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Kanchan Kanya Express: ডুয়ার্সের রাণী - Joydeep Roy

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Large Station Board;
Entry# 1588159-0
Medium; Platform Pic; Large Station Board;
Entry# 2603703-0


MYG/Miyagam Karjan Junction (2 PFs)
મિયાગામ કરજન જંક્શન     मियागाम करजन जंक्शन

Track: Double Electric-Line

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Miyagam , Juna Bazar , Karjan , District - Vadodara , Pin Code - 391240 .
State: Gujarat


Zone: WR/Western   Division: Vadodara

No Recent News for MYG/Miyagam Karjan Junction
Nearby Stations in the News
Type of Station: Junction
Number of Platforms: 2
Number of Halting Trains: 44
Number of Originating Trains: 0
Number of Terminating Trains: 0
Rating: NaN/5 (0 votes)
cleanliness - n/a (0)
porters/escalators - n/a (0)
food - n/a (0)
transportation - n/a (0)
lodging - n/a (0)
railfanning - n/a (0)
sightseeing - n/a (0)
safety - n/a (0)
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Station News

Page#    Showing 1 to 8 of 8 News Items  
Sep 15 (13:02) रेलवे ट्रैक पर पड़े मगरमच्छ के रेस्क्यू के लिए 25 मिनट रोकी गई राजधानी एक्सप्रेस, ये हुआ नतीजा (www.naidunia.com)
Major Accidents/Disruptions
WR/Western
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News Entry# 464880  Blog Entry# 5066828   
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Sep 15 2021 (13:02)
Station Tag: Miyagam Karjan Junction/MYG added by Adittyaa Sharma/1421836

Sep 15 2021 (13:02)
Station Tag: Mumbai Central/MMCT added by Adittyaa Sharma/1421836

Sep 15 2021 (13:02)
Station Tag: Vadodara Junction/BRC added by Adittyaa Sharma/1421836
कोरोनाकाल में भारतीय रेलवे ने लगातार पटरियों की मरम्मत करके ट्रेनों की स्पीड काफी हद तक बढ़ा दी है। इसके बाद से सुपरफास्ट ट्रेन राजधानी कभी कभार ही लेट होती है। ट्रेन के ज्यादा लेट होने पर भारतीय रेलवे यात्रियों को मुआवजा भी देता है। ऐसे में वडोदरा से मुंबई जाने वाली सुपरफास्ट राजधानी एक्सप्रेस को 25 मिनट तक रुकी रही और किसी यात्री ने इसको लेकर नाराजगी भी नहीं जाहिर की। इसकी वजह था मगरमच्छ का रेस्क्यू। एक मगरमच्छ रेलवे ट्रैक पर पड़ा हुआ था, जिसे बचाने के लिए राजधानी एक्सप्रेस को 25 मिनट तक रोका गया, लेकिन मगरमच्छ को नहीं बचाया जा सका।
वडोदरा से मुंबई के बीच रेलवे ट्रैक पर एक घायल मगरमच्छ ट्रैक के बीच में पड़ा था
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और दर्द से तड़प रहा था। आठ फीट लंबे मगरमच्छ का जीवन बचाने के लिए राजधानी एक्सप्रेस के अलावा वडोदरा-मुंबई लाइन पर चलने वाली अन्य ट्रेनें लगभग 45 मिनट के लिए रोक दी गईं थी। रेलवे अधिकारियों और पशु कार्यकर्ताओं ने मगरमच्छ को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया लेकिन उसे नहीं बचाया जा सका।
रेस्क्यू के लिए रोकी ट्रेन
वन्यजीव कार्यकर्ता हेमंत वाधवाना ने बताया "मुझे कर्जन रेलवे स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक ने लगभग 3.15 बजे फोन किया कि रेल ट्रैक पर एक मगरमच्छ पड़ा है। इसे रेलवे के एक गश्ती दल ने कर्जन मियागाम रेलवे स्टेशन से करीब पांच किलोमीटर दूर देखा था। घायल मगरमच्छ कहीं बीच में पड़ा था और वहां जल्दी पहुंचना संभव नहीं था। मैं अपने वाहन में पशु कार्यकर्ता नेहा पटेल के साथ तुरंत वहां पहुंचा। हालांकि, कर्जन रेलवे स्टेशन तक पहुंचने के बाद, हमें पता चला कि रेलवे अधिकारियों ने राजधानी एक्सप्रेस को लगभग 20 मिनट के लिए रोक दिया था ताकि हम ट्रैक पर जाकर मगरमच्छ को रेस्क्यू करा सकें। उसके बाद ट्रेन 5 मिनट और रोकी गई।"
इस वजह से नहीं बचा मगरमच्छ
वन्यजीव कार्यकर्ता के अनुसार वहां मौजूद रेलवे स्टाफ ने उन्हें बताया कि मगरमच्छ कुछ देर से अपना जबड़ा हिला रहा था। जांच के बाद पता चला कि उसके सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। इसके कुछ ही मिनट बाद उसकी मौत हो गई। अग्निवीर प्राणिन फाउंडेशन की कार्यकर्ता नेहा पटेल ने कहा कि मगरमच्छ को किसी तेज रफ्तार ट्रेन ने कुचल दिया था। मगरमच्छा को किसान ट्रेन में रखकर कर्जन रेलवे स्टेशन पर लाकर वन विभाग को सौंप दिया गया। इसके बाद इस ट्रैक पर ट्रेनों की आवाजाही शुरू हुई।
वन्यजीव कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग इलाकों से तीन और मगरमच्छों को बचाया। वन्यजीव बचाव ट्रस्ट के वालंटिअसर्स ने तरसाली के पास एक गांव से चार फीट लंबे मगरमच्छ को बचाया गया
वडोदरा
सुपरफास्ट ट्रेन राजधानी का रुकना बड़ी बात है। ट्रेन की देरी से यात्रियों में गुस्सा और अधिकारियों में हड़कंप पैदा कर देता है लेकिन वडोदरा से मुंबई जाने वाली सुपरफास्ट राजधानी एक्सप्रेस को 25 मिनट के लिए रोक दिया गया और किसी ने भी नराजगी जाहिर नहीं की। कारण था एक घायल मगरमच्छ, जो ट्रैक के बीच में दर्द से तड़प रहा
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था।
आठ फीट लंबे मगरमच्छ का जीवन बचाने के लिए 25 मिनट के लिए राजधानी एक्सप्रेस रोकी गई। इस ट्रेन के 25 मिनट रुकने से वडोदरा-मुंबई लाइन पर चलने वाली अन्य ट्रेनें लगभग 45 मिनट के लिए रोकी गईं।
नहीं बचाया जा सका मगरमच्छ
रेलवे अधिकारियों के साथ-साथ पशु कार्यकर्ताओं ने मगरमच्छ को बचाने के लिए अपना पूरा प्रयास किया लेकिन उसके सिर पर लगी गंभीर चोट से वह नहीं बचाया जा सका।
स्टेशन से पांच किलोमीटर दूर की घटना
वन्यजीव कार्यकर्ता हेमंत वाधवाना ने कहा, 'मुझे कर्जन रेलवे स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक ने लगभग 3.15 बजे फोन आया कि रेल ट्रैक पर एक मगरमच्छ पड़ा है। इसे रेलवे के एक गश्ती दल ने कर्जन मियागाम रेलवे स्टेशन से करीब पांच किलोमीटर दूर देखा। मैं अपने वाहन में पशु कार्यकर्ता नेहा पटेल के साथ तुरंत घटनास्थल पहुंच गया।'
घटनास्थल पर जल्दी पहुंचना नहीं था संभव
हेमंत ने बताया, 'घटनास्थल कहीं बीच में स्थित था और वहां जल्दी पहुंचना संभव नहीं था। हालांकि, हमारे वाहन के कर्जन रेलवे स्टेशन तक पहुंचने के बाद, हमें यह पता चला कि रेलवे अधिकारियों ने राजधानी एक्सप्रेस को लगभग 20 मिनट के लिए रोक दिया था ताकि हम ट्रैक पर जाकर मगरमच्छ को रेस्क्यू करा सकें। उसके बाद ट्रेन 5 मिनट और रोकी गई।'
सिर पर आई थीं गंभीर चोटें
वन्यजीव कार्यकर्ता ने बताया कि वहां मौजूद रेलवे स्टाफ ने कहा कि मगरमच्छ कुछ देर से अपना जबड़ा हिला रहा था। हमने इसकी जांच की और पाया कि इसके सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। अफसोस की बात है कि कुछ ही मिनटों में उसकी मौत हो गई। अग्निवीर प्राणिन फाउंडेशन की नेहा पटेल ने कहा, मगरमच्छ को किसी तेज रफ्तार ट्रेन ने कुचल दिया था।
ट्रेन से रेलवे स्टेशन तक लाया गया मगरमच्छ का शव
मगरमच्छ को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया और उसके बाद इस व्यस्त ट्रैक पर ट्रेन की आवाजाही शुरू की गई। कर्जन मियागम के स्टेशन अधीक्षक संतोष कुमार ने कहा कि राजधानी हमारी प्रीमियम ट्रेन है इसलिए हम इसमें कभी देरी नहीं करते हैं। लेकिन मंगलवार तड़के हमने मगरमच्छ की जान बचाने के लिए ट्रेक रोकी। दुर्भाग्य से मगरमच्छ नहीं बचाया जा सका। उसे किसान ट्रेन में रखकर कर्जन रेलवे स्टेशन पर लाकर वन विभाग को सौंप दिया गया।
तीन और मगरमच्छों को कराया गया रेस्क्यू
सोमवार की रात को वन्यजीव कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग इलाकों से तीन और मगरमच्छों को बचाया। वन्यजीव बचाव ट्रस्ट के वालंटिअसर्स ने तरसाली के पास एक गांव से चार फीट लंबे मगरमच्छ को बचाया गया। एक अन्य वन्यजीव कार्यकर्ता हेमंत वाधवाना ने एमएस विश्वविद्यालय में विज्ञान संकाय से दो फीट लंबे मगरमच्छ को बचाया। वह पास के नाले से निकल गया था। हलोल के कोटांबी गांव से पांच फीट लंबे मगरमच्छ को भी बचाया गया।
Sep 13 2018 (13:46) Asia’s first narrow-gauge rail line between Dhaboi-Miyagam in Gujarat to be converted to broad gauge (www.financialexpress.com)
New Facilities/Technology
WR/Western
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News Entry# 357453  Blog Entry# 3802980   
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Sep 13 2018 (13:46)
Station Tag: Miyagam Karjan Junction/MYG added by a2z~/1674352

Sep 13 2018 (13:46)
Station Tag: Dabhoi Junction/DB added by a2z~/1674352
While refusing to preserve the line as heritage, the Western Railway, which has jurisdiction over this line, wrote to the Railway Board stating that the project for converting this narrow gauge line into broad gauge line and linking it to the main line was sanctioned in the year 2011-12, and the work for that has already started.
Between Dhaboi and Miyagam in Gujarat is an Indian Railways line which is also said to be Asia’s first narrow-gauge line. However, soon this narrow-gauge line will be converted to braod gauge, reports IE. The line which has been operational since 19th century, does not add to present railway requirements. Earlier this year, the Railway Board decided to preserve this line as an invaluable piece
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of industrial heritage. However, recently, while refusing to preserve the line as heritage, the Western Railway, which has jurisdiction over this line, wrote to the Railway Board stating that the project for converting this narrow gauge line into broad gauge line and linking it to the main line was sanctioned in the year 2011-12, and the work for that has already started.
According to the report, the Western Railway argued that once the 33-km section is converted into broad gauge, it will help reduce congestion in Vadodara. The zone also informed that for this work, 13 tenders have been awarded, amounting to Rs 110 crore. This had been identified by the Railway Board and also four other lines connecting it, for preservation since they handle negligible traffic.
Western Railway stated that as the 33-km Dhaboi-Miyagam line has only two trains running every day, it is advised that this section should not be preserved as heritage line. Similarly, the zone has objected to preserving of the 51-km long Pratapnagar-Jambusar section, stating that this section has been sanctioned for gauge conversion. The Western Railway also claimed that if this line remains a narrow gauge, continuity of broad-gauge line from Bharuch/Dahesh to Chhota Udepur will be broken. However, the zone has agreed the preserving of three lines – 63 km long Bilimora-Waghai section, 38-km long Miyagam-Choranda-Malsar section and the 19-km long Choranda-Moti Koral section.
Other than some hill railways in India, the narrow-gauge lines are pretty much non-existent in the world. Indian Railways is making efforts to preserve them. All the above mentioned narrow gauge lines are in Gujarat of 204 km, were originally owned by the princely state’s Gaekwad Baroda State Railway.
Sep 13 2018 (06:59) Asia’s first narrow-gauge line in Gujarat set to broaden (indianexpress.com)
New Facilities/Technology
WR/Western
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News Entry# 357353  Blog Entry# 3801926   
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Sep 13 2018 (06:59)
Station Tag: Miyagam Karjan Junction/MYG added by a2z~/1674352

Sep 13 2018 (06:59)
Station Tag: Dabhoi Junction/DB added by a2z~/1674352
India is set to lose Asia’s first narrow-gauge railway line between Dhaboi and Miyagam in Gujarat, operational since the 19th Century. Considering its heritage value, and the fact that it does not add to present railway requirements in any significant way, the Railway Board in June had marked this line for preservation as an invaluable piece of industrial heritage.
But Western Railway, which has jurisdiction over this line, has refused to preserve it as heritage. It wrote to Railway Board this week, contending that the work of converting this line into broad gauge and linking it to the main line was sanctioned in 2011-12, and that portions of that work has already started.
Arguing
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in favour of gauge conversion, the zone has said that once converted, this 33-km section will reduce congestion in Vadodara. A total 13 tenders for this work has been awarded, amounting to Rs 110 crore, the Western Railway stated. “After the completion of gauge conversion… it will permanently remove the bottleneck in Vadodara and will bring operational flexibility and punctuality,” the note to the ministry said.
The Railway Board, including Member (Engineering), Financial Commissioner, and Railway Board chairman Ashwani Lohani had identified this, as well as four other lines connecting it, for preservation since they handle negligible traffic.
Commercially working narrow-gauge lines are pretty much nonexistent in the world, other than some hill railways in India, and this is an effort by the Railways to save them from extinction. All the lines are in Gujarat, totalling 204 km, and were originally owned by the princely state’s Gaekwad Baroda State Railway.
The zonal railway had been asked for comments on feasibility of the proposed move. The 33-km Dhaboi-Miyagam line, for instance, has only two trains running every day. “Hence it is advised that this section should not be preserved as heritage line,” it has written.
Similarly, of the five lines identified for preservation, the Western Railway has objected to preserving the 51-km Pratapnagar-Jambusar section, arguing that this has been sanctioned for gauge conversion and if this line remains a narrow gauge, continuity of broad-gauge line from Bharuch/Dahesh to Chhota Udepur will be broken.
It has, however, agreed to preserving three smaller branch lines: 38-km Miyagam-Choranda-Malsar section; 19-km Choranda-Moti Koral; and 63-km Bilimora-Waghai section.
Western Railway has proposed that a 9.5-km section between Patalpani and Kalakund may be taken up for preservation as a narrow gauge line.
Sep 12 2018 (23:27) Gujarat: Asia’s First Narrow-Gauge Railway Line Which Opened In 1862 To Soon Become Broad-Gauge  About Swarajya Useful Links Participate Stay Connected (swarajyamag.com)
New Facilities/Technology
WR/Western
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News Entry# 357328  Blog Entry# 3801698   
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Sep 12 2018 (23:27)
Station Tag: Miyagam Karjan Junction/MYG added by a2z~/1674352

Sep 12 2018 (23:27)
Station Tag: Dabhoi Junction/DB added by a2z~/1674352
The 33-km Dabhoi-Miyagam line, India’s first narrow gauge railway stretch which started operations in 1862, is set to be broadened. The decision to broaden it was first announced just weeks after the Railways identified it as one of the five narrow gauge lines that can be preserved to promote heritage tourism.
This week, the Western Railways has written to the Railways Board highlighting that the work of converting this line into broad gauge and linking it to the main line was sanctioned in 2011-12, and that portions of the work have already started.
The
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line, which was closed on 15 July this year, was designed by a British engineer named A W Ford. When it started operation, coaches were pulled by oxen. However, steam engines were deployed in the year 1863, when Maharaja Khanderao of Baroda State purchased three steam locomotives built by Glasgow-based Neilson and Company.
Apart from this, the other lines which were identified for preservation are the Miyagam-Malsar line, the Charonda-Moti Karal line, the Pratap Nagar-Jambusar line and the Bilmora-Waghi line.
Now a days commercial narrow gauge lines are virtually non-existent, with the their usage being mainly restricted to tourist trails.
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