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News Entry# 487296
केंद्र सरकार ने कोरोना के मामले में हालात को सामान्य मानते हुए कोविड प्रोटोकॉल को खत्म कर दिया, लेकिन रेलवे यह मानने के लिए तैयार नहीं है। कोविड की वजह से रेलवे ने मार्च 2020 से जनरल टिकट बंद किए। अब कोविड गाइडलाइन देशभर में हट गई है, लेकिन रेलवे ने जनरल टिकट अब तक शुरू नहीं किए। इन टिकटों पर 250 रु. पेनाल्टी ले रहे है, जिससे 11 माह में यात्रियों से 49 करोड़ रुपए वसूल लिए है।

फरवरी-मार्च 2022 से 85 प्रतिशत ट्रेनें चलने लगी हैं, लेकिन रेलवे जनरल टिकट
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30 जून तक बंद करने पर ही अड़ा है। हालात ये हैं कि रिजर्वेशन नहीं है और सफर जरूरी है, तो जनरल टिकट काउंटर के बाहर टीसी 250 रुपए पेनाल्टी लगाकर टिकट दे रहे हैं। ऐसा करके बिलासपुर जोन ही 11 महीने में 49 करोड़ रुपए की पेनाल्टी आम मुसाफिरों से वसूल चुका है और यह सिलसिला अगले 37 दिन तक जारी रहने वाला है।

भास्कर टीम ने अलग-अलग टिकट निरीक्षकों और यात्रियों से बातचीत के आधार पर पेनाल्टी के नाम पर चल रही इस वसूली की परतें उधेड़ी हैं। इस मामले में रेलवे अफसरों ने कहा-जनरल बोगी में रिजर्वेशन टिकट से ही बैठा जा सकता है। रिजर्वेशन मार्च में शुरू हुए हैं।

अधिकतम 4 महीने पहले तक यात्री टिकट बुक करवाते हैं, यानी जून 2022 तक की बुकिंग है। 30 जून तक इसी तरह जनरल टिकट मिलेंगे, उसके बाद काउंटर खुलेंगे और बिना पेनाल्टी के जनरल टिकट मिलेंगे। इस अतिरिक्त शुल्क को लेकर यात्री कोई चैलेंज नहीं कर सकता क्योंकि टीसी रसीद में ट्रेन नंबर नहीं लिख रहे हैं। नियमानुसार बिना टिकट यात्रा करने या प्लेटफॉर्म पर टीसी से टिकट बनाने की मांग करने पर अतिरिक्त शुल्क का प्रावधान है। इसी के तहत पेनाल्टी के साथ जनरल टिकट बन रहे हैं।

जानिए पेनाल्टी के नाम पर कमाई
बिलासपुर जोन से-660 करोड़- रिजर्वेशन, काउंटर से।49 करोड़- जुर्मानों से हुई वसूली।(नोट- आंकड़ा अप्रैल 2021 से फरवरी 2022 तक, तब स्पेशल ट्रेनें ही चल रही थीं)

वसूली नहीं पेनाल्टी है रेलवे का तर्क
जनरल बोगी के लिए ऑनलाइन और ट्रेन आने के 4 घंटे पहले रिजर्वेशन काउंटर में जाकर बुकिंग करवाएं। ये व्यवस्था रेल बोर्ड द्वारा बनाई गई है। ये वसूली नहीं पेनाल्टी है।

सांसदों को पता ही नहीं
सुनील सोनी, सांसद-रायपुर : जनरल टिकट पर पेनाल्टी कैसे लगा सकते हैं। यह तो विचित्र बात है। मुझे इस बारे में कुछ पता नहीं है।विजय बघेल, सांसद- दुर्ग : इस बारे में अभी तक मुझे किसी ने जानकारी नहीं दी है। पुणे से लौट रहा हूं, खुद स्टेशन जाकर देखता हूं।

भास्कर लाइव: काउंटर से कहते हैं- सामने टीसी खडे़ हैं, जुर्माना देकर टिकट ले लो

भास्कर टीम 21, 22 मई और 23 मई को रायपुर रेलवे स्टेशन पहुंची। अनारक्षित (जनरल) टिकट काउंटर पर पहुंचकर जबलपुर के लिए जनरल टिकट मांगा। जवाब मिला-अभी यहां से टिकट नहीं मिलेगा, सामने टीटी खड़े हैं, वे बनाकर देंगे। उनसे जाकर मिलें। यहां 21 मई की शाम 5 बजे 1 टीसी, 22 मई की शाम 6 बजे 4 टीसी और 23 मई की दोपहर 2 बजे 3 टीसी तैनात थे, जो जनरल टिकट बनाकर दे रहे थे।

वह भी 250 रुपए प्रति यात्री अतिरिक्त शुल्क के साथ। ड्यूटी इंचार्ज केसी नायक बोले- हम शासकीय आदेश का पालन कर रहे हैं। दुर्ग से ड्यूटी पर आए एक टीसी ने बताया कि उन्होंने 22 मई को चार घंटे में 70 हजार रुपए के टिकट बनाए थे।

23 मई की दोपहर 2:15 बजे प्लेटफॉर्म नंबर 5 पर ओखा-शालीमार ट्रेन आकर रूकी। ट्रेन में जनरल बोगी में पैर रखने तक की जगह नहीं थी। जिसे जहां जगह मिली वह वहां बैठ गया। यात्री फर्श पर बैठे थे। यहां कोरोना प्रोटोकॉल न तो पालन हो रहा था, न करवाए जाने वाला कोई था।

जितने का टिकट, अधिकांश मामलों में उससे ज्यादा की पेनाल्टीकेस-1 रायपुर स्टेशन पर टीसी की तलाश में भटक रहे जयंत यादव ने बताया कि उसे अपने भाई को बीना भेजना है। जनरल का टिकट 300 रुपए है, लेकिन पेनाल्टी के 250 रुपए अलग लग रहे हैं। पैसे देना मजबूरी है क्योंकि जाना जरूरी है।

भास्कर ने भी खरीदी | भास्कर टीम ने रायपुर से जबलपुर की टिकट बनवाई। 200 रु. जनरल टिकट का शुल्क और 250 रु. पेनाल्टी लगाई गई। एक अन्य टिकट झारसुगुड़ा से रायपुर की बनवाई। दाे यात्रियों का किराया 250 रु. लगा, लेकिन पेनाल्टी 500 रु. ली गई।

केस-2 राजेंद्र साहू को 22 मई को 3 दोस्तों के साथ करेली (जिला नरसिंहपुर, मध्यप्रदेश) जाना है। ट्रेनें बुक हैं, इसलिए टीसी से टिकट लेना ही विकल्प है। इनका टिकट 650 रुपए का मिलता। 750 की पेनाल्टी के साथ 1400 रु. का पड़ा।

पेनाल्टी का गणित

रायपुर रेलवे स्टेशन से रोजाना औसतन 60 ट्रेन गुजरती हैं।
1 ट्रेन में औसतन 5 जनरल बोगी लगती है।
नियमानुसार 2 एस (जनरल कोच) डिब्बे में 90 सीट होती हैं, तो इतनी ही टिकट जारी होनी चाहिए।
यहां टीसी के पास जो आ रहा वे पेनाल्टी के साथ टिकट बना रहे।
यह टिकट सिर्फ ट्रेन में चढ़ने के लिए अधिकृत कर रही, सीट देने के लिए नहीं।
250 रुपए वसूली से रेलवे के खाते में आ रहे रोजाना कई करोड़ रुपए।
भास्कर स्टैंड: 85% ट्रेनें चालू, हर ट्रेन
में भीड़, कोविड के प्रतिबंध हटे, फिर रेलवे क्यों नहीं शुरू करता जनरल टिकट

1 राजधानी, शताब्दी, दुरांतो को छोड़कर शेष सभी ट्रेनों में जनरल डिब्बे लग रहे हैं तो फिर जनरल टिकट क्यों बंद हैं?

2 पेनाल्टी लगाकर टीसी जो टिकट बना रहे हैं वह काउंटर से भी मिल सकती है। इससे यात्रियों के 250 रुपए बचेंगे।

3 रेलवे का जनरल बोगी में रिजर्वेशन का दावा। यानी जितनी सीटें उतने ही टिकट जारी होना चाहिए। फिर भीड़ क्यों?

4 हर यात्री के पास स्मार्ट फोन नहीं, कैसे रिजर्वेशन करवाएंगे? कई पैसेंजर तो अब तक इस व्यवस्था से अनभिज्ञ।

जनरल टिकट ऑनलाइन और रिजर्वेशन काउंटर पर भी उपलब्ध है। इसमें गलत नहीं है। 1 जुलाई से व्यवस्था सामान्य होगी। -साकेत रंजन, सीपीआरओ, एसईसीआर



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