, the railway fence is first-of-its-kind in Nagarhole wildlife reserve. The idea was to create a 33 km along rail fence the first phase in four forest divisions. These were to exist alongside elephant-proof trenches and used discarded tracks procured from the railways. The project, it was hoped, would not hamper the movement of other wildlife animals that could jump through it or sneak through gaps, while stopping the movement of elephants into human habitation. These fences were developed by Graham Armstrong, the park manager of the Addo Elephant Reserve in the 1950s.But they faced criticism from experts since their very inception. For one, officials admit, the fences have had limited success. An official said, "We have had several cases of sub-adult elephants and calves being able to get their way through. We have also had other cases where elephants have successfully managed to clamber over the fence. We have also had a few cases of tuskers getting stuck while trying to crawl from underneath it. It is also very expensive to set up and maintain."The Karanataka forest department recently drew the ire of the Supreme Court for the use of spikes to drive away elephants, which the bench described as a "barbaric system". Karnataka conceded in September that it had used spiked structures at some places to deter wild elephants. In an affidavit, it had sought six months to remove the existing structures with spikes, after the apex court had directed them to do so.In its affdavit, the state forest department had claimed, “The state government has installed used rail barricades in some rough terrain including black cotton soils. However, there are still some small gaps in the barricades, which cannot be sealed by these structures. In such areas, spikes were being used to deter elephants from entering habitations."
  
नई दिल्लीः इंडियन रेलवे ने परिचालन कारणों से शनिवार को 354 ट्रेनों को रद्द कर दिया है. रद्द की जाने वाली ट्रेनों में सबसे ज्यादा पैसेंजर ट्रेनें हैं. रेलवे की ओर से कुछ मेल व कुछ एक्सप्रेस रेलगाड़ियों के साथ ही कुछ स्पेशल रेलगाड़ियों को भी रद्द किया गया है. देशभर में रेलवे के अलग-अलग जोन में चल रही मरम्मत के कारण कई जगह पर ट्रैफिक ब्लॉक लिए गए हैं. ऐसे में गाड़ियों के बेहतर परिचालन के लिए इन गाड़ियों को रद्द किया गया है.
रेलवे ने नेशनल ट्रेन इंक्वारी सिस्टम (NTES) पर रद्द की गई रेलगाड़ियों की सूची जारी की है. उत्तर भारत के विभिन्न हिस्सों में घने कोहरे के मद्देनजर भी ट्रेनों को रद्द किया गया है. रद्द हुई रेलगाड़ियों
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की सूचना रेलवे की तरफ से वेबसाइट पर दी जाने के अलावा स्टेशनों पर उद्घोषणा के जरिये यात्रियों को बताया जा रहा है. 139 सेवा पर एसएमएस कर के भी गाड़ियों की स्थिति जान सकते हैं. वहीं जिन यात्रियों की रेलगाड़ी रद्द हो गई है वो अपना टिकट रद्द करा कर पूरा रिफंड प्राप्त कर सकते हैं.
  
Today (16:01) संयुक्त अरब अमीरात डीरेका से खरीदेगा पांच डीजल रेल इंजन (m.navbharattimes.indiatimes.com)
IR Affairs
NR/Northern
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Dec 15 2018 (16:01)
Station Tag: Diesel Locomotive Works Rly Siding Varanasi/DLWS added by SP Sharma^~/1833693
वाराणसीवियतनाम, बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार जैसे 11 देशों को रेल इंजनों का निर्यात करने वाला वाराणसी स्थित डीरेका अब संयुक्त अरब अमीरात को भी रेल इंजनों की आपूर्ति करेगा। एतिहाद रेल से डीरेका को अत्याधुनिक तकनीक के पांच रेल इंजनों के निर्माण के साथ ही अतिरिक्त कलपुर्जों की आपूर्ति के लिए क्रय आदेश मिलने की संभावना है। एतिहाद रेल (संयुक्त अरब अमीरात) के संपत्ति प्रबंधक निदेशक मंसूर आलम के नेतृत्व में आए एक प्रतिनिधिमंडल ने डीजल रेल इंजन कारखाने का भ्रमण करने के बाद यह संकेत दिया है। इस प्रतिनिधिमंडल ने डीरेका की महाप्रबंधक रश्मि गोयल से मुलाकात की। वरिष्ठ इंजिनियर पावर सिस्टम मोहम्मद अब्दुल्ला अल शेहनी और वरिष्ठ प्रबंधक रोलिंग स्टॉक एंड्रीस पेट्रस लॉबशर भी संयुक्त अरब अमीारात के प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे। शुक्रवार की शाम को भ्रमण के बाद एतिहाद रेलवे के अधिकारियों ने शानिवार को पांच रेल इंजन खरीदने के लिए हरी झंडी भी दे दी है।अब तक डीरेका...
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ने 11 देशों को 156 डीजल रेल इंजनों का निर्यात किया है, जिनमें तंजानिया, वियतनाम, बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यान्मार, सूडान, सेनेगल, माली, अंगोला, मोजाम्बिक एवं मलेशिया शामिल है। हाल ही में डीरेका ने श्रीलंका को एक रेल इंजन का निर्यात किया है। डीरेका ने विगत वर्ष रेल इंजनों की बिक्री से 333 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया। इस वर्ष 372 करोड़ का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है। डीजल रेल इंजन कारखाना में चालू वित्तीय वर्ष में मिले 400 इलेक्ट्रिक रेल इंजन बनाने के लक्ष्य और घटते डीजल रेल इंजन उत्पादन से डीरेका के मकैनिकल कर्मचारियों ने निराशा व्याप्त थी, लेकिन विदेशों में बढ़ती डीजल रेल इंजन की मांग और शनिवार को आये संयुक्त अरब अमीरात की टीम ने साबित कर दिया कि डीरेका एक मात्र एशिया में ऐसा डीजल रेल कारखाना है जिससे आधुनिक तकनीक का डीजल रेल इंजन खरीदा जा सकता है। प्रतिनिधिमंडल ने महाप्रबंधक राइट्स देवाशीष त्रिपाठी मुख्य विपणन प्रबंधक, मुख्य यांत्रिक इंजीनियर उत्पादन तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विभिन्न कार्यशालाओं का भ्रमण किया। जहां उन्होंने इंजन उत्पादन की प्रक्रिया तथा उपलब्ध निर्माण सुविधाओं को देखा।
  
कानपुर । अति व्यस्त दिल्ली हावड़ा रेलमार्ग पर स्थित उत्तर प्रदेश में कानपुर का पनकी रेलवे स्टेशन 24 दिसम्बर से ‘पनकी धाम’ के नाम से जाना जायेगा।
कानपुर सेंट्रल स्टेशन के उत्तरी छोर से करीब सात किमी की दूरी पर स्थित पनकी रेलवे स्टेशन के नाम परिवर्तन की घोषणा पहले ही कर दी गयी थी हालांकि इस संबंध में औपचारिकतायें पूरी नहीं हो सकी थी। पिछले एक महीने से रेलवे द्वारा जारी टिकट में पनकी धाम लिखकर आने लगा था लेकिन नाम परिवर्तन विधिवत रूप से नहीं हुआ था।
रेलवे के अधिकृत सूत्रों
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ने शनिवार को बताया कि नाम परिवर्तन समारोह की तिथि 24 दिसंबर तय की गयी है जब रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा यहां आयोजित एक समारोह में पनकी धाम रेलवे स्टेशन की औपचारिक घोषणा करेंगे। समारोह में सांसद देवेंद्र सिंह भोले,महापौर प्रमिला पांडेय सहित सभी गणमान्य नागरिकों को आमंत्रित किया गया है।
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