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Rail News
Commentary/Human Interest
SECR/South East Central
Jun 21 (06:06)   गुजरात के लिए नहीं है ट्रेन, कोरबा तक लाएं हापा एक्सप्रेस

AdittyaaSharma^~   24806 news posts
Entry# 4991205   News Entry# 456754         Tags   Past Edits
क़ोरबा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। वर्तमान में कोरबा के लोगों के लिए गुजरात की ओर यात्रा करने सीधी ट्रेन की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इस दिशा में एक विकल्प सुझाते हुए जिला चैंबर आफ कामर्स की ओर से मंडल रेल प्रबंधक बिलासपुर को पत्र लिखा गया है। पत्र के माध्यम से बताया गया है कि हापा-बिलासपुर-हापा एक्सप्रेस की रैक के बिलासपुर यार्ड में खड़े रहने के समय का सदुपयोग कर ट्रेन को कोरबा तक विस्तार दिया जा सकता है। इस तरह बिना कोई अतिरिक्त भार कोरबा के यात्रियों के लिए भी महाराष्ट्र होते हुए गुजरात की यात्रा सुगम व सरल करने की पहल की जा सकती है।
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर के मंडल रेल प्रबंधन आलोक सहाय को यह पत्र जिला चैंबर आफ
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कामर्स एंड इंडस्ट्रीज के उपाध्यक्ष एवं रेल मामलों के जानकार रामकिशन अग्रवाल ने लिखा है। उनका कहना है कि कोरबा स्टेशन शुरू से सुविधाओं को लेकर उपेक्षा का शिकार रहा है। इस विचार करते हुए कोरबा के लोगों के लिए थोड़ी की कवायद की जा सकती है। पत्र के माध्यम से मंडल रेल प्रबंधक से निवेदन किया गया है कि हापा-बिलासपुर एक्सप्रेस जो भोर में तीन बजे बिलासपुर आती है और सुबह 10.45 बजे बिलासपुर से हापा के लिए छूटती है, उसे कोरबा तक विस्तार दिया जाए। हापा-बिलासपुर-हापा एक्सप्रेस सप्ताह में एक दिन परिचालित होती है। अगर इसे कोरबा तक विस्तारित कर दिया जाए, तो मूलतः गुजरात प्रांत से ताल्लुक रखने वाले लोगों को और अपने काम-काज व सैर को जाने वाले कोरबा के लोगों के लिए उस रूट पर यात्रा का सरल और सुगम माध्यम से शहर में उपलब्ध हो सकेगा।
सेकेंडरी मेंटेनेंस नहीं, कोरबा-यशवंतपुर पैटर्न
अल सुबह तीन बजे हापा से बिलासपुर आने के बाद इस एक्सप्रेस की रैक यार्ड में खड़ी रह जाती है। अग्रवाल ने बताया कि बिलासपुर में ट्रेन का सेकेंडरी मेंटेनेंस भी नहीं होता है। इसके बाद सुबह 10.45 बजे ट्रेन बिलासपुर के लिए रवाना होती है। बिना काम के यहां खड़ी रहने वाली रैक का उपयोग कोरबा के यात्रियों के लिए किया जाए, तो इसमें कोई दिक्कत नहीं आनी चाहिए। इस बीच हापा-बिलासपुर की रैक कोरबा से चल रही सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन कोरबा-यशवंतपुर के पैटर्न में आएगी और कोरबा यशवंतपुर के पैटर्न में जाएगाी। इस तरह उस समय का सदुपयोग कोरबा के लिए सुविधा साबित होगी।
क्यों न यहां करें साढ़े तीन घंटे का उपयोग
प्रत्येक मंगलवार को चलने वाली हापा-बिलासपुर की रैक को साढे तीन घंटे कोरबा के लिए उपयोग किया जा सकता है। पत्र में इसके लिए समय निर्धारित का आंकलन भी प्रस्तुत किया गया है। इसमें बताया गया है कि अगर हापा से बिलासपुर आने के बाद ट्रेन को यार्ड की ले जाने की बजाय सवा तीन बजे कोरबा की ओर रवाना कर दें, तो लगभग साढ़े पांच बजे कोरबा पहुंच जाएगी। इसके बाद साढ़े आठ बजे यह कोरबा से छूटेगी और साढ़े दस बजे तक अपना फेरा पूरा कर पुनः बिलासपुर पहुंच जाएगी। इसके बाद वह हापा के लिए रवाना होने के अपने निर्धारित समय सुबह पौने 11 बजे में गंतव्य के लिए रवाना की जा सकती है।

Rail News
Jun 21 (06:40)
Rang De Basanti^   47254 blog posts
Re# 4991205-1            Tags   Past Edits
hapa - korba express:-)

2 Public Posts - Mon Jun 21, 2021
Rail News
7060 views
Commentary/Human Interest
Jun 14 (06:20)   शून्य कार्बन उत्सर्जन के साथ भारतीय रेल दुनिया में “सबसे बड़ी हरित रेल” बनने की राह पर

Rang De Basanti^   138836 news posts
Entry# 4985133   News Entry# 456048         Tags   Past Edits
शून्य कार्बन उत्सर्जन के साथ भारतीय रेल दुनिया में “सबसे बड़ी हरित रेल” बनने की राह पर रेलवे व्यापक विद्युतीकरण, जल और कागज संरक्षण से लेकर रेलवे की पटरियों पर जानवरों को घायल होने से बचाने सहित कई कदमों से पर्यावरण में सहायक बनना चाहती है39 कार्यशालाओं, 7 उत्पादन इकाइयों, 8 लोको शेड और एक स्टोर डिपो को मिला ‘ग्रीनको प्रमाणन’; इनमें 2 प्लेटिनम, 15 गोल्ड और 18 सिल्वर रेटिंग शामिल हैं19 रेलवे स्टेशनों को 3 प्लेटिनम, 6 गोल्ड और 6 सिल्वर रेटिंग सहित हरित प्रमाणन भी हासिल हुए27 रेलवे भवनों, कार्यालयों, परिसरों और अन्य प्रतिष्ठानों को भी 15 प्लेटिनम, 9 गोल्ड और 2...
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सिल्वर रेटिंग सहित हरित प्रमाणन प्राप्त हुए600 रेलवे स्टेशनों को बीते दो साल में पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली के कार्यान्वयन के लिए आईएसओ : 14001 से प्रमाणित किया गया
भारतीय रेल (आईआर) दुनिया में सबसे बड़ी हरित रेलवे बनने के लिए मिशन के रूप में काम कर रही है और वर्ष 2030 से पहले “शून्य कार्बन उत्सर्जक” बनने की दिशा में बढ़ रही है। रेलवे नए भारत की बढ़ती जरूरतों को पूरा करन के क्रम में पर्यावरण अनुकूल, दक्ष, किफायती, समयनिष्ठ और यात्रियों के साथ-साथ माल की आधुनिक वाहक बनने की राह पर चल रही है। भारतीय रेल व्यापक विद्युतीकरण, जल और कागज संरक्षण, रेलवे की पटरियों पर जानवरों को घायल होने से बचाने से जुड़े कदमों से पर्यावरण के प्रति मददगार हो रही है।
2014 के बाद से रेल विद्युतीकरण लगभग 10 गुना बढ़ गया है, जो पर्यावरण अनुकूल है और इससे प्रदूषण बढ़ता है। विद्युतीकरण के आर्थिक लाभों को तेजी से प्राप्त करने के लिए, रेलवे ने ब्रॉड गेज रूटों के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण के लिए दिसंबर, 2023 तक विद्युतीकृत संतुलित ब्रॉड गेज (बीजी) रूट तैयार करने की योजना बनाई है। हेड-ऑन-जनरेशन सिस्टम, जैव शौचालय और एलईडी लाइट ट्रेन को यात्रा के ऐसे बेहतर साधन में बदलते हैं, जो यात्रियों के लिए आरामदेह के साथ ही पर्यावरण के प्रति संवेदनशील भी हो।
आईआर के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर्स को दीर्घ कालिक कम कार्बन रोडमैप के साथ एक कम कार्बन हरित परिवहन नेटवर्क के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो उसे ज्यादा ऊर्जा दक्ष और कार्बन अनुकूल तकनीकों, प्रक्रियाओं व अभ्यासों को अपनाने में सक्षम बनाते हैं। आईआर दो समर्पित मालभाड़ा गलियारा परियोजनाओं– लुधियाना से दनकुनी (1,875 किमी) तक पूर्वी गलियारा (ईडीएफसी) और दादरी से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (1,506 किमी) तक पूर्वी गलियारा (डब्ल्यूडीएफसी) को कार्यान्वित कर रहा है। ईडीएफसी के सोननगर-दनकुनी (538 किमी) भाग को सार्वजनिक निजी साझेदारी (पी         पीपी) मोड में लागू करने की योजना बनाई गई है। 
आईआर का नेटवर्क और उसकी पहुंच ने महामारी में खाद्यान्न और ऑक्सीजन जैसे माल की आवाजाही को सक्षम बनाया, जो सड़क परिवहन की तुलना में ज्यादा पर्यावरण अनुकूल है। अप्रैल, 2021 से मई, 2021 के दौरान, भारतीय रेल ने 73 लाख टन खाद्यान्न की आपूर्ति कि और 241 लदी हुई ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में 15,046 टन ऑक्सीजन से भरे 922 टैंकरों को अपने गंतव्य तक पहुंचाया।
हरित प्रमाणन और पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली का कार्यान्वयन :
आईआर और भारतीय उद्योग परिसंघ के बीच आईआर पर हरित पहलों की सहूलियत के लिए जुलाई, 2016 में एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे। 39 कार्यशालाओं, 7 उत्पादन इकाइयों, 8 लोको शेड और एक स्टोर डिपो को ‘ग्रीनको’ प्रमाणन हासिल हो चुका है। इनमें 2 प्लेटिनम, 15 गोल्ड और 18 सिल्वर रेटिंग शामिल हैं।
हरित प्रमाणन में मुख्य रूप से ऊर्जा संरक्षण उपायों, नवीनीकृत ऊर्जा का उपयोग, ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में कमी, जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन, सामग्री संरक्षण, पुनर्चक्रीकरण आदि जैसे पर्यावरण को सीधा प्रभावित करने वाले मानकों के आकलन को शामिल किया जाता है। 19 रेलवे स्टेशनों ने भी 3 प्लेटिनम, 6 गोल्ड और 6 सिल्वर रेटिंग के साथ हरित प्रमाणन हासिल कर लिया है। रेलवे के 27 अन्य भवन, कार्यालय, परिसर और अन्य प्रतिष्ठानों को भी 15 प्लेटिनम, 9 गोल्ड और 2 सिल्वर रेटिंग सहित हरित प्रमाणन मिल चुका है। इसके अलावा, पिछले दो साल में 600 से ज्यादा रेलवे स्टेशनों को पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली के कार्यावयन के लिए आईएसओ: 14001 के कार्यान्वयन के लिए प्रमाणित किया जा चुका है। कुल 718 स्टेशनों की आईएसओ : 14001 के लिए पहचान की गई है।
भारतीय रेल ने अपने जोखिम आकलन और आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल में जलवायु परिवर्तन की विशेषताओं को शामिल किया है। एक संगठन के रूप में रेलवे जोखिम के प्रबंधन और अपनी संपदाओं, रूटों व निवेशों के बारे में सही सवाल पूछने के लिए तैयार है। आईआर की कई सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन साझा समझ के लिए हितधारकों के साथ संवाद कर रहे हैं, जो दीर्घकालिक स्वास्थ्य और संगठनों के स्थायित्व के लिए जरूरी है।
आईआर और अनुषंगी इकाइयों द्वारा प्रकाशित पर्यावरण स्थायित्व रिपोर्ट हर साल रणनीतियों का वर्णन करने वाले दस्तावेज तैयार करती है और इसमें जलवायु परिवर्तन, प्रमुख मुद्दे व उनसे निपटने के लिए उठाए गए कदमों पर जोर दिया जाता है। इससे रेलवे को जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौता, यूएन सतत विकास लक्ष्यों और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजनाओं जैसी सरकार की प्रतिबद्धताओं को समर्थन देने में सहायता मिलती है।

Rail News
6811 views
Jun 14 (06:20)
Rang De Basanti^   47254 blog posts
Re# 4985133-1            Tags   Past Edits
भारतीय रेल के विभिन्न क्षेत्रों में इंजीनियर, ऑपरेटर और प्लानर्स व निर्माण इकाइयों को लगातार अलग-अलग चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अंतर्राष्ट्रीय संपत्ति प्रबंधकों, रेलवे परिचालकों, रोलिंग स्टॉक इंजीनियरों, सिनेरियो प्लानर्स और अन्य द्वार अपनाए गए परिष्कृत दृष्टिकोणों की परामर्श रिपोर्टों के माध्यम से अध्ययन किया गया है। आईआर की अपनी वास्तविकताओं और जमीनी स्थिति से मेल खाने वाली उपयुक्त व्याख्या इन अनुमानित और सामने आ रही चुनौतियों के लिए विभागीय प्रबंधकों के प्रयासों को अनुकूलित करती है।

 
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पर्यावरण स्थिरता रिपोर्ट पर पुस्तिका का लिंक

 

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एमजी/एएम/एमपी /डीए



भारतीय रेल (आईआर) दुनिया में सबसे बड़ी हरित रेलवे बनने के लिए मिशन के रूप में काम कर रही है और वर्ष 2030 से पहले “शून्य कार्बन उत्सर्जक” बनने की दिशा में बढ़ रही है। रेलवे नए भारत की बढ़ती जरूरतों को पूरा करन के क्रम में पर्यावरण अनुकूल, दक्ष, किफायती, समयनिष्ठ और यात्रियों के साथ-साथ माल की आधुनिक वाहक बनने की राह पर चल रही है। भारतीय रेल व्यापक विद्युतीकरण, जल और कागज संरक्षण, रेलवे की पटरियों पर जानवरों को घायल होने से बचाने से जुड़े कदमों से पर्यावरण के प्रति मददगार हो रही है।

2014 के बाद से रेल विद्युतीकरण लगभग 10 गुना बढ़ गया है, जो पर्यावरण अनुकूल है और इससे प्रदूषण बढ़ता है। विद्युतीकरण के आर्थिक लाभों को तेजी से प्राप्त करने के लिए, रेलवे ने ब्रॉड गेज रूटों के 100 प्रतिशत विद्युतीकरण के लिए दिसंबर, 2023 तक विद्युतीकृत संतुलित ब्रॉड गेज (बीजी) रूट तैयार करने की योजना बनाई है। हेड-ऑन-जनरेशन सिस्टम, जैव शौचालय और एलईडी लाइट ट्रेन को यात्रा के ऐसे बेहतर साधन में बदलते हैं, जो यात्रियों के लिए आरामदेह के साथ ही पर्यावरण के प्रति संवेदनशील भी हो।

आईआर के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर्स को दीर्घ कालिक कम कार्बन रोडमैप के साथ एक कम कार्बन हरित परिवहन नेटवर्क के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो उसे ज्यादा ऊर्जा दक्ष और कार्बन अनुकूल तकनीकों, प्रक्रियाओं व अभ्यासों को अपनाने में सक्षम बनाते हैं। आईआर दो समर्पित मालभाड़ा गलियारा परियोजनाओं– लुधियाना से दनकुनी (1,875 किमी) तक पूर्वी गलियारा (ईडीएफसी) और दादरी से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (1,506 किमी) तक पूर्वी गलियारा (डब्ल्यूडीएफसी) को कार्यान्वित कर रहा है। ईडीएफसी के सोननगर-दनकुनी (538 किमी) भाग को सार्वजनिक निजी साझेदारी (पी         पीपी) मोड में लागू करने की योजना बनाई गई है। 

आईआर का नेटवर्क और उसकी पहुंच ने महामारी में खाद्यान्न और ऑक्सीजन जैसे माल की आवाजाही को सक्षम बनाया, जो सड़क परिवहन की तुलना में ज्यादा पर्यावरण अनुकूल है। अप्रैल, 2021 से मई, 2021 के दौरान, भारतीय रेल ने 73 लाख टन खाद्यान्न की आपूर्ति कि और 241 लदी हुई ऑक्सीजन एक्सप्रेस ट्रेनों के संचालन के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में 15,046 टन ऑक्सीजन से भरे 922 टैंकरों को अपने गंतव्य तक पहुंचाया।

हरित प्रमाणन और पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली का कार्यान्वयन :

आईआर और भारतीय उद्योग परिसंघ के बीच आईआर पर हरित पहलों की सहूलियत के लिए जुलाई, 2016 में एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे। 39 कार्यशालाओं, 7 उत्पादन इकाइयों, 8 लोको शेड और एक स्टोर डिपो को ‘ग्रीनको’ प्रमाणन हासिल हो चुका है। इनमें 2 प्लेटिनम, 15 गोल्ड और 18 सिल्वर रेटिंग शामिल हैं।

हरित प्रमाणन में मुख्य रूप से ऊर्जा संरक्षण उपायों, नवीनीकृत ऊर्जा का उपयोग, ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में कमी, जल संरक्षण, कचरा प्रबंधन, सामग्री संरक्षण, पुनर्चक्रीकरण आदि जैसे पर्यावरण को सीधा प्रभावित करने वाले मानकों के आकलन को शामिल किया जाता है। 19 रेलवे स्टेशनों ने भी 3 प्लेटिनम, 6 गोल्ड और 6 सिल्वर रेटिंग के साथ हरित प्रमाणन हासिल कर लिया है। रेलवे के 27 अन्य भवन, कार्यालय, परिसर और अन्य प्रतिष्ठानों को भी 15 प्लेटिनम, 9 गोल्ड और 2 सिल्वर रेटिंग सहित हरित प्रमाणन मिल चुका है। इसके अलावा, पिछले दो साल में 600 से ज्यादा रेलवे स्टेशनों को पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली के कार्यावयन के लिए आईएसओ: 14001 के कार्यान्वयन के लिए प्रमाणित किया जा चुका है। कुल 718 स्टेशनों की आईएसओ : 14001 के लिए पहचान की गई है।

भारतीय रेल ने अपने जोखिम आकलन और आपदा प्रबंधन प्रोटोकॉल में जलवायु परिवर्तन की विशेषताओं को शामिल किया है। एक संगठन के रूप में रेलवे जोखिम के प्रबंधन और अपनी संपदाओं, रूटों व निवेशों के बारे में सही सवाल पूछने के लिए तैयार है। आईआर की कई सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन साझा समझ के लिए हितधारकों के साथ संवाद कर रहे हैं, जो दीर्घकालिक स्वास्थ्य और संगठनों के स्थायित्व के लिए जरूरी है।

आईआर और अनुषंगी इकाइयों द्वारा प्रकाशित पर्यावरण स्थायित्व रिपोर्ट हर साल रणनीतियों का वर्णन करने वाले दस्तावेज तैयार करती है और इसमें जलवायु परिवर्तन, प्रमुख मुद्दे व उनसे निपटने के लिए उठाए गए कदमों पर जोर दिया जाता है। इससे रेलवे को जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौता, यूएन सतत विकास लक्ष्यों और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजनाओं जैसी सरकार की प्रतिबद्धताओं को समर्थन देने में सहायता मिलती है।

भारतीय रेल के विभिन्न क्षेत्रों में इंजीनियर, ऑपरेटर और प्लानर्स व निर्माण इकाइयों को लगातार अलग-अलग चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अंतर्राष्ट्रीय संपत्ति प्रबंधकों, रेलवे परिचालकों, रोलिंग स्टॉक इंजीनियरों, सिनेरियो प्लानर्स और अन्य द्वार अपनाए गए परिष्कृत दृष्टिकोणों की परामर्श रिपोर्टों के माध्यम से अध्ययन किया गया है। आईआर की अपनी वास्तविकताओं और जमीनी स्थिति से मेल खाने वाली उपयुक्त व्याख्या इन अनुमानित और सामने आ रही चुनौतियों के लिए विभागीय प्रबंधकों के प्रयासों को अनुकूलित करती है।

 

पर्यावरण स्थिरता रिपोर्ट पर पुस्तिका का लिंक

 

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एमजी/एएम/एमपी /डीए
Rail News
4781 views
Commentary/Human Interest
Jun 14 (06:14)   केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय रेल को 700 मेगाहर्ट्ज बैंड में 5 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के आवंटन को मंजूरी दी

Rang De Basanti^   138836 news posts
Entry# 4985124   News Entry# 456039         Tags   Past Edits
केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय रेल को 700 मेगाहर्ट्ज बैंड में 5 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के आवंटन को मंजूरी दी इससे रेलगाड़ियों के परिचालन के क्रम में सुरक्षा बेहतर होगी​​​​​​​रेलवे के परिचालन एवं सुरक्षा में रणनीतिक बदलाव आएगालोको पायलटों और गार्डों के साथ निर्बाध संचार सुनिश्चित होगा जिससे सुरक्षा बेहतर होगीपरिचालन, बचाव एवं सुरक्षा से जुड़े ऐप्लिकेशन के लिए सुरक्षित वॉइस, वीडियो एवं डेटा संचार सेवाएं उपलब्‍ध होंगीपरियोजना में अनुमानित निवेश 25,000 करोड़ रुपये से अधिक हैयह परियोजना अगले पांच साल में पूरी होगीइसके अलावा, भारतीय रेल ने स्वदेशी रूप से विकसित ट्रेन कोलिजन अवॉइडेंस सिस्टम को मंजूरी दी है जो रेलगाड़ी को टक्कर से बचने...
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में मदद करेगा और इससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी

 

‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन को बढ़ावा देत हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय रेल (आईआर) को स्टेशन परिसर एवं रेलगाड़ियों में सार्वजनिक बचाव व सुरक्षा सेवाओं के लिए 700 मेगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी बैंड में 5 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के आवंटन संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

इस स्पेक्ट्रम के साथ ही भारतीय रेल ने अपने मार्ग पर एलटीई (लॉन्ग टर्म इवोल्यूशन) आधारित मोबाइल ट्रेन रेडियो संचार प्रदान करने की परिकल्पना की है। परियोजना में अनुमानित निवेश 25,000 करोड़ रुपये से अधिक है।  यह परियोजना अगले पांच साल में पूरी होगी।

इसके अलावा, भारतीय रेल ने स्वदेशी रूप से विकसित ट्रेन कोलिजन अवॉइडेंस सिस्टम को मंजूरी दी है जो रेलगाड़ी को टक्कर से बचने में मदद करेगा और इससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

इससे रेलवे के परिचालन एवं रख-रखाव व्यवस्था में रणनीतिक बदलाव आएगा। यह मौजूदा बुनियादी ढांचे का उपयोग करके अधिक ट्रेनों को समायोजित करने के लिए लाइन क्षमता और सुरक्षा को बेहतर करने में मदद करेगा। आधुनिक रेल नेटवर्क तैयार होने से परिवहन लागत में कमी आएगी और प्रवाह क्षमता में सुधार होगा। साथ ही यह बहुराष्ट्रीय उद्योगों को अपनी विनिर्माण इकाइयां स्‍थापित करने के लिए भी आकर्षित करेगा जिससे 'मेक इन इंडिया' मिशन को पूरा करने और रोजगार सृजन में मदद मिलेगी।

 भारतीय रेल के लिए एलटीई का उद्देश्य परिचालन, बचाव एवं सुरक्षा से जुड़े ऐप्लिकेशन के लिए सुरक्षित एवं भरोसेमंद वॉइस, वीडियो और डेटा संचार सेवाएं प्रदान करना है। इसका उपयोग आधुनिक सिग्नलिंग और ट्रेन सुरक्षा प्रणालियों के लिए किया जाएगा तथा लोको पायलटों व गार्डों के बीच निर्बाध संचार सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा। यह इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आधारित रिमोट ऐसेट मॉनिटरिंग विशेष रूप से कोच, वैगन व लोको की निगरानी और ट्रेन के डिब्बों में सीसीटीवी कैमरों की लाइव वीडियो फीड, ट्रेन के सुरक्षित एवं तेज संचालन को सुनिश्चित करने में सक्षम करेगा।

इसके लिए ट्राई की सिफारिश के अनुसार निजी उपयोग पर रॉयल्‍टी शुल्‍क एवं लाइसेंस शुल्‍क के लिए दूरसंचार विभाग द्वारा निर्धारित फॉर्मूले के आधार पर स्पेक्ट्रम शुल्क लगाया जा सकता है।

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डीएस/एमजी/एएम/एसकेसी/एसके



 

‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन को बढ़ावा देत हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय रेल (आईआर) को स्टेशन परिसर एवं रेलगाड़ियों में सार्वजनिक बचाव व सुरक्षा सेवाओं के लिए 700 मेगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी बैंड में 5 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम के आवंटन संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

इस स्पेक्ट्रम के साथ ही भारतीय रेल ने अपने मार्ग पर एलटीई (लॉन्ग टर्म इवोल्यूशन) आधारित मोबाइल ट्रेन रेडियो संचार प्रदान करने की परिकल्पना की है। परियोजना में अनुमानित निवेश 25,000 करोड़ रुपये से अधिक है।  यह परियोजना अगले पांच साल में पूरी होगी।

इसके अलावा, भारतीय रेल ने स्वदेशी रूप से विकसित ट्रेन कोलिजन अवॉइडेंस सिस्टम को मंजूरी दी है जो रेलगाड़ी को टक्कर से बचने में मदद करेगा और इससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

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4915 views
Jun 14 (06:14)
Rang De Basanti^   47254 blog posts
Re# 4985124-1            Tags   Past Edits
इससे रेलवे के परिचालन एवं रख-रखाव व्यवस्था में रणनीतिक बदलाव आएगा। यह मौजूदा बुनियादी ढांचे का उपयोग करके अधिक ट्रेनों को समायोजित करने के लिए लाइन क्षमता और सुरक्षा को बेहतर करने में मदद करेगा। आधुनिक रेल नेटवर्क तैयार होने से परिवहन लागत में कमी आएगी और प्रवाह क्षमता में सुधार होगा। साथ ही यह बहुराष्ट्रीय उद्योगों को अपनी विनिर्माण इकाइयां स्‍थापित करने के लिए भी आकर्षित करेगा जिससे 'मेक इन इंडिया' मिशन को पूरा करने और रोजगार सृजन में मदद मिलेगी।

 भारतीय रेल के लिए एलटीई का उद्देश्य परिचालन, बचाव एवं
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सुरक्षा से जुड़े ऐप्लिकेशन के लिए सुरक्षित एवं भरोसेमंद वॉइस, वीडियो और डेटा संचार सेवाएं प्रदान करना है। इसका उपयोग आधुनिक सिग्नलिंग और ट्रेन सुरक्षा प्रणालियों के लिए किया जाएगा तथा लोको पायलटों व गार्डों के बीच निर्बाध संचार सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा। यह इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आधारित रिमोट ऐसेट मॉनिटरिंग विशेष रूप से कोच, वैगन व लोको की निगरानी और ट्रेन के डिब्बों में सीसीटीवी कैमरों की लाइव वीडियो फीड, ट्रेन के सुरक्षित एवं तेज संचालन को सुनिश्चित करने में सक्षम करेगा।

इसके लिए ट्राई की सिफारिश के अनुसार निजी उपयोग पर रॉयल्‍टी शुल्‍क एवं लाइसेंस शुल्‍क के लिए दूरसंचार विभाग द्वारा निर्धारित फॉर्मूले के आधार पर स्पेक्ट्रम शुल्क लगाया जा सकता है।

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डीएस/एमजी/एएम/एसकेसी/एसके
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4641 views
Commentary/Human Interest
Jun 14 (06:11)   దేశ సేవలో భాగమై 30 వేల మెట్రిక్ టన్నుల ఆక్సిజెన్ సరఫరా చేసిన ఆక్సిజెన్ ఎక్స్ ప్రెస్ లు

Rang De Basanti^   138836 news posts
Entry# 4985120   News Entry# 456035         Tags   Past Edits
దేశ సేవలో భాగమై 30 వేల మెట్రిక్ టన్నుల ఆక్సిజెన్ సరఫరా చేసిన ఆక్సిజెన్ ఎక్స్ ప్రెస్ లు దక్షిణాది రాష్ట్రాలకు 15 వేల టన్నులకు పైగా ఆక్సిజెన్ సరఫరాదేశవ్యాప్తంగా నడిచిన 421 ఆక్సిజెన్ ఎక్స్ ప్రెస్ లు15 రాష్ట్రాలకు ఊరటనిస్తూ 1734 టాంకర్ల రవాణాఆంధ్రప్రదేశ్ కు 3664 టన్నుల ఆక్సిజెన్ అందజేత

అన్ని
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రకాల అవరోధాలనూ అధిగమిస్తూ, కొత్త ఉపాయాలు కనుక్కుంటూ భారత రైల్వేలు ఈ కరోనా సమయంలో దేశవ్యాప్తంగా అనేక రాష్టాలకు ద్రవరూప మెడికల్ ఆక్సిజెన్ ను సరఫరా  చేయగలిగింది. రైల్వేశాఖ వారి ఆక్సిజెన్ ఎక్స్ ప్రెస్ లు 30,000 మెట్రిక్ టన్నుల మైలురాయిని అధిగమించి దేశసేవలో తమ పాత్రను మరోమారు చాటుకున్నాయి.  ఇప్పటిదాకా భారతీయ రైల్వేలు దేశం నలుమూలలా ఉన్న అనేక రాష్ట్రాలకు 30182 మెట్రిక్ టన్నుల ఆక్సిజెన్  ను 1734 టాంకర్ల ద్వారా అందజేశాయి.

వివిధ రాష్ట్రాలకు ఊరట కలిగిస్తూ మొత్తం 421 ఆక్సిజెన్ ఎక్స్ ప్రెస్ లు తమ ప్రయాణాన్ని పూర్తిచేసుకున్నాయి. అందులో కేవలం దక్షిణాది రాష్ట్రాలకు అందజేసిన ఆక్సిజెన్ మాత్రమే 15,000 మెట్రిక్ టన్నులుంది.  ఆంధ్రప్రదేశ్ కు 3600 టన్నులు, కర్నాటకకు 3700 టన్నులు, తమిళనాడుకు 4900 టన్నులు సరఫరా చేసింది. ఈ వార్త వెలువరించే సమయం లోనూ లోడ్ చేసుకున్న రెండు రైళ్ళు 10 టాంకర్లలో 177 మెట్రిక్ టన్నుల ఆక్సిజెన్ ను మోసుకుంటూ మార్గమధ్యంలో ఉన్నాయి.

ఆక్సిజెన్ ఎక్స్ ప్రెస్ లు సరిగ్గా 50 రోజుల కిందట ఏప్రిల్ 24న మహారాష్ట్రలో 126 మెట్రిక్ టన్నుల ఆక్సిజెన్  తో తమ యాత్ర  ప్రారంభించిన విషయాన్ని ఈ సందర్భంగా గుర్తు చేసుకోవాల్సి ఉంది. ఆక్సిజెన్ అడిగిన రాష్ట్రాలకు అతితక్కువ సమయంలోఅందజేయటం భారతీయ రైల్వేల ఘనత అనే చెప్పాలి. మొత్తంగా ఈ రైళ్ళు 15 రాష్ట్రాలకు ఆక్సిజెన్ అందజేశాయి.  అవి: ఉత్తరాఖండ్, కర్నాటక, మహారాష్ట్ర, మధ్యప్రదేశ్, ఆంధ్రప్రదేశ్, రాజస్థాన్, తమిళనాడు, హర్యానా, తెలంగాణ, పంజాబ్, కేరళ, ఢిల్లీ, ఉత్తరప్రదేశ్, జార్ఖండ్, అస్సాం. 

 

ఈ పత్రికా ప్రకటన వెలువడే సమయం వరకు మహారాష్ట్రలో 614 మెట్రిక టన్నుల ఆక్సిజెన్ దించారు. ఉత్తరప్రదేశ్ లో 3797 టన్నులు, మధ్యప్రదేశ్ లో  656 టన్నులు, ఢిల్లీలో  5722 టన్నులు, హర్యానాలో  2354 టన్నులు, రాజస్థాన్ లో  98 టన్నులు, కర్నాటకలో 3782 టన్నులు,  ఉత్తరాఖండ్ లో  320 టన్నులు, తమిళనాడులో  4941 టన్నులు,  ఆంధ్రప్రదేశ్ లో  3664 టన్నులు,  పంజాబ్ లో  225 టన్నులు, కేరళలో 513 టన్నులు, తెలంగాణలో 2972 టన్నులు,  జార్ఖండ్ లో  38 టన్నులు, అస్సాంలో 480 టన్నులు దించటం పూర్తయింది. 

ఆక్సిజెన్ ఎక్స్ ప్రెస్ లు ఇప్పటివరకూ దేశవ్యాప్తంగా 15 రాష్ట్రా లలోని 39 నగరాలు, పట్టణాలలో ఆక్సిజెన్ ను దించాయి. అవి: ఉత్తరప్రదేశ్ లోని లక్నో, వారణాసి, కాన్పూర్, బరేలీ, గోరఖ్ పూర్, ఆగ్రా  మధ్యప్రదేశ్ లోని సాగర్, జబల్పూర్, కట్నీ, భోపాల్, మహారాష్టలోని  నాగపూర్, నాసిక్, పూణె, ముంబయ్, సోలాపూర్, తెలంగాణలో హైదరాబాద్, హర్యానాలోని ఫరీదాబాద్, గురుగావ్, ఢిల్లీలోని తుగ్లకాబాద్, ఢిల్లీ కంటోన్మెంట్, ఓఖ్లా,రాజస్థాన్ లోనిఒ కోట, కనక్ పరా, కర్నాటకలోని బెంగళూరు,  ఉత్తరాఖండ్ లో డెహ్రాడూన్, ఆంధ్రప్రదేశ్ లో నెల్లూరు, గుంటూరు తాడిపత్రి, విశాఖపట్నం,  కేరళలో ఎర్నాకుళం, తమిళనాడులో తిరువళ్ళూరు, చెన్నై, తూత్తుకుడి, కోయంబత్తూరు, మదురై, పంజాబ్ లోని భటిండా, ఫిల్లౌర్, అస్సాంలోని  కామరూప్, జార్ఖండ్ లోని రాంచీ

భారతీయ రైల్వేలు అన్ని మార్గాలలో ఆక్సిజెన్ అందించటానికి వీలుగా సన్నాహాలు చేసుకోగలిగింది., అందువలన ఎలాంటి అత్యవసర పరిస్థితి తలెత్తినా అందుకు అనుగుణంగా అతి తక్కువ సమయంలో చేరుకోగల ప్రణాళికతో సిద్ధంగా ఉంది. ఆక్సిజెన్ తీసుకురావటానికి అవసరమైన టాంకర్లను ఆయా రాష్ట్రాలు సమకూర్చుతాయి.  పశ్చిమాన హాపా, బరోడా, ముంద్రా మొదలుకొని తూర్పున  రూర్కెలా, దుర్గాపూర్, టాటా నగర్, అంగుల్ నుంచి ఆక్సిజెన్ ను తీసుకొని ఉత్తరాఖండ్, కర్నాటక, మహారాష్ట్ర, మధ్యప్రదేశ్, ఆంధ్రప్రదేశ్, రాజస్థాన్, తమిళనాడు, హర్యానా, తెలంగాణ, పంజాబ్, కేరళ, ఢిల్లీ, ఉత్తరప్రదేశ్, అస్సాం రాష్ట్రాలకు అందజేయగలిగింది. అలా ఎక్కడినుంచి ఎక్కడికైనా మోసుకెళుతూ సంక్లిష్టమైన కార్యక్రమాన్ని సైతం నిర్దిష్టంగా, నిర్దుష్టంగా ప్రణాళికాబద్ధంగా పూర్తి చేయగలిగింది.

సాధ్యమైనంత వేగంగా తక్కువ సమయంలో చేరేలా చూడటానికి రైల్వే శాఖ సరకు రవాణాలో సరికొత్త ప్రమాణాలు సృష్టించుకొని అందుకు అనుగుణంగా  ఆక్సిజె న్ ఎక్స్ ప్రెస్ రైళ్ళు నడిపింది.  ఎక్కువ దూరం నడిచే మూడు కీలకమైన మార్గాలలోని రైళ్ల సగటు వేగం గంటకు 55 కిలోమీటర్లకు పైనే ఉంది. అత్యంత ప్రాధాన్యమిస్తూ గ్రీన్ కారిడార్ లో దారి ఇస్తూ అత్యవసర పరిస్థితికి అనుగుణంగా వ్యవహరించటంలోనూ, వివిధ జోన్ల మధ్య సమన్వయం సాధించటం వల్లనే ఇది సాధ్యమైంది. దీన్నొక సవాలుగా తీసుకొని రేయింబవళ్ళు అప్రమత్తంగా ఉండటం వల్లనే సకాలంలో ఆక్సిజెన్ అందించిన తృప్తి రైల్వేలకు దక్కింది. వివిధ సెక్షన్లలో సిబ్బంది మారటం లాంటి సాంకేతిక అనివార్యతలకు కేవలం ఒక నిమిషం మాత్రమే ఆపటం ఈ ఎక్స్ ప్రెస్ రైళ్లకిచ్చిన ప్రాధాన్యానికి అద్దం పట్టింది.  

ఆక్సిజెన్ రైళ్ళ రాకపోకలకు అంతరాయం గాని ఆలస్యంగాని జరగకుండా చూసేందుకు అన్ని ట్రాక్ లూ తెరచి ఉంది నిర్వహణ కార్యకలాపాలలో పూర్తి అప్రమత్తంగా ఉండటం గమనించవచ్చు. అదే సమయంలో ఇతర సరకు రవాణా వేగం ఏ మాత్రమూ తగ్గకుండా చూడగలగటం కూడా విశేషం. ఆక్సిజెన్ రైళ్ళు నడపటం ఒక కొత్త అనుభవమే అయినా ఎప్పటికప్పుడు  అందుకు అవసరమైన అన్ని చర్యలూ తీసుకుంటూ రైల్వే శాఖ ముందుకు సాగింది. ఈ రాత్రి కూడా పొద్దుపోయాక మరిన్ని ఆక్సిజెన్ రైళ్ళు ప్రయాణానికి సిద్ధమవుతున్నాయి.

 

***



అన్ని రకాల అవరోధాలనూ అధిగమిస్తూ, కొత్త ఉపాయాలు కనుక్కుంటూ భారత రైల్వేలు ఈ కరోనా సమయంలో దేశవ్యాప్తంగా అనేక రాష్టాలకు ద్రవరూప మెడికల్ ఆక్సిజెన్ ను సరఫరా  చేయగలిగింది. రైల్వేశాఖ వారి ఆక్సిజెన్ ఎక్స్ ప్రెస్ లు 30,000 మెట్రిక్ టన్నుల మైలురాయిని అధిగమించి దేశసేవలో తమ పాత్రను మరోమారు చాటుకున్నాయి.  ఇప్పటిదాకా భారతీయ రైల్వేలు దేశం నలుమూలలా ఉన్న అనేక రాష్ట్రాలకు 30182 మెట్రిక్ టన్నుల ఆక్సిజెన్  ను 1734 టాంకర్ల ద్వారా అందజేశాయి.

వివిధ రాష్ట్రాలకు ఊరట కలిగిస్తూ మొత్తం 421 ఆక్సిజెన్ ఎక్స్ ప్రెస్ లు తమ ప్రయాణాన్ని పూర్తిచేసుకున్నాయి. అందులో కేవలం దక్షిణాది రాష్ట్రాలకు అందజేసిన ఆక్సిజెన్ మాత్రమే 15,000 మెట్రిక్ టన్నులుంది.  ఆంధ్రప్రదేశ్ కు 3600 టన్నులు, కర్నాటకకు 3700 టన్నులు, తమిళనాడుకు 4900 టన్నులు సరఫరా చేసింది. ఈ వార్త వెలువరించే సమయం లోనూ లోడ్ చేసుకున్న రెండు రైళ్ళు 10 టాంకర్లలో 177 మెట్రిక్ టన్నుల ఆక్సిజెన్ ను మోసుకుంటూ మార్గమధ్యంలో ఉన్నాయి.

ఆక్సిజెన్ ఎక్స్ ప్రెస్ లు సరిగ్గా 50 రోజుల కిందట ఏప్రిల్ 24న మహారాష్ట్రలో 126 మెట్రిక్ టన్నుల ఆక్సిజెన్  తో తమ యాత్ర  ప్రారంభించిన విషయాన్ని ఈ సందర్భంగా గుర్తు చేసుకోవాల్సి ఉంది. ఆక్సిజెన్ అడిగిన రాష్ట్రాలకు అతితక్కువ సమయంలోఅందజేయటం భారతీయ రైల్వేల ఘనత అనే చెప్పాలి. మొత్తంగా ఈ రైళ్ళు 15 రాష్ట్రాలకు ఆక్సిజెన్ అందజేశాయి.  అవి: ఉత్తరాఖండ్, కర్నాటక, మహారాష్ట్ర, మధ్యప్రదేశ్, ఆంధ్రప్రదేశ్, రాజస్థాన్, తమిళనాడు, హర్యానా, తెలంగాణ, పంజాబ్, కేరళ, ఢిల్లీ, ఉత్తరప్రదేశ్, జార్ఖండ్, అస్సాం. 

 

ఈ పత్రికా ప్రకటన వెలువడే సమయం వరకు మహారాష్ట్రలో 614 మెట్రిక టన్నుల ఆక్సిజెన్ దించారు. ఉత్తరప్రదేశ్ లో 3797 టన్నులు, మధ్యప్రదేశ్ లో  656 టన్నులు, ఢిల్లీలో  5722 టన్నులు, హర్యానాలో  2354 టన్నులు, రాజస్థాన్ లో  98 టన్నులు, కర్నాటకలో 3782 టన్నులు,  ఉత్తరాఖండ్ లో  320 టన్నులు, తమిళనాడులో  4941 టన్నులు,  ఆంధ్రప్రదేశ్ లో  3664 టన్నులు,  పంజాబ్ లో  225 టన్నులు, కేరళలో 513 టన్నులు, తెలంగాణలో 2972 టన్నులు,  జార్ఖండ్ లో  38 టన్నులు, అస్సాంలో 480 టన్నులు దించటం పూర్తయింది.

Rail News
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Jun 14 (06:11)
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Re# 4985120-1            Tags   Past Edits
ఆక్సిజెన్ ఎక్స్ ప్రెస్ లు ఇప్పటివరకూ దేశవ్యాప్తంగా 15 రాష్ట్రా లలోని 39 నగరాలు, పట్టణాలలో ఆక్సిజెన్ ను దించాయి. అవి: ఉత్తరప్రదేశ్ లోని లక్నో, వారణాసి, కాన్పూర్, బరేలీ, గోరఖ్ పూర్, ఆగ్రా  మధ్యప్రదేశ్ లోని సాగర్, జబల్పూర్, కట్నీ, భోపాల్, మహారాష్టలోని  నాగపూర్, నాసిక్, పూణె, ముంబయ్, సోలాపూర్, తెలంగాణలో హైదరాబాద్, హర్యానాలోని ఫరీదాబాద్, గురుగావ్, ఢిల్లీలోని తుగ్లకాబాద్, ఢిల్లీ కంటోన్మెంట్, ఓఖ్లా,రాజస్థాన్ లోనిఒ కోట, కనక్ పరా, కర్నాటకలోని బెంగళూరు,  ఉత్తరాఖండ్ లో డెహ్రాడూన్, ఆంధ్రప్రదేశ్ లో నెల్లూరు, గుంటూరు తాడిపత్రి, విశాఖపట్నం,  కేరళలో ఎర్నాకుళం, తమిళనాడులో తిరువళ్ళూరు, చెన్నై, తూత్తుకుడి, కోయంబత్తూరు, మదురై, పంజాబ్ లోని భటిండా, ఫిల్లౌర్, అస్సాంలోని  కామరూప్, జార్ఖండ్ లోని రాంచీ

భారతీయ రైల్వేలు అన్ని మార్గాలలో ఆక్సిజెన్ అందించటానికి వీలుగా సన్నాహాలు చేసుకోగలిగింది., అందువలన ఎలాంటి అత్యవసర పరిస్థితి
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తలెత్తినా అందుకు అనుగుణంగా అతి తక్కువ సమయంలో చేరుకోగల ప్రణాళికతో సిద్ధంగా ఉంది. ఆక్సిజెన్ తీసుకురావటానికి అవసరమైన టాంకర్లను ఆయా రాష్ట్రాలు సమకూర్చుతాయి.  పశ్చిమాన హాపా, బరోడా, ముంద్రా మొదలుకొని తూర్పున  రూర్కెలా, దుర్గాపూర్, టాటా నగర్, అంగుల్ నుంచి ఆక్సిజెన్ ను తీసుకొని ఉత్తరాఖండ్, కర్నాటక, మహారాష్ట్ర, మధ్యప్రదేశ్, ఆంధ్రప్రదేశ్, రాజస్థాన్, తమిళనాడు, హర్యానా, తెలంగాణ, పంజాబ్, కేరళ, ఢిల్లీ, ఉత్తరప్రదేశ్, అస్సాం రాష్ట్రాలకు అందజేయగలిగింది. అలా ఎక్కడినుంచి ఎక్కడికైనా మోసుకెళుతూ సంక్లిష్టమైన కార్యక్రమాన్ని సైతం నిర్దిష్టంగా, నిర్దుష్టంగా ప్రణాళికాబద్ధంగా పూర్తి చేయగలిగింది.

సాధ్యమైనంత వేగంగా తక్కువ సమయంలో చేరేలా చూడటానికి రైల్వే శాఖ సరకు రవాణాలో సరికొత్త ప్రమాణాలు సృష్టించుకొని అందుకు అనుగుణంగా  ఆక్సిజె న్ ఎక్స్ ప్రెస్ రైళ్ళు నడిపింది.  ఎక్కువ దూరం నడిచే మూడు కీలకమైన మార్గాలలోని రైళ్ల సగటు వేగం గంటకు 55 కిలోమీటర్లకు పైనే ఉంది. అత్యంత ప్రాధాన్యమిస్తూ గ్రీన్ కారిడార్ లో దారి ఇస్తూ అత్యవసర పరిస్థితికి అనుగుణంగా వ్యవహరించటంలోనూ, వివిధ జోన్ల మధ్య సమన్వయం సాధించటం వల్లనే ఇది సాధ్యమైంది. దీన్నొక సవాలుగా తీసుకొని రేయింబవళ్ళు అప్రమత్తంగా ఉండటం వల్లనే సకాలంలో ఆక్సిజెన్ అందించిన తృప్తి రైల్వేలకు దక్కింది. వివిధ సెక్షన్లలో సిబ్బంది మారటం లాంటి సాంకేతిక అనివార్యతలకు కేవలం ఒక నిమిషం మాత్రమే ఆపటం ఈ ఎక్స్ ప్రెస్ రైళ్లకిచ్చిన ప్రాధాన్యానికి అద్దం పట్టింది.  

ఆక్సిజెన్ రైళ్ళ రాకపోకలకు అంతరాయం గాని ఆలస్యంగాని జరగకుండా చూసేందుకు అన్ని ట్రాక్ లూ తెరచి ఉంది నిర్వహణ కార్యకలాపాలలో పూర్తి అప్రమత్తంగా ఉండటం గమనించవచ్చు. అదే సమయంలో ఇతర సరకు రవాణా వేగం ఏ మాత్రమూ తగ్గకుండా చూడగలగటం కూడా విశేషం. ఆక్సిజెన్ రైళ్ళు నడపటం ఒక కొత్త అనుభవమే అయినా ఎప్పటికప్పుడు  అందుకు అవసరమైన అన్ని చర్యలూ తీసుకుంటూ రైల్వే శాఖ ముందుకు సాగింది. ఈ రాత్రి కూడా పొద్దుపోయాక మరిన్ని ఆక్సిజెన్ రైళ్ళు ప్రయాణానికి సిద్ధమవుతున్నాయి.

 

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Rail News
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Commentary/Human Interest
Jun 14 (06:08)   ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने देश की सेवा में 30000 मीट्रिक टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन आपूर्ति का कीर्तिमान बनाया

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Entry# 4985118   News Entry# 456033         Tags   Past Edits
ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने देश की सेवा में 30000 मीट्रिक टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन आपूर्ति का कीर्तिमान बनाया    ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने देश के दक्षिणी राज्यों को 15000 एमटी से अधिक एलएमओ की डिलीवरी की   421 ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने पूरे देश में ऑक्सीजन की आपूर्ति पूरी की  ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने 1734 टैंकरों से 15 राज्यों को ऑक्सीजन सहायता पहुंचाईऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु को क्रमशः 3600, 3700 और 4900 एमटी से अधिक एलएमओ की आपूर्ति की गई  महाराष्ट्र में 614 एमटी ऑक्सीजन, उत्तर प्रदेश में लगभग 3797 एमटी, मध्य प्रदेश में 656 एमटी, दिल्ली में 5722 एमटी, हरियाणा में 2354 एमटी, राजस्थान...
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में 98 एमटी, कर्नाटक में 3782 एमटी, उत्तराखंड में 320 एमटी, तमिलनाडु में 4941 एमटी, आंध्र प्रदेश में 3664 एमटी, पंजाब में 225 एमटी, केरल में 513 एमटी  तेलंगाना में 2972 एमटी, झारखंड में 38 एमटी और असम में 480 एमटी ऑक्सीजन पहुंचाई गई

भारतीय रेल सभी बाधाओं को पार करते हुए तथा नए समाधान निकाल कर देश के विभिन्न राज्यों में तरल मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) पहुंचाना जारी रखे हुए है।

ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने देश की सेवा में 30000 मीट्रिक टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन पहुंचा कर मील का पत्थर पार किया है।

अभी तक देश के विभिन्न राज्यों में 1734 से अधिक टैंकरों में 30182 मीट्रिक टन से अधिक तरल मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) पहुंचाई गई है।

ज्ञात हो कि 421 ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ियों ने अपनी यात्रा पूरी कर विभिन्न राज्यों को सहायता पहुंचाई है।

ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने देश के दक्षिणी राज्यों में 15000 एमटी से ज्यादा तरल मेडिकल ऑक्सीजन की डिलीवरी की है। 

ऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा देश के दक्षिणी राज्यों आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु को क्रमशः 3600, 3700 और 4900 एमटी से अधिक एलएमओ पहुंचाई गई है।

इस विज्ञप्ति के जारी होने तक 2 ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ियां 10 टैंकरों में 177 एमटी से अधिक एलएमओ लेकर चल रही हैं। 

ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने 50 दिन पहले 24 अप्रैल को महाराष्ट्र में 126 एमटी तरल मेडिकल ऑक्सीजन की डिलीवरी करने के साथ अपना काम प्रारंभ किया था।  

भारतीय रेलवे का यह प्रयास रहा है कि ऑक्सीजन का अनुरोध करने वाले राज्यों को कम से कम संभव समय में अधिक से अधिक संभव ऑक्सीजन पहुंचाई जा सके।

ऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा 15 राज्यों- उत्तराखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, हरियाणा, तेलंगाना, पंजाब, केरल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड और असम को ऑक्सीजन सहायता पहुंचाई गई है।

इस विज्ञप्ति के जारी होने तक महाराष्ट्र में 614 एमटी ऑक्सीजन, उत्तर प्रदेश में लगभग 3797, मध्य प्रदेश में 656 एमटी, दिल्ली में 5722 एमटी,  हरियाणा में 2354 एमटी, राजस्थान में 98 एमटी, कर्नाटक में 3782 एमटी, उत्तराखंड में 320 एमटी, तमिलनाडु में 4941 एमटी, आंध्र प्रदेश में 3664 एमटी, पंजाब में 225 एमटी, केरल में 513 एमटी, तेलंगाना में 2972 एमटी, झारखंड में 38 एमटी और असम में 480 एमटी ऑक्सीजन पहुंचाई गई है।

अब तक ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने देश भर के 15 राज्यों में लगभग 39 नगरों /शहरों में एलएमओ पहुंचाई है। इन शहरों में उत्तर प्रदेश में लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, बरेली, गोरखपुर और आगरा, मध्य प्रदेश में सागर, जबलपुर, कटनी और भोपाल, महाराष्ट्र में नागपुर, नासिक, पुणे, मुंबई और सोलापुर, तेलंगाना में हैदराबाद, हरियाणा में फरीदाबाद और गुरुग्राम, दिल्ली में तुगलकाबाद, दिल्ली कैंट और ओखला, राजस्थान में कोटा और कनकपारा, कर्नाटक में बेंगलुरु, उत्तराखंड में देहरादून, आंध्र प्रदेश में नेल्लोर, गुंटूर, तड़ीपत्री और विशाखापत्तनम, केरल में एर्नाकुलम, तमिलनाडु में तिरुवल्लूर, चेन्नई, तूतीकोरिन, कोयंबटूर और मदुरै, पंजाब में भटिंडा और फिल्लौर, असम में कामरूप और झारखंड में रांची शामिल हैं।

रेलवे ने ऑक्सीजन सप्लाई स्थानों के साथ विभिन्न मार्गों की मैपिंग की है और राज्यों की बढ़ती हुई आवश्यकता के अनुसार अपने को तैयार ऱखा है। भारतीय रेल को एलएमओ लाने के लिए टैंकर राज्य प्रदान करते हैं।

पूरे देश से जटिल परिचालन मार्ग नियोजन परिदृश्य में भारतीय रेल ने पश्चिम में हापा, बड़ौदा मुंदड़ा, पूर्व में राउरकेला, दुर्गापुर, टाटा नगर, अंगुल से ऑक्सीजन लेकर उत्तराखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, हरियाणा, तेलंगाना, पंजाब, केरल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश तथा असम को ऑक्सीजन की डिलीवरी की है।

ऑक्सीजन सहायता तेज गति से पहुंचाना सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ऑक्सीजन एक्सप्रेस माल गाड़ी चलाने में नए और बेमिसाल मानक स्थापित कर रही है। लंबी दूरी के अधिकतर मामलों में माल गाड़ी की औसत गति 55 किलोमीटर से अधिक रही है। उच्च प्राथमिकता के ग्रीन कॉरिडोर में आपात स्थिति  को ध्यान में रखते हुए विभिन्न मंडलों के परिचालन दल अत्यधिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम कर रहे हैं ताकि कम से कम संभव समय में ऑक्सीजन पहुंचाई जा सके। विभिन्न सेक्शनों में कर्मियों के बदलाव के लिए तकनीकी ठहराव (स्टॉपेज) को घटाकर 1 मिनट कर दिया गया है।

रेल मार्गों को खुला रखा गया है और उच्च सतर्कता बरती जा रही है ताकि ऑक्सीजन एक्सप्रेस समय पर पहुंच सकें।

यह सभी काम इस तरह किया जा रहा है कि अन्य माल ढ़ुलाई परिचालन में कमी नहीं आए। 

नई ऑक्सीजन लेकर जाना बहुत ही गतिशील कार्य है और आंकड़े हर समय बदलते रहते हैं। देर रात ऑक्सीजन से भरी और अधिक ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ियां यात्रा प्रारंभ करेंगी।

 

एमजी/एएम/एजी/डीसी 



भारतीय रेल सभी बाधाओं को पार करते हुए तथा नए समाधान निकाल कर देश के विभिन्न राज्यों में तरल मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) पहुंचाना जारी रखे हुए है।

ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने देश की सेवा में 30000 मीट्रिक टन तरल मेडिकल ऑक्सीजन पहुंचा कर मील का पत्थर पार किया है।

अभी तक देश के विभिन्न राज्यों में 1734 से अधिक टैंकरों में 30182 मीट्रिक टन से अधिक तरल मेडिकल ऑक्सीजन (एलएमओ) पहुंचाई गई है।

ज्ञात हो कि 421 ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ियों ने अपनी यात्रा पूरी कर विभिन्न राज्यों को सहायता पहुंचाई है।

ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने देश के दक्षिणी राज्यों में 15000 एमटी से ज्यादा तरल मेडिकल ऑक्सीजन की डिलीवरी की है। 

ऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा देश के दक्षिणी राज्यों आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु को क्रमशः 3600, 3700 और 4900 एमटी से अधिक एलएमओ पहुंचाई गई है।

इस विज्ञप्ति के जारी होने तक 2 ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ियां 10 टैंकरों में 177 एमटी से अधिक एलएमओ लेकर चल रही हैं। 

ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने 50 दिन पहले 24 अप्रैल को महाराष्ट्र में 126 एमटी तरल मेडिकल ऑक्सीजन की डिलीवरी करने के साथ अपना काम प्रारंभ किया था।  

भारतीय रेलवे का यह प्रयास रहा है कि ऑक्सीजन का अनुरोध करने वाले राज्यों को कम से कम संभव समय में अधिक से अधिक संभव ऑक्सीजन पहुंचाई जा सके।

ऑक्सीजन एक्सप्रेस द्वारा 15 राज्यों- उत्तराखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, हरियाणा, तेलंगाना, पंजाब, केरल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड और असम को ऑक्सीजन सहायता पहुंचाई गई है।

Rail News
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Jun 14 (06:09)
Rang De Basanti^   47254 blog posts
Re# 4985118-1            Tags   Past Edits
इस विज्ञप्ति के जारी होने तक महाराष्ट्र में 614 एमटी ऑक्सीजन, उत्तर प्रदेश में लगभग 3797, मध्य प्रदेश में 656 एमटी, दिल्ली में 5722 एमटी,  हरियाणा में 2354 एमटी, राजस्थान में 98 एमटी, कर्नाटक में 3782 एमटी, उत्तराखंड में 320 एमटी, तमिलनाडु में 4941 एमटी, आंध्र प्रदेश में 3664 एमटी, पंजाब में 225 एमटी, केरल में 513 एमटी, तेलंगाना में 2972 एमटी, झारखंड में 38 एमटी और असम में 480 एमटी ऑक्सीजन पहुंचाई गई है।

अब तक ऑक्सीजन एक्सप्रेस ने देश भर के 15 राज्यों में लगभग 39 नगरों /शहरों में एलएमओ
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पहुंचाई है। इन शहरों में उत्तर प्रदेश में लखनऊ, वाराणसी, कानपुर, बरेली, गोरखपुर और आगरा, मध्य प्रदेश में सागर, जबलपुर, कटनी और भोपाल, महाराष्ट्र में नागपुर, नासिक, पुणे, मुंबई और सोलापुर, तेलंगाना में हैदराबाद, हरियाणा में फरीदाबाद और गुरुग्राम, दिल्ली में तुगलकाबाद, दिल्ली कैंट और ओखला, राजस्थान में कोटा और कनकपारा, कर्नाटक में बेंगलुरु, उत्तराखंड में देहरादून, आंध्र प्रदेश में नेल्लोर, गुंटूर, तड़ीपत्री और विशाखापत्तनम, केरल में एर्नाकुलम, तमिलनाडु में तिरुवल्लूर, चेन्नई, तूतीकोरिन, कोयंबटूर और मदुरै, पंजाब में भटिंडा और फिल्लौर, असम में कामरूप और झारखंड में रांची शामिल हैं।

रेलवे ने ऑक्सीजन सप्लाई स्थानों के साथ विभिन्न मार्गों की मैपिंग की है और राज्यों की बढ़ती हुई आवश्यकता के अनुसार अपने को तैयार ऱखा है। भारतीय रेल को एलएमओ लाने के लिए टैंकर राज्य प्रदान करते हैं।

पूरे देश से जटिल परिचालन मार्ग नियोजन परिदृश्य में भारतीय रेल ने पश्चिम में हापा, बड़ौदा मुंदड़ा, पूर्व में राउरकेला, दुर्गापुर, टाटा नगर, अंगुल से ऑक्सीजन लेकर उत्तराखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु, हरियाणा, तेलंगाना, पंजाब, केरल, दिल्ली, उत्तर प्रदेश तथा असम को ऑक्सीजन की डिलीवरी की है।

ऑक्सीजन सहायता तेज गति से पहुंचाना सुनिश्चित करने के लिए रेलवे ऑक्सीजन एक्सप्रेस माल गाड़ी चलाने में नए और बेमिसाल मानक स्थापित कर रही है। लंबी दूरी के अधिकतर मामलों में माल गाड़ी की औसत गति 55 किलोमीटर से अधिक रही है। उच्च प्राथमिकता के ग्रीन कॉरिडोर में आपात स्थिति  को ध्यान में रखते हुए विभिन्न मंडलों के परिचालन दल अत्यधिक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम कर रहे हैं ताकि कम से कम संभव समय में ऑक्सीजन पहुंचाई जा सके। विभिन्न सेक्शनों में कर्मियों के बदलाव के लिए तकनीकी ठहराव (स्टॉपेज) को घटाकर 1 मिनट कर दिया गया है।

रेल मार्गों को खुला रखा गया है और उच्च सतर्कता बरती जा रही है ताकि ऑक्सीजन एक्सप्रेस समय पर पहुंच सकें।

यह सभी काम इस तरह किया जा रहा है कि अन्य माल ढ़ुलाई परिचालन में कमी नहीं आए। 

नई ऑक्सीजन लेकर जाना बहुत ही गतिशील कार्य है और आंकड़े हर समय बदलते रहते हैं। देर रात ऑक्सीजन से भरी और अधिक ऑक्सीजन एक्सप्रेस गाड़ियां यात्रा प्रारंभ करेंगी।

 

एमजी/एएम/एजी/डीसी 
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