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दौड़ती है हिमालय तट से सागर, हमसफ़र हर राह पर, हवाई जहाज़ों को त्याग कर, करो अक्सर, भारतीय रेल में सफर. - Arpit P

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Large Station Board;
Entry# 1963690-0
Medium; Platform Pic; Large Station Board;
Entry# 2494364-0


DER/Dadri (4 PFs)
دادری     दादरी

Track: Triple Electric-Line

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NH 91 Dadri Rd, Dadri, Gautambudhnagar 203207
State: Uttar Pradesh


Zone: NCR/North Central   Division: Prayagraj (Allahabad)

No Recent News for DER/Dadri
Nearby Stations in the News
Type of Station: Regular
Number of Platforms: 4
Number of Halting Trains: 7
Number of Originating Trains: 0
Number of Terminating Trains: 0
Rating: 2.4/5 (22 votes)
cleanliness - average (3)
porters/escalators - average (3)
food - poor (3)
transportation - good (3)
lodging - poor (2)
railfanning - good (3)
sightseeing - poor (2)
safety - average (3)
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Station News

Page#    Showing 1 to 20 of 37 News Items  next>>
Sep 26 (06:55) डीएफसी पर शिफ्ट होंगी एनसीआर रूट की ट्रेनें (m.livehindustan.com)
IR Affairs
NCR/North Central
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News Entry# 419554  Blog Entry# 4725341   
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Sep 26 2020 (06:55)
Station Tag: Pt. DD Upadhyaya Junction (Mughalsarai)/DDU added by RIP S P Balasubrahmanyam Ji😔🙏🏼/1421836

Sep 26 2020 (06:55)
Station Tag: Dadri/DER added by RIP S P Balasubrahmanyam Ji😔🙏🏼/1421836

Sep 26 2020 (06:55)
Station Tag: Bhaupur/BPU added by RIP S P Balasubrahmanyam Ji😔🙏🏼/1421836

Sep 26 2020 (06:55)
Station Tag: Kanpur Central/CNB added by RIP S P Balasubrahmanyam Ji😔🙏🏼/1421836

Sep 26 2020 (06:55)
Station Tag: Prayagraj Junction (Allahabad)/PRYJ added by RIP S P Balasubrahmanyam Ji😔🙏🏼/1421836
उत्तर मध्य रेलवे में ट्रेनों की लेटलतीफी से परेशान मुसाफिरों को बड़ी राहत मिलेगी। अगले महीने से ईस्टर्न डेडीक्रेटेड फ्रेट कॉरीडोर (ईडीएफसी) पर एनसीआर रूट की ट्रेनों का संचालन शुरू हो जाएगा। यह जानकारी उत्तर मध्य रेलवे के जीएम राजीव चौधरी ने शुक्रवार को पत्रकारों के साथ ऑनलाइन बातचीत में दी। कानपुर के करीब भाऊपुर से दादरी के बीच ईडीएफसी पर मालगाड़ी संचालन शुरू हो रहा है।जीएम ने बताया कि अगले महीने से भाऊपुर से दादरी तक मालगाड़ी संचालन शुरू हो जाएगा। भाऊपुर से पंडित दीन दयाल उपाध्याय तक मालगाड़ी का संचालन अगले साल दिसंबर तक शुरू होने की उम्मीद है। एनसीआर के प्रमुख रेलमार्ग दिल्ली-हावड़ा, दिल्ली-मुंबई पर जून 2023 तक सभी यात्री ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 160 किमी प्रतिघंटा हो जाएगी। उन्होंने बताया कि इस वक्त 100 ट्रेनें 130 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चल रही हैं।लॉकडाउन में बढ़ गई मालगाड़ी की रफ्तारप्रयागराज। जीएम ने बताया कि लॉकडाउन...
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में रेलवे की आधारभूत संरचना के विकास में काफी काम किया गया। यही कारण है कि मालगाड़ियों की औसत स्पीड को 47 किलोमीटर प्रतिघंटे तक पहुंचा दिया गया है। अगले महीने मालगाड़ी की औसत स्पीड 50 किमी प्रतिघंटा करने का लक्ष्य है।

Rail News
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Sep 26 (09:18)
niteshsingh994
NSTHAKUR~   44 blog posts
Re# 4725341-1            Tags   Past Edits
Fir kahe ka dedicated freight corridor
Jul 08 (14:37) दादरी क्षेत्र में छह आरओबी का होगा निर्माण (m-jagran-com.cdn.ampproject.org)
IR Affairs
NCR/North Central
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News Entry# 413433  Blog Entry# 4664603   
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Jul 08 2020 (14:37)
Station Tag: Dankaur/DKDE added by GZB⭐️WAP5⭐️35006/1833693

Jul 08 2020 (14:37)
Station Tag: Chipyana Buzurg/CPYZ added by GZB⭐️WAP5⭐️35006/1833693

Jul 08 2020 (14:37)
Station Tag: Ajaibpur/AJR added by GZB⭐️WAP5⭐️35006/1833693

Jul 08 2020 (14:37)
Station Tag: Maripat/MIU added by GZB⭐️WAP5⭐️35006/1833693

Jul 08 2020 (14:37)
Station Tag: Boraki/BRKY added by GZB⭐️WAP5⭐️35006/1833693

Jul 08 2020 (14:37)
Station Tag: Dadri/DER added by GZB⭐️WAP5⭐️35006/1833693
दादरी : प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंगलवार को गौतमबुद्ध नगर के दादरी शहर के लोगों को बड़ी सौगात दी। उप मुख्यमंत्री ने दादरी क्षेत्र में दिल्ली-हावड़ा रेलवे ट्रैक पर करीब 444 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले छह रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) का शिलान्यास लखनऊ से किया। इस दौरान दादरी के विधायक मास्टर तेजपाल नागर मेरठ स्थित उत्तर प्रदेश लोक निर्माण निगम के चीफ डिवीजन कार्यालय पर मौजूद रहे। इन सभी आरओबी का निर्माण उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम व लोक निर्माण विभाग द्वारा किया जाएगा।

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विधायक ने बताया कि दादरी शहर के विकास में ग्रेटर नोएडा व दादरी के बीच रेलवे लाइन पर ओवरब्रिज न होना बड़ी बाधा थी। इस कारण नोएडा व ग्रेटर नोएडा के लोगों को दादरी तक आने-जाने में रेलवे फाटक पर जाम की समस्या से जूझना पड़ता था। आरओबी के निर्माण के बाद लोगों को जाम से राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि दो लेन का आरओबी का निर्माण मायचा गांव के पास होगा और दो लेन का आरओबी मायचा-अजायबपुर मार्ग पर बनाया जाएगा। इसके अलावा रायपुर बांगर-अजायबपुर मार्ग व दो लेन का आरओबी रामगढ़-घोड़ी बछेड़ा गांव के बीच बनेगा। एक अन्य चार लेन का आरओबी चिपियाना गांव के पास बनाया जाएगा। इन सभी पर करीब 444 करोड़ रुपये खर्च आएगा। उन्होंने बताया कि सभी आरओबी बनने के बाद क्षेत्र की जनता के साथ उद्यमियों को लाभ मिलेगा। इन सभी आरओबी के निर्माण के बाद ग्रेटर नोएडा, नोएडा की तरह ही दादरी क्षेत्र का विकास हो सकेगा। तेजपाल नागर ने क्षेत्र की जनता को यह सौगात देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व उप मुख्यमंत्री का आभार जताया है।
इस मौके पर विधायक के साथ उप्र ब्रिज कारपोरेशन के महाप्रबंधक आशीष श्रीवास्तव, संजीव भारद्वाज, शशि भूषण समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।
Jun 20 (17:16) दिल्ली-एनसीआर में हाल के भूकंप के झटके किसी बड़ी घटना के संकेत नहीं देते, हालांकि एक बड़े भूकंप की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता: डब्ल्यूआईएचजी (pib.gov.in)
Commentary/Human Interest
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News Entry# 411850  Blog Entry# 4654175   
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Jun 21 2020 (00:32)
Station Tag: Dadri/DER added by GZB⭐️WAP5⭐️35006^~/1833693

Jun 21 2020 (00:32)
Station Tag: Panipat Junction/PNP added by GZB⭐️WAP5⭐️35006^~/1833693

Jun 21 2020 (00:32)
Station Tag: Sonipat Junction/SNP added by GZB⭐️WAP5⭐️35006^~/1833693

Jun 21 2020 (00:32)
Station Tag: Gurgaon/GGN added by GZB⭐️WAP5⭐️35006^~/1833693

Jun 21 2020 (00:32)
Station Tag: Faridabad/FDB added by GZB⭐️WAP5⭐️35006^~/1833693

Jun 21 2020 (00:32)
Station Tag: Ghaziabad Junction/GZB added by GZB⭐️WAP5⭐️35006^~/1833693

Jun 21 2020 (00:32)
Station Tag: New Delhi/NDLS added by GZB⭐️WAP5⭐️35006^~/1833693
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
‘दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में ऐसे भूकंप के झटके असामान्य नहीं हैं, लेकिन ये संकेत देते हैं कि क्षेत्र में तनाव ऊर्जा का निर्माण हो रहा है‘
दिल्ली-एनसीआर की पहचान दूसरे सर्वोच्च भूकंपीय खतरे वाले जोन (जोन IV) के रूप में की गई है
हाल की घटनाएं ‘पूर्व झटकों‘ के रूप में परिभाषित नहीं की जा सकती
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दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के सभी झटके तनाव ऊर्जा के जारी होने के कारण आते हैं, जो अब भारतीय प्लेट के उत्तर दिशा में बढ़ने और फॉल्ट या कमजोर जोनों के जरिये यूरेशियन प्लेट के साथ इसके संघर्ष के परिणामस्वरूप संचित हो गए हैं ‘
प्रविष्टि तिथि: 19 JUN 2020 11:01AM by PIB Delhi
दिल्ली-एनसीआर में हाल के भूकंप के झटकों की श्रृंखला के बाद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के एक स्वायत्तशासी संस्थान वाडिया हिमालयी भूविज्ञान संस्थान ने कहा है कि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में ऐसे भूकंप के झटके असामान्य नहीं हैं, लेकिन ये संकेत देते हैं कि क्षेत्र में तनाव ऊर्जा का निर्माण हो रहा है।
उन्होंने कहा है कि चूंकि भूकंपीय नेटवर्क काफी अच्छा है, दिल्ली-एनसीआर में और आसपास के क्षेत्रों में वर्तमान सूक्ष्म से हल्के झटके रिकार्ड हो सकते हैं।
हालांकि कोई भूकंप कब, कहां और कितनी अधिक ऊर्जा (मैग्निीट्यूट) के साथ आ सकता है, इसकी हमारी समझ स्वष्ट नहीं है, लेकिन किसी क्षेत्र की अति संवेदनशीलता को उसकी पूर्व भूकंपनीयता, तनाव बजट की गणना, सक्रिय फाल्टों की मैपिंग आदि से समझा जा सकता है। दिल्ली-एनसीआर की पहचान दूसरे सर्वोच्च भूकंपीय खतरे वाले जोन (जोन IV)
के रूप में की गई है। कभी कभी एक अति संवेदनशील जोन शांत रह सकता है, वहां छोटी तीव्रता के भूकंप आ सकते हैं जो किसी बड़े भूकंप का संकेत नहीं देते, या बिना किसी अनुमान के एक बड़े भूकंप के द्वारा अचानक एक बड़ा झटका दे सकता है। दिल्ली-एनसीआर में आए 14 छोटी तीव्रता के भूकंपों में से 29 मई को रोहतक में आए भूकंप की तीव्रता 4.6 थी।
हाल की घटनाएं ‘पूर्व झटकों‘ के रूप में परिभाषित नहीं की जा सकतीं। अगर क्षेत्र में एक बड़ा भूकंप आता है, तो उससे तत्काल पूर्व उस क्षेत्र में आए सभी छोटे भूकंपों को ‘पूर्व झटकों‘ के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। इसलिए, वैज्ञानिक रूप से दिल्ली-एनसीआर में आए छोटी तीव्रता के ऐसे सभी भूकंपों को पूर्व झटकों के रूप में सभी निर्धारित किया जा सकता है जब इसके तत्काल बाद एक बड़ा भूकंप आता है। हालांकि इसका पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता, एक बड़े भूकंप, जो लोगों एवं संपत्तियों के लिए खतरा बन सकताहै, के आने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। चूंकि किसी भूकंप का पूर्वानुमान किसी तंत्र द्वारा नहीं लगाया जा सकता, इसलिए भूकंप के इन हल्के झटकों को किसी बड़ी घटना के संकेत के रूप में परिभाषित नहीं किया जा सकता।
दिल्ली-एनसीआर में पहले के भूकंपों का परिदृश्य:
भूकंप की ऐतिहासिक सूची प्रदर्शित करती है कि दिल्ली में 1720 में 6.5 की तीव्रता का भूकंप आया था, मथुरा में 1803 में 6.8 की तीव्रता का, 1842 में मथुरा के निकट 5.5 की की तीव्रता का, 1956 में बुलंदशहर में 6.7 की तीव्रता का, 1960 में फरीदाबाद में 6.0 की तीव्रता का, दिल्ली एनसीआर में 1966 में मुरादाबाद के निकट 5.8 की तीव्रता का भूकंप आया था।

Rail News
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Jun 20 (17:17)
Rang De Basanti^   45759 blog posts
Re# 4654175-1            Tags   Past Edits
Part-2/
दिल्ली एनसीआर में भूकंप क्यों आते हैं ?
दिल्ली एनसीआर में भूकंप के सभी झटके तनाव ऊर्जा के जारी होने के कारण आते हैं, जो अब भारतीय प्लेट के उत्तर दिशा में बढ़ने और फॉल्ट या कमजोर जोनों के जरिये यूरेशियन प्लेट के साथ इसके संघर्ष के परिणामस्वरूप संचित हो गए हैं। दिल्ली एनसीआर में कई सारे कमजोर जोन और फॉल्ट हैं: दिल्ली-हरिद्वार रिज, महेंद्रगढ़-देहरादून उपसतही फॉल्ट, मुरादाबाद फॉल्ट, सोहना फॉल्ट, ग्रेट बाउंड्री फॉल्ट, दिल्ली-सरगोधा रिज, यमुना नदी लीनियामेंट आदि। हमें अवश्य समझना चाहिए कि हिमालयी भूकंपीय क्षेत्र, जहां भारतीय प्लेट
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यूरेशियन प्लेट के साथ टकराते हैं और हिमालयी वेज के नीचे धकेले जाते हैं, एक दूसरे के विरुद्ध प्लेटों की अपेक्षाकृत आवाजाही के कारण प्लेट बाउंड्री पर तनाव ऊर्जा संग्रहित हो जाती है जिससे क्रस्टल छोटा हो जाता है और चट्टानों का विरुपण होता है। ये ऊर्जा भूकंपों के रूप में कमजोर जोनों एवं फाल्टों के जरिये जारी होती है जो सूक्ष्म (8.0)भूकंप के रूप में आ सकते हैं जो निर्मुक्त ऊर्जा की मात्रा के अनुरूप परिभाषित होती है। छोटी तीव्रता के भूकंप अक्सर आते रहते हैं लेकिन अधिक तीव्रता के भूकंप दुर्लभ से बेहद दुर्लभ होता है। बड़े भूकंपों की वजह से ही संरचनाओं एवं संपत्तियोंए दोनों को भयानक नुकसान होता है।
हिमालय से लेकर दिल्ली-एनसीआर तक भूकंपों का प्रभाव:
हिमालयर वृत्त खंड में 1905 में कांगरा का आइसोसेसमल (7.8), 1934 में बिहार-नेपाल (8.0), 1950 में असम (8.6), 2005 में मुजफ्फराबाद (6.7) और 2015 में नेपाल (7.8) के भूकंप उत्तर में मेन सेंट्रल थ्रस्ट (एमसीटी) तथा दक्षिण में हिमालयन फ्रंटल थ्रस्ट (एचएफटी) से घिरे हुए हैं। ये भूकंप एक द्विध्रुवीय सतह पर खिसकने का परिणाम हैं जोकि थ्रस्टिंग भारतीय प्लेट के नीचे के संपर्क और हिमालयी वेज पर निर्भर है जो एमसीटी के नीचे 16-27 किमी गहराई से दक्षिण दिशा में फैली हुई है जोकि एफएचटी के रूप में एमसीटी से 50-100 किमी की दूरी पर है।
बड़े भूकंपों के कारण टूटे हुए क्षेत्र हिमालयी आर्क के साथ साथ अंतराल प्रदर्शित करते हैं जिन्होंने लंबे समय से बड़े भूकंपों का अनुभव नहीं किया है और जिनकी पहचान बड़े भूकंपों के लिए भविष्य के संभावित जोनों के रूप में की जाती है। हिमालय में तीन प्रमुख भूकंपीय अंतरालों की पहचान की गई है:
1950 में असम भूकंप एवं 1934 में बिहार-नेपाल भूकंप के बीच में असम अंतराल, 1905 में कांगरा भूकंप और 1975 में किन्नूर भूकंप के बीच में कश्मीर अंतराल तथा 1905 में कांगरा भूकंप और 1934 में बिहार-नेपाल भूकंप के बीच में 700 किमी लंबा कंद्रीय अंतराल। हिमालय का समस्त उत्तर पश्चिम-उत्तर पूर्व क्षेत्र सर्वोच्च भूकंपीय संभावित जोन ट और प्ट के तहत आता है जहां बड़ा से लेकर भयानक भूकंप आ सकता है।
पड़ोस के फॉल्ट एवं रिज:
दिल्ली-एनसीआर के उत्तर में गंगा के जलोढ़क मैदानी क्षेत्र में बड़ी तलछट्टीय मुटापापन, कई सारे फॉल्ट, रिज, हिमालयी आर्क में रेखीय अनुप्रस्थ हैं। फिर, दिल्ली-एनसीआर हिमालयी आर्क से 200 किमी की दूरी पर है। इसलिए, हिमालयी भूकंपीय क्षेत्र में एक बड़ा भूकंप दिल्ली-एनसीआर के लिए भी खतरा बन सकता है। केंद्रीय भूकंपीय अंतराल और दिल्ली-एनसीआर के उत्तर में स्थित गढ़वाल हिमालय में 1991 में उत्तरकाशी भूकंप (6.8), 1999 में चमोली भूकंप (6.6) एवं 2017 में रुद्रप्रयाग भूकंप (5.7) आ चुका है और यहां एक बड़ा भूकंप आने की आशंका है। ऐसा परिदृश्य उत्तर भारत और दिल्ली-एनसीआर पर एक गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
सावधानियां:
दिल्ली-एनसीआर में एवं आसपास भू वैज्ञानिक अध्ययनों का पूरी तरह उपयोग करते हुए उपसतही संरचनाओं, ज्यामिति तथा फाल्टों एवं रिजों के विन्यास की जांच की जानी है। चूंकि नरम मृदाएं संरचना के बुनियादों को सहारा नहीं दे पातीं, भूकंप प्रवण क्षेत्रों में बेडरौक या सख्त मृदा की सहारा वाली संरचनाओं में कम नुकसान होता है। इस प्रकार, नरम मृदाओं की मुटाई के बारे में जानने के लिए मृदा द्रवीकरण अध्ययन किए जाने की भी आवश्यकता है। सक्रिय फाल्टों को निरुपित किया जाना है और जीवनरेखा संरचनाओं या अन्य अवसंरचनाओं को नजदीक के सक्रिय फाल्टों से बचा कर रखे जाने और उन्हें भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के मार्गदर्शी सिद्धांतों के अनुरूप निर्माण किए जाने की आवश्यकता है। महत्वपूर्ण संरचना के लिए आईएमडी द्वारा दिल्ली-एनसीआर के लिए हाल के सूक्ष्म जोनोशन अध्ययन के परिणाम पर विचार किए जाने कर आवश्यकता है।
आम लोगों को संदेश:
भूकंपों का पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता लेकिन Vएवं IV के सर्वोच्च संभावित जोनों में 6 एवं अधिक की तीव्रता के बड़े से बहुत बड़े भूकंपों की एक संभाव्यता है जिसके तहत समस्त हिमालयी और दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र आता है। जान माल के नुकसान को न्यूनतम बनाने का एकमात्र समाधान भूकंप के खिलाफ प्रभावी तैयारी है। जापान जैसे देशों ने इसे साबित कर दिया है जहां भूकंप एक सामान्य घटना है, फिर नुकसान बहुत ही कम होता है। वहां वार्षिक मॉक-ड्रिल एक नियमित फीचर है। इसकी सफलता की कुंजी लोगों की भागीदारी, सहयोग और जागरुकता है।
कुछ सावधानियां एवं तैयारियां इस प्रकार हैं
क. भूकंप से पहले
1. भूकंप मॉक-ड्रिल/भवनों/घरों का निर्माण
वार्षिक रूप से भूकंप का मॉक-ड्रिल करें
नए भवनों में भूकंप-अनुकूल निर्माण समावेशित करें तथा पुरानी संरचनाओं में पुनःसंयोजन करें
2. एक व्यक्ति विशेष के रूप में तैयारियां (एक परिवार या सोसाइटी में)
एक साथ मिल कर बैठें एवं पड़ोसियों, सोसाइटी/कोलोनी, नजदीकी संबंधियों एवं मित्रों, आपातकालीन स्थिति के लिए मोबाइल नंबरों की रूपरेखा प्रस्तुत करें
एक बैकअप सप्लाई किट तैयार करें जिसमें खाना ( बिस्कुट के पैकेट आदि), पानी, दवाएं एवं प्राथमिक चिकित्सासप्लाइज, फ्लैश लाइट, अनिवार्य कपड़े तथा व्यक्तिगत प्रसाधन सामग्री शामिल हों।
फर्स्ट एड किट को नियमित रूप से अपडेट करें
कम से कम दो पारिवारिक बैठक स्थलों का चयन करें जिनकी पहचान करना, खोलना आसान हो तथा सुगम्य स्थान हो जहां आसानी से पहुंचा जा सकता है
आश्रय, किचन तथा फस्र्ट एड के लिए एकत्र होने के लिए सोसाइटी/कोलोनी/स्ट्रीट में एक समान स्थान की पहचान करें

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Jun 20 (17:17)
Rang De Basanti^   45759 blog posts
Re# 4654175-2            Tags   Past Edits
Part-3/
ख. भूकंप के दौरान
शांत रहें, क्योंकि धरती का हिलना एक मिनट से भी कम होता है
इनडोर: अंदर रहें-डक, कवर और होल्ड। अपने आप कको मजबूत फर्नीचर के नीचे रखें, जहां तक हो सके, अपने सर और शरीर के ऊपरी हिस्से को कवर कर रखें। फर्नीचर पर पकड़ बनाये रखें। अगर आप मजबूत फर्नीचर के नीचे नहीं छुप सकते हैं तो किसी
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भीतरी दीवार या आर्क की ओर चले जाएं और दीवार की तरफ पीठ करके बैठें, अपने घुटनों को अपनी छाती तक मोड़ लें और अपने सर को ढक लें।
अपने को दर्पणों और खिड़कियों से दूर रखें
धरती हिलने के दौरान भवन से बाहर न निकलें
आउटडोर: सभी संरचनाओं, विशेष रूप से भवनों, पुलों एवं सर के ऊपर से गुजरती बिजली की लाइनों से दूर खुले क्षेत्र में भागें।
ड्राइव करने के दौरान: तत्काल सड़क के किनारे खासकर सभी संरचनाओं, विशेष रूप से पुलों, ओवरपास, सुरंगों एवं सर के ऊपर से गुजरती बिजली की लाइनों से दूर किसी खुले क्षेत्र में रोकें। वाहन के भीतर जितना संभव हो, नीचे झुके रहें।
अगरमलबेमेंफंसे:
माचिस/लाइटर न जलायें
अनावश्यक रूप से शरीर को न हिलायें और धूल न झाड़ें, इससे आपको सांस लेने में कठिनाई पैदा हो सकती है
अगर संभव है तो रुमाल/कपड़े से अपने चेहरे को ढक लें
किसी पाइप/दीवार आदि को हिट करें जिससे कि बचाव दल आपकोढूंढ सके
अनावश्यक रूप से न चिल्लायें क्योंकि इससे आप थक जाएंगे और इस क्रिया के द्वारा सांस लेने के दौरान आपके शरीर के भीतर धूल/गैस चली जाएगी।
ग. भूकंप के बाद
शांत बने रहें
सवधानी से आगे बढ़ें और आपके ऊपर और आसपास अस्थिर वस्तुओं तथा अन्य नुकसानदायक वस्तुओं की जांच करें
अपने शरीर की जांच करें कि कोई चोट तो नहीं लगी
अपने आसपास के लोगों की सहायता करें और उन्हें प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करायें।
गैस, पानी और बिजली की लाइनों की जांच करें। अगर कोई रिसाव हुआ है या रिसाव की आशंका है तो मेन स्विच को बंद करें, अगर आपाके गैस की महक या आवाज आ रही है और उसे बंद नहीं कर सकते तो तुरंत वहां से निकल लें। अधिकारियों को लीक की जानकारी दें।
ध्वस्त भवनों से दूर रहें।
आपातकालीन सूचनाओं तथा अतिरिक्त सुरक्षा निर्देशों के लिए रेडियो/टीवी सुनें।
घ. तैयार भंडार:
कम से कम 7 दिनों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए घर पर पर्याप्त भंडार रखें
निकासी के दौरान वस्तुओं के साथ एक आपदा आपूर्ति किट को इकट्ठा करें। इन स्टॉक्स को बैकपैक, डफल बैग या कवर्ड ट्रैश कंटेनरों जैसे मजबूत, आसानी से ले जा सकने कंटेनरों में भंडारित करें।
अन्य यूटिलिटी एवं नोट प्वाइंट:
पानी एवं भोजन की सात दिनों की आपूर्ति जो खराब नहीं होगी
प्रति व्यक्ति कपड़े तथा फुटवियर का एक चेंज तथा प्रति व्यक्ति एक कंबल या स्लीपिंग बैगएक प्राथमिक चिकित्साकिट जिसमें आपके परिवार के लिए अनुशंसित दवायें हों
बैटरी से चलने वाला रेडियों, फ्लैश लाइट तथा कई अतिरिक्त बैटरियां सहित इमर्जेंसी टूल्स
नवजातों, बुजुर्गों या दिव्यांग परिवारजनों के लिए विष्शिष्ट वस्तुएं तथा सैनिटेशन सप्लाइज
दरवाजे की ऊंचाई से ऊपर कोई भारी वस्तु न रखें
बल्ब/लाइट/लैंप के नीचे सर रख कर न सोयें
( वाडिया हिमालयी भूविज्ञान संस्थान, देहरादून के निदेशक डा कलाचंद सैन दिल्ली एनसीआर में भूकंपों से संबंधित प्रश्ननों के उत्तर देते हैं)
ईमेल: kalachandsain7@gmail.com
***
एसजी/एएम/एसकेजे
(रिलीज़ आईडी: 1632610) आगंतुक पटल : 82
May 16 (19:56) दादरी रेलवे स्टेशन से प्रवासी मजदूरों को लेकर श्रमिक स्पेशल ट्रेन बिहार के लिए रवाना (www.thestartmagazine.com)
New/Special Trains
NCR/North Central
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News Entry# 408099  Blog Entry# 4629214   
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May 16 2020 (19:57)
Station Tag: Dankaur/DKDE added by Saurabh®^~/1294142

May 16 2020 (19:57)
Station Tag: Dadri/DER added by Saurabh®^~/1294142
Stations:  Dadri/DER   Dankaur/DKDE  
बिहार के रहने वाले मजदूरों को उनके घर भेजने के उद्देश्य से शनिवार को दादरी रेलवे स्टेशन से पहली ट्रेन दोपहर करीब एक बजे रवाना हुई। इस ट्रेन में 968 यात्री दादरी से बिहार के औरंगाबाद के लिए रवाना हुए। इस ट्रेन में 1500 प्रवासी मजदूरों को बिहार जाना था लेकिन कुछ मजदूर पहले ही विभिन्न साधनों से बिहार के लिए निकल गए। इस वजह से 522 मजदूरों की सीटें ट्रेन में खाली रही। इस ट्रेन में 22 बोगियां हैं।
वहीं दनकौर रेलवे स्टेशन से बिहार के बक्सर के लिए दूसरी ट्रेन रवाना हो रही है। इस ट्रेन में भी 1500 के बजाय एक हजार के करीब श्रमिक सवार हैं। जिला प्रशासन ने इस ट्रेन में भी 1500 श्रमिकों को जाने के
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लिए अनुमति दी थी लेकिन कुछ श्रमिक पहले ही विभिन्न साधनों से या तो बिहार के लिए निकल गए या अब वे वापस जाना नहीं चाह रहे हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार की पहल पर प्रवासी मजदूरों को सुरक्षित उनके घर तक पहुंचाने के लिए शनिवार से चार श्रमिक विशेष ट्रेनें चलायी गयी है। जन सुनवाई पोर्टल पर पूर्व में पंजीकरण कराने वाले श्रमिकों को ही इन विशेष ट्रेनों से बिहार भेजा जा रहा है। जेवर के तहसीलदार दुर्गेश सिंह ने बताया कि लॉकडाउन की वजह से गौतम बुद्ध नगर में फंसे श्रमिकों को ट्रेन से उनके गृह राज्य भेजने के लिए जिला प्रशासन ने 12 केंद्र बनाए थे। एक केंद्र पर 10 बसों का इंतजाम किया गया। प्रत्येक बस में 25 से 28 मजदूरों को बैठाकर रेलवे स्टेशन भेजा गया।
सिंह ने बताया कि रेलवे स्टेशन पहुंचने पर सभी श्रमिकों की जांच की गई। इसके लिए स्टेशन पर दो डॉक्टरों सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे। प्रवासी श्रमिकों को सफर के दौरान किसी तरह की परेशानी ना हो इसके लिए प्रत्येक बोगी में एक सुपरवाइजर की नियुक्ति की गई है। ट्रेन के रवाना होने से पहले प्रवासी श्रमिकों को प्रशासन ने खाने-पीने का सामान उपलब्ध कराया। ट्रेनों के रवाना होने से पहले नोएडा प्राधिकरण के जन स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ट्रेनों को सैनिटाइज किया।
प्रवासियों से जनसुनवाई पोर्टल में रजिस्ट्रेशन कराने की अपील की गई है
नई दिल्ली: नोएडा-ग्रेटर नोएडा में रहने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए अच्छी खबर है. 16 मई से उनके लिए भी चार स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं. इन ट्रेनों को दादरी और दनकौर रेलवे स्टेशनों से चलाया जाएगा. यह जानकारी नोएडा के डीएम की ओर से दी गई है. दरअसल जो ट्रेनें इस समय दिल्ली से चलाई जा रही हैं उनको पकड़ने के लिए नोएडा में रहने वाले मजदूरों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि अभी तक दिल्ली-नोएडा के बीच वाहनों की आवाजाही शुरू नहीं की गई है. जिसकी वजह से इन प्रवासी मजदूरों को खासी दिक्कतो का सामना करना पड़ रहा था. नोएडा की
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डीएम की ओर जारी एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक पहले चरण में बिहार जाने वाले प्रवासियों के लिए ट्रेन चलेगी और इसमें उन्हीं यात्रियों को जगह दी जाएगी जिन्होंने जन सुनवाई पोर्टल में अपना रजिस्ट्रेशन कराया है. इसके साथ ही जिन लोगों ने अपना रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है उनसे भी इसे कराने की अपील की गई है. विज्ञप्ति में कहा गया है कि पंजीकरण के आधार पर ट्रेन के टिकट की जानकारी मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से भेज दी जाएगी. 
16 मई से चलने वाली ट्रेनें जानकारी
दादरी से औरंगाबाद, सुबह 11 बजे.
दनकौर से बक्सर, दोपहर 12 बजे.
दादरी से रोहतास, शाम 3 बजे.
दनकौर से सीवान, शाम 4 बजे.
आपको बता दें कि बिहार में अब तक डेढ़ लाख से अधिक प्रवासी मज़दूर श्रमिक स्पेशल ट्रेन से लौटकर आ चुके हैं. इनकी संख्या अगले एक हफ़्ते में तीन लाख से अधिक हो जायेगी. लेकिन राज्य सरकार की मुश्किल है कि पिछले चार दिनों के दौरान जो कोरोना संक्रमित पाये गये हैं उनमें से  ज़्यादातर लोग ऐसे ही बिहार लौटे मज़दूर हैं.
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