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VGLB/Virangana Lakshmibai Junction (8 PFs)
ویرنگانہ لکشمی بائی جنکشن (جھانسی)     वीरांगना लक्ष्मीबाई जंक्शन (झाँसी)
[Jhansi]

Track: Triple Electric-Line

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Chitra Nagra Road, Lal Bahadur Shastri Marg, Jhansi, PIN 284003 (Jn.Point - AGC/CNB/BPL/PRYJ)
State: Uttar Pradesh


Zone: NCR/North Central   Division: Virangana Lakshmibai

No Recent News for VGLB/Virangana Lakshmibai Junction
Nearby Stations in the News
Type of Station: Junction
Number of Platforms: 8
Number of Halting Trains: 232
Number of Originating Trains: 19
Number of Terminating Trains: 19
1 Follows
Rating: 3.4/5 (882 votes)
cleanliness - average (114)
porters/escalators - good (111)
food - average (111)
transportation - good (110)
lodging - good (109)
railfanning - good (109)
sightseeing - good (109)
safety - good (109)
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Station News

Page#    Showing 1 to 20 of 1609 News Items  next>>
Jan 15 (16:41) ग्वालियर स्टेशन पर दिव्यांग यात्रियों की मदद को मिलीं दो आधुनिक मशीनें बिना इस्तेमाल कंडम (www.naidunia.com)
IR Affairs
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News Entry# 474932  Blog Entry# 5190955   
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Jan 15 2022 (16:41)
Station Tag: Lalitpur Junction/LAR removed by Adittyaa Sharma/1421836

Jan 15 2022 (16:41)
Station Tag: Virangana Lakshmibai Junction/VGLB added by Adittyaa Sharma/1421836

Jan 15 2022 (16:41)
Station Tag: Lalitpur Junction/LAR added by Adittyaa Sharma/1421836

Jan 15 2022 (16:41)
Station Tag: Gwalior Junction/GWL added by Adittyaa Sharma/1421836
ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। रेलवे स्टेशन पर दिव्यांग यात्रियों को पैदल चलने से बचाने और उन्हें प्लेटफार्म गेट से कोच के ठीक बाहर तक पहुंचाने के लिए मौजूद दो आधुनिक मशीनें अफसरों की लापरवाही के चलते कंडम होने के कगार पर पहुंच गई हैं। इनमें से एक लिफ्टर मशीन वर्ष 2016 में आइआरसीटीसी (इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कार्पोरेशन) ने ग्वालियर रेलवे स्टेशन को उपहार स्वरूप दी थी। दूसरी मशीन गोल्फ कार्ट जुलाई 2015 में रोटरी क्लब ने ग्वालियर स्टेशन प्रबंधन को भेंट की थी। अब ये दोनों ही मशीनें स्टेशन के पार्सल गोदाम के एक कोने में रखवा दी गई हैं। रेलवे के अफसर भी इन्हें मरम्मत के बाद ठीक कराकर इस्तेमाल करने के बजाय कंडम घोषित करने जा रहे हैं।
आइआरसीटीसी
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ने जो मशीन रेलवे को दी है, वह लिफ्टर की तरह काम करती है। इस मशीन में एक चेयर अटैच है, जिस पर दिव्यांग यात्री को बैठाया जाता है। मशीन में पहिए लगे हैं, जिससे यह प्लेटफॉर्म पर चलती है और चालक व दिव्यांग यात्री इस पर आराम से बैठ सकते हैं। इस मशीन को ट्रेन के गेट तक लाकर कुर्सी को लिफ्ट के जरिए उठाया जाता है, ताकि यात्री ट्रेन के पायदान के बजाय सीधे गेट के अंदर प्रवेश कर सके। इससे यात्री बिना परेशानी आराम से ट्रेन में पहुंच सकते हैं। यह मशीन ग्वालियर स्टेशन पहुंचने के बाद एक बार भी उपयोग में नहीं लाई गई। शुरुआत में रेलवे प्रबंधन ने आपरेटर न होने का हवाला दिया और बाद में इस मशीन को उठाकर कोने में रखवा दिया गया।़इिन सुविधाओं के लिए नहीं हेल्पलाइन नंबर: दिव्यांग यात्रियों को सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए स्टेशन स्तर पर कोई हेल्पलाइन नंबर नहीं है। ऐसे यात्रियों के सहायकों को रेलवे के सेंट्रल हेल्पलाइन नंबर 139 और 142 पर कॉल करना पड़ता है या फिर स्टेशन पहुंचने के बाद एक से दूसरे कमरों में झांकना पड़ता है।
दूसरी मशीन की बदलनी है बैटरी
स्टेशन प्रबंधन को रोटरी क्लब द्वारा छह सीटर गोल्फ कार्ट भी दी गई हैं, यह बैटरी से संचालित होती हैं। दो माह पहले इस मशीन की बैटरी में खराबी आ गई। यदि इसकी बैटरी बदल दी जाती तो यह कार्ट लगातार यात्रियों के काम में आती रहती, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। अफसरों ने इस मशीन को भी पार्सल कार्यालय के गोदाम में रखवा दिया है।
आप जिन मशीनों की बात कर रहे हैं, मैं उनकी जानकारी ग्वालियर स्टेशन प्रबंधन से लेता हूं, उन्हें चेक कराकर देखा जाएगा। इसके बाद इन मशीनों के संबंध में जल्द निर्णय लिया जाएगा।
मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर मध्य रेलवे झांसी मंडल
Jan 15 (14:01) ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर दिव्यांग यात्रियों की मदद के लिए आई थीं दो आधुनिक मशीनें, जानें क्या है हाल (www.naidunia.com)
IR Affairs
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News Entry# 474909  Blog Entry# 5190851   
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Jan 15 2022 (14:01)
Station Tag: Lalitpur Junction/LAR removed by Adittyaa Sharma/1421836

Jan 15 2022 (14:01)
Station Tag: Virangana Lakshmibai Junction/VGLB added by Adittyaa Sharma/1421836

Jan 15 2022 (14:01)
Station Tag: Lalitpur Junction/LAR added by Adittyaa Sharma/1421836

Jan 15 2022 (14:01)
Station Tag: Gwalior Junction/GWL added by Adittyaa Sharma/1421836
ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर दिव्यांग यात्रियों को पैदल चलने से बचाने और उनके कोच के ठीक बाहर तक पहुंचाने के लिए मौजूद दो आधुनिक मशीनें अफसरों की लापरवाही के चलते कंडम होने के कगार पर पहुंच गई हैं। इनमें से एक लिफ्टर मशीन वर्ष 2016 में इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कार्पोरेशन (आइआरसीटीसी) ने ग्वालियर रेलवे स्टेशन को उपहार स्वरूप दी थी, जबकि दूसरी मशीन एक गोल्फ कार्ट रोटरी क्लब ने ग्वालियर स्टेशन प्रबंधन को गिफ्ट की थी। अब ये दोनों ही मशीनें स्टेशन के पार्सल गोदाम के एक कोने में रखवा दी गई हैं। रेलवे के अफसर भी इन्हें मरम्मत के बाद ठीक कराकर इस्तेमाल करने के बजाय कंडम घोषित करने जा रहे हैं।
आइआरसीटीसी ने जो मशीन
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रेलवे को दी है, वो एक लिफ्टर की तरह काम करती हैं। इस मशीन में एक चेयर अटैच है, जिस पर दिव्यांग यात्री को बैठाया जाता है। मशीन में पहिए लगे हैं, जिससे यह प्लेटफॉर्म पर चलती हैं और चालक व दिव्यांग यात्री इस पर आराम से बैठ सकते हैं। इस मशीन को ट्रेन के गेट तक लाकर कुर्सी को लिफ्ट के जरिए उठाया जाता है, ताकि यात्री ट्रेन के पायदान के बजाय सीधे गेट के अंदर प्रवेश कर सके। इससे यात्री बिना परेशानी आराम से ट्रेन में पहुंच सकते हैं। यह मशीन ग्वालियर स्टेशन पहुंचने के बाद एक बार भी उपयोग में नहीं लाई गई। शुरूआत में रेलवे प्रबंधन ने आपरेटर न होने का हवाला दिया और बाद में इस मशीन को उठाकर कोने में रखवा दिया गया।
दूसरी मशीन की बदलनी है बैटरीः स्टेशन को रोटरी क्लब द्वारा छह सीटर गोल्फ कार्ट भी दी गई है। यह बैटरी से संचालित होती है। दो माह पहले इस मशीन की बैटरी में खराबी आ गई। यदि इसकी बैटरी बदल दी जाती तो यह कार्ट लगातार यात्रियों के काम में आती रहती, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। अफसरों ने इस मशीन को पार्सल कार्यालय के गोदाम में रखवा दिया है।
इन सुविधाओं के लिए नहीं हेल्पलाइन नंबरः ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर इन सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए स्टेशन स्तर पर कोई हेल्पलाइन नंबर नहीं है। ऐसे यात्रियों के सहायकों को रेलवे के सेंट्रल हेल्पलाइन नंबर 139 और 142 पर काल करना पड़ता है या फिर स्टेशन पहुंचने के बाद एक से दूसरे कमरों में झांकना पड़ता है। इसमें उनका समय भी खर्च होता है। इसके चलते अपने स्तर पर ही दिव्यांग यात्रियों के लिए उनके सहायक व्यवस्था बनाते हैं।
वर्जन-
आप जिन मशीनों की बात कर रहे हैं, मैं उनकी जानकारी ग्वालियर स्टेशन प्रबंधन से लेता हूं। उन्हें चेक कराकर देखा जाएगा। उसके बाद इन मशीनों के संबंध में जल्द निर्णय लिया जाएगा।
मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर मध्य रेलवे झांसी मंडल
Jan 15 (07:51) झांसी पैसेंजर रद्द होने पर यात्रियों का हंगामा (www.amarujala.com)
Commentary/Human Interest
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News Entry# 474887  Blog Entry# 5190563   
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Jan 15 2022 (07:51)
Station Tag: Virangana Lakshmibai Junction/VGLB added by 🚅🚊Bundelkhand Deserve for at least 1 South train/2111393

Jan 15 2022 (07:51)
Station Tag: Banda/BNDA added by 🚅🚊Bundelkhand Deserve for at least 1 South train/2111393
बांदा। तकनीकी गड़बड़ी से ऐन मौके पर अचानक रद्द हुई झांसी पैसेंजर ट्रेन के यात्रियों ने स्टेशन अधीक्षक कार्यालय में हंगामा किया। उनका कहना था कि निरस्तीकरण की सूचना 4-6 घंटे पहले दी जाना चाहिए थी। ठंड में यात्री स्टेशन आ गए तब सूचना दी गई।विज्ञापनस्टेशन अधीक्षक केके कुशवाहा का कहना है कि ट्रेन के मोटर कोचों के प्रेशर में कमियां आ जाने से विद्युत व्यवस्था ठप हो गई। काफी प्रयास के बाद भी उसे विद्युत विभाग ठीक नहीं कर सका। बिना बिजली ट्रेन भेजना खतरे से खाली नहीं था। वरिष्ठ खंड अभियंता की रिपोर्ट के बाद उच्चाधिकारियों ने ट्रेन को निरस्त किया।उधर, झांसी जाने के लिए आए यात्री बुंदेलखंड विश्वविद्यालय कर्मचारी राधेश्याम ने कहा कि बांदा स्टेशन पर दो घंटे ट्रेन खड़ी रही। लेकिन खराबी दूर नहीं हो पाई। ऐन मौके पर निरस्तीकरण की सूचना दी गई। बसंत विहार कालोनी के मयंक का कहना है कि यहां करीब एक घंटे...
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तक बैठा रहा। ट्रेन के निरस्त होने की कोई सूचना नहीं दी गई।यात्रियों के ट्रेन में बैठते ही ट्रेन के निरस्त होने की सूचना प्रसारित होने लगी। लखन कालोनी अतर्रा निवासी मैकू का कहना है कि उसे आवश्यक कार्य से झांसी जाना है। अतर्रा से वह बांदा आया और पता चला कि ट्रेन निरस्त हो गई है। ठंड में उसे पुन: 40 किमी वापस घर जाना होगा।
Jan 14 (11:03) नॉथ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन शाखा भंग (www.amarujala.com)
IR Affairs
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News Entry# 474800  Blog Entry# 5190047   
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Jan 14 2022 (12:35)
Station Tag: Virangana Lakshmibai Junction/VGLB added by Adittyaa Sharma/1421836
झांसी। नॉर्थ सेंट्रल रेलवे मेन्स यूनियन की झांसी मंडल शाखा को भंग कर दिया गया है। यूनियन के जोनल महामंत्री ने आदेश जारी कर मंडल महामंत्री को चार्ज छोड़ने के लिए कहा है। इसे लेकर एनसीआर के जीएम ने डीआरएम को पत्र लिखा है। किसी मंडल शाखा को भंग करने का झांसी मंडल में यह पहला मामला है।विज्ञापनझांसी मंडल में करीब 15 हजार से अधिक कर्मचारी हैं। यहां कर्मचारियों की समस्याओं को उठाने के लिए एनसीआरएमयू और एनसीआरईएस दो संगठन संचालित हैं। इन संगठनों की मान्यता का चुनाव हर तीन साल में होता है। झांसी मंडल में एनसीआरएमयू का कार्यकाल अप्रैल 2021 में पूरा हो चुका है। इसके बाद से मंडलीय शाखा का चुनाव नहीं हो पा रहा है। इसे लेकर बृहस्पतिवार शाम को एनसीआरएमयू के जोनल महामंत्री आरडी यादव ने पत्र आदेश जारी कर झांसी मंडल शाखा को भंग कर दिया। इसके साथ ही मंडल महामंत्री आरएन यादव को शाखा...
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का पूरा कार्यभार ग्वालियर कल्याण निरीक्षक वीएस कंसाना को सौंपने के लिए कहा है। इसे लेकर रेलवे जीएम ने भी डीआरएम को पत्र भेजकर कार्रवाई कराने के लिए कहा है।मामले को लेकर रेलवे कर्मचारियों में चर्चा का आलम है। बताया जाता है कि एनसीआरएमयू झांसी मंडल शाखा में पिछले कुछ दिनों से गुटबाजी हावी है। हालात यह हैं कि मंडल के कर्मचारी अधिकारियों की सुन नहीं रहे हैं। वहीं मंडल महामंत्री 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनकी सेवानिवृत्ति से पहले हुई इस कार्रवाई को अहम माना जा रहा है।
Jan 14 (10:41) किसने रखा था झांसी नाम और अब क्यों बदला रेलवे स्टेशन का नाम (hindi.news18.com)
Commentary/Human Interest
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News Entry# 474791  Blog Entry# 5190027   
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Jan 14 2022 (10:41)
Station Tag: Virangana Lakshmibai Junction/VGLB added by न्यूज अच्छी है चलो इसपर वीडियो बना देता हु/1084688
उत्तर प्रदेश के पुराने जिलों में एक और प्रसिद्ध शहर झांसी के रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर वीरांगना लक्ष्मीबाई कर दिया गया है. शहर का नाम झांसी ही रहेगा. हालांकि ये कुछ अटपटा लगता है. वो भी तब जबकि इस नाम को बदलने की कभी मांग ही नहीं की गई. वैसे झांसी नाम हमारे मुहावरों और कोक्तियों से जुड़ा रहा है. कहा जा सकता है झांसी और रानी लक्ष्मीबाई का नाम अपने आपमें एक- दूसरे के पूरक हो चुके हैं.
जब रानी लक्ष्मीबाई शासन करती थीं, तब भी इस जगह का नाम इसका नाम झांसी ही था. रेलवे स्टेशन तो यहां बाद में बना.
रानी
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लक्ष्मीबाई के निधन के बाद अंग्रेजों ने 1880 के आखिर में ये रेलवे स्टेशन बनवाया. झांसी का रेलवे स्टेशन देश के सबसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों में एक है. इसके प्लेटफॉर्म आम रेलवे प्लेटफार्म से ज्यादा लंबे हैं इन पर एक साथ दो ट्रेनों को हैंडल किया जा सकता है.
इसका नाम ना मुगलों ने रखा और ना अंग्रेजों नेवैसे झांसी का नाम ना तो मुगलों द्वारा रखा गया और ना ही अंग्रेजों के द्वारा. ये तो स्वाभाविक तौर पर सैकड़ों सालों से लोगों की जुबान पर चढ़ता आया है. कभी किसी ने झांसी के रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की बात भी नहीं सोची. ये राज्य सरकार की योजना है. उन्होंने तीन महीने पहले केंद्र सरकार को इस तरह का प्रस्ताव भेजा, जिसे स्वीकार कर लिया गया.
कई शहरों के नाम बदले गएइससे पहले योगी सरकार ने अपने कार्यकाल में फैजाबाद को अयोध्या, इलाहाबाद को प्रयागराज, मुगलसराय को दीन दयाल उपाध्याय नगर बना दिया गया है. बस इस अंतर ये है कि जिले का नाम नहीं बदला गया है. बल्कि केवल रेलवे स्टेशन का नाम बदला है.
वैसे रेलवे स्टेशन के नाम को बदलने के पीछे राज्य सरकार का तर्क यही है रानी लक्ष्मीबाई वीरांगना थीं. इस इलाके की पहचान उन्हीं से है, जिसका सांस्कृतिक तौर पर महत्व है. हालांकि जानने वाले इसके पीछे सियासी फायदे नुकसान को देख रहे हैं.
कैसे पड़ा इस ऐतिहासिक शहर का नाम झांसीआइए अब जानते हैं कि झांसी का नाम कैसे झांसी पड़ा और फिर रानी लक्ष्मीबाई के साथ मुकम्मल तौर पर चस्पां हो गया. झांसी प्रसिद्ध ऐतिहासिक शहर है. ‘भारतीय इतिहास’ में इसका महत्त्वपूर्ण स्थान रहा है. इस शहर को 1857 के बाद रानी लक्ष्मीबाई की वीरता से जोड़कर देखा जाता रहा है.
ये शहर 09 शताब्दी में बसा. झांसी के क़िले का निर्माण 1613 ई. में ओरछा शासक वीरसिंह बुन्देला ने करवाया था. कहा जाता है राजा वीरसिंह बुन्देला ने दूर से पहाड़ी पर एक छाया देखी, जिसे बुन्देली भाषा में ‘झाँई सी’ बोला गया. इसी शब्द के बिगड़ते स्वरूप इस शहर का नाम झांसी पड़ गया. 1734 ई. में छत्रसाल के निधन के बाद बुन्देला क्षेत्र का एक तिहाई भाग मराठों को दे दिया गया. फिर ये एक मराठा राज्य बन गया.
क्यों रानी लक्ष्मीबाई की जंग अंग्रेजों से हुईरानी लक्ष्मीबाई के पति का नाम राजा गंगाधर राव था. 1857 ई. में उनकी मृत्यु हो गई. ईस्ट इंडिया कंपनी इस पूरे राज्य का कंपनी के राज्य के तौर पर विलय करने की घोषणा कर दी. विधवा रानी लक्ष्मीबाई ने इसका विरोध किया. उन्होंने विरोधस्वरूप 1857 के स्वाधीनता संग्राम में शिरकत किया. हालांकि जून 1858 में रानी के निधन के बाद अंग्रेजों ने उनके राज्य पर कब्जा कर लिया. सन 1886 ई. में झांसी को यूनाइटेड प्रोविंस में जोड़ा गया, जो देश की आज़ादी के बाद 1956 में उत्तर प्रदेश बना.
रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की प्रक्रियारेलवे स्टेशन का नाम बदलने की प्रक्रिया की शुरुआत राज्य सरकार की तरफ से होती हैराज्य सरकार का अनुरोध रेलवे बोर्ड के पास जाता हैरेलवे बोर्ड इसे अनापत्ति के लिए गृह मंत्रालय के पास भेजता हैगृह मंत्रालय की मंजूरी के बाद रेलवे बोर्ड नाम को बदल देता हैनाम बदलने के साथ स्टेशन का कोड भी बदला जाता हैकोड को रेलवे के सारे दस्तावेजों में जगह दी जाती हैहालांकि कोड बदलने से बड़े पैमाने पर कागजों और दस्तावेजों में बदलाव करना पड़ता है

Rail News
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Jan 14 (17:30)
Believe in You
akhileshchauras~   3292 blog posts
Re# 5190027-1            Tags   Past Edits
झाँसी, आगे या पीछे लगा होना चाहिए।

Personally नाम बदलना मुझे भी पसंद नही आया।

JHS कितना बढ़िया code था।
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