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RailFans - हमको देख देख दुनिया जले, हमको ज़माने से क्या

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Tue Oct 19 06:01:56 IST
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Large Station Board;
Entry# 1060623-0
Close-up; Platform Pic; Large Station Board;
Train changing Description
Entry# 2364794-0


MZR/Murtizapur Junction (4 PFs)
मूर्तिजापूर जंक्शन     मुर्तिजापुर जंक्शन

Track: Double Electric-Line

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Jn. Pt. - BD/AK/ELP/YTL, Tangachuk Rd, Murtajapur
State: Maharashtra

Elevation: 303 m above sea level
Zone: CR/Central   Division: Bhusaval

No Recent News for MZR/Murtizapur Junction
Nearby Stations in the News
Type of Station: Junction
Number of Platforms: 4
Number of Halting Trains: 61
Number of Originating Trains: 0
Number of Terminating Trains: 0
Rating: 3.1/5 (9 votes)
cleanliness - excellent (2)
porters/escalators - good (1)
food - poor (1)
transportation - average (1)
lodging - average (1)
railfanning - poor (1)
sightseeing - average (1)
safety - good (1)
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Station News

Page#    Showing 1 to 7 of 7 News Items  
Apr 13 (12:07) १०३ वर्षांपासून शकुंतला रेल्वेचा लोहमार्ग इंग्रजांकडेच; कधी तुटणार गुलामीच्या बेड्या? (www.esakal.com)
Commentary/Human Interest
CR/Central
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News Entry# 448517  Blog Entry# 4937845   
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Apr 13 2021 (12:07)
Station Tag: Murtizapur Junction NG/MZRN added by महाँकाल एक्सप्रेस/1084688

Apr 13 2021 (12:07)
Station Tag: Murtizapur Junction/MZR added by महाँकाल एक्सप्रेस/1084688

Apr 13 2021 (12:07)
Station Tag: Achalpur/ELP added by महाँकाल एक्सप्रेस/1084688

Apr 13 2021 (12:07)
Station Tag: Yavatmal/YTL added by महाँकाल एक्सप्रेस/1084688
देशाला इंग्रज राजवटीतून स्वातंत्र्य मिळून ७४ वर्षांचा कालावधी उलटला आहे. अजूनही या देशात इंग्रजांचा हुकूम चालत असेल हे सांगूनही खरे वाटणार नाही. मात्र, तत्कालीन वऱ्हाड प्रातांची शान असलेली शकुंतला रेल्वे मात्र, अजूनही इंग्रजांच्याच ताब्यात आहे.
वाशीम  ः देशाला इंग्रज राजवटीतून स्वातंत्र्य मिळून ७४ वर्षांचा कालावधी उलटला आहे. अजूनही या देशात इंग्रजांचा हुकूम चालत असेल हे सांगूनही खरे वाटणार नाही. मात्र, तत्कालीन वऱ्हाड प्रातांची शान असलेली शकुंतला रेल्वे मात्र, अजूनही इंग्रजांच्याच ताब्यात आहे. कधीकाळी पांढऱ्या सोन्याची राणी म्हणून ओळख असलेला हा लोहमार्ग आता भंगारात गेला असून, या गरीबरथाचा कायापालट करण्याचे साकडे खासदार भावना गवळी यांनी रेल्वेमंत्र्यांना घातले आहे. ‘वन टाईम सेटलमेंट’ नुसार हा व्यवहार होणार असून शकुंतलेच्या पायातील गुलामीच्या बेड्या निखळण्याची आशा निर्माण झाली आहे.
विदर्भातील
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पांढरे सोने वाहून नेण्याकरिता ब्रिटीश शासनाने सन १९१३ साली यवतमाळ ते मूर्तिजापूर रेल्वेची निर्मिती केली होती. ‘गरीबांचा रथ’ म्हणून ओळख असलेल्या या रेल्वे गाडीला ‘शकुंतला’ नाव मिळाले होते. देशाला स्वातंत्र्य मिळाले, मात्र या रेल्वेमार्गाची मालकी इंग्लंडच्या ‘निक्सन अ‍ॅण्ड निक्सन’ कंपनीकडेच राहली. प्रचंड दुरवस्था झाल्याने ही रेल्वे बंद केली गेली.
या रेल्वेमार्गाचे मीटर गेजमधून ब्रॉडगेजमध्ये रूपांतर व्हावे याकरिता रेल्वेमंत्र्यांकडे खासदार भावना गवळी यांनी सन २००६-२००७ पासून मागणी लावून धरली होती. सततच्या पाठपुराव्यामुळे यवतमाळपासून मध्य रेल्वे मार्गावरील मूर्तिजापूरला जोडणाऱ्या ११३ किलोमीटर अंतर असलेल्या या रेल्वे मार्गाच्या गेज परिवर्तनाकरिता तत्कालीन रेल्वेमंत्री सुरेश प्रभू यांनी २१४७.४४ कोटी मंजूर केले होते.
सन १९१३ पासून आजही ब्रिटीशांच्या ‘निक्सन’ कंपनीची मालकी ‘शकुंतला’ रेल्वे गाडीवर असल्यामुळे अडचणी निर्माण होत गेल्या. खासदार भावना गवळी यांनी रेल्वे मंत्र्यांना व रेल्वे बोर्डाच्या अधिकाऱ्यांना वारंवार भेटून शकुंतलेची इंग्रजांची ब्रिटीश कंपनीची असलेली मालकी काढण्याकरिता पाठपुरावा केला होता.
खासदार भावना गवळी यांनी नुकतीच रेल्वेमंत्री पियुष गोयल यांची भेट घेऊन ‘निक्सन’ कंपनीच्या मागणीचा एकत्रित तोडगा काढून शकुंतलेचा प्रश्‍न निकाली काढण्याची मागणी रेटून धरली होती. रेल्वे मंत्रालयाने यावेळी २१४७.४४ कोटी रुपयांची तरतूद केलेल्या या रेल्वे ब्रॉडगेजला कुठलीही जमीन संपादन करण्याची गरज नसल्याने ‘निक्सन’ कंपनीची मालकी या मार्गावरून काढण्यासाठी रेल्वे मंत्र्यांनी सकारात्मकता दाखविली आहे.(संपादन - विवेक मेतकर)
हावड़ा से मुंबई के लिए चलने वाली ट्रेन 02260 गीतांजली एक्सप्रेस का ब्रेकवान मंगलवार को भंडारा और अकोला के बीच मुर्तजापुर के पास लगभग सुबह 11 बजे डिरेल हो गया। ब्रेकवान डिरेल होने से झटके के साथ ट्रेन की गति बदल गई।
चालक व गार्ड ने सूझबूझ दिखा ट्रेन को रोका व सूचना रेलवे कंट्रोल को दी। मिली जानकारी के मुताबिक ब्रेकवान को काटकर अलग किया। इसके बाद चार घंटे लेट से ट्रेन गंतव्य के लिए रवाना हुई। सूत्रों के मुताबिक घटना से कोई कैजुअल्टी नहीं हुई है। ट्रेन में टाटानगर से भी कई यात्री सवार हुए थे। सभी सुरक्षित है।
Dec 07 2020 (09:17) अमरावतीशकुंतला रेल नवीनीकरण की बजाए की गयी बंद -मुर्तिजापुर-यवतमाल-अचलपुर (www.enavabharat.com)
IR Affairs
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News Entry# 427453  Blog Entry# 4804836   
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Dec 07 2020 (09:17)
Station Tag: Achalpur/ELP added by Irtaqua Akhter/425313

Dec 07 2020 (09:17)
Station Tag: Yavatmal/YTL added by Irtaqua Akhter/425313

Dec 07 2020 (09:17)
Station Tag: Murtizapur Junction/MZR added by Irtaqua Akhter/425313
मुर्तिजापुर. शकुंतला रेलगाड़ी की एक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है और इसका नवीनीकरण करने की बजाय, इसके अस्तित्व पर हमला किया जा रहा है. एक ओर मुर्तिजापुर-यवतमाल-अचलपुर रेल मार्ग का ब्रॉड गेज में परिवर्तन करने के लिए लगनेवाले खर्च का 50 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार द्वारा उठाए जाने के संदर्भ में रेल मंत्रालय ने पत्राचार किया. इसके बावजूद कोई प्रतिसाद न मिलने से  ‘शकुंतला’ नाम से परिचित इस रेलगाड़ी का नवीनीकरण कब किया जाएगा इस ओर सभी की नजरे लगी हुई है.
उसी तरह इस मार्ग को बंद करने का प्रयास भी पिछले कई वर्षों से शुरू है. शकुंतला रेलवे की फेरिया बंद की गई है. तब से ही इस संदर्भ में अलग विचार की आशंका व्यक्त की जा रही थी. इस संदर्भ में
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जनप्रतिनिधियों द्वारा भी आवाज उठायी नहीं गयी है. इन रेल मार्गों की ओर रेल प्रशासन द्वारा विभिन्न कारण को सामने रखकर इस ओर अनदेखी की है. जिससे इस क्षेत्र का विकास नहीं हो सका है. रेल विभाग द्वारा सन 1914 में अंग्रेजों ने इस रेल को शुरू करवाया था.
विकास की जगह रेलवे विभाग द्वारा मुर्तिजापुर रेलवे स्टेशन पर पानी भरने की सुविधा को बंद कर इसे बडनेरा रेलवे स्टेशन पर ले जाया गया. इसी तरह कई सुविधाओं को धीरे-धीरे स्थानांतरित किया गया. डाक, माल, पार्सल सुविधाओं और लोको शेड आदि सुविधाएं बंद की गयी. लोकसभा की याचिका समिति ने इस रेलवे लाइन के ब्रॉड गेज परिवर्तन की सिफारिश की थी. रेलवे प्रशासन ने जुलाई 2005 और अक्टूबर 2008 में इस मार्ग का प्रारंभिक इंजीनियरिंग-परिवहन सर्वेक्षण (पीइटीएस) किया. समय-समय पर, रेलवे ने वित्तीय प्रावधान और यात्रियों की संख्या की ओर इशारा करते हुए इस मार्ग के रूपांतरण की उपेक्षा की.
रेलवे ने इसे ब्रॉड गेज में परिवर्तित करने के बजाय मार्ग को बंद करना शुरू कर दिया. इस मार्ग के आठ स्टेशन भी बंद कर दिए गए. हालांकि, यात्री दरों में वृद्धि के बावजूद ट्रेन सेवा किसी तरह से शुरू थी. शकुंतला रेलवे लाइन का निर्माण अंग्रेजों ने वर्हाड़ के कपास और विदर्भ से उच्च गुणवत्ता वाले सागौन को सीधे मैनचेस्टर परिवहन के लिए किया था.
उन्होंने भौगोलिक, पर्यावरणीय, पर्यटन और वाणिज्यिक महत्व की जांच के बाद ही इस मार्ग को चुना होगा. इसलिए अंग्रेजों को तब यह एहसास हुआ था कि यह मार्ग कितना उपयोगी है, लेकिन स्थानीय लोगों को इसके महत्व का एहसास नहीं हो रहा है. जिससे यह बात विदर्भ के लोगों का दुर्भाग्यपूर्ण है, की शकुंतला का? इस बात को लेकर लोगों में चर्चाएं शुरू हैं.
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Feb 07 2018 (22:07) भारत के इस हिस्से में आज भी है अग्रेजों का कब्जा, देना पड़ता है करोड़ों का लगान (punjab.punjabkesari.in)
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News Entry# 328893  Blog Entry# 3083758   
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Feb 07 2018 (22:07)
Station Tag: Murtizapur Junction/MZR added by OM SAI RAM ਆਦਿਤਯ ਕੁਮਾਰ~/1462045

Feb 07 2018 (22:07)
Train Tag: Shakuntala NG Passenger/52137 added by OM SAI RAM ਆਦਿਤਯ ਕੁਮਾਰ~/1462045
एक तरफ देश बुलेट ट्रेन के सपने देख रहा है और हमारे देश का रेल बजट लाखों-करोड़ों का है। वहीं दूसरी तरफ रेल की बात करें तो इसी देश में शकुंतला एक्सप्रैस जैसी ट्रेन भी चल रही है। शकुंतला एक्सप्रैस ऐसी रेल लाइन पर चलती है, जिसका मालिकाना हक भारतीय रेलवे के पास नहीं है। ब्रिटेन की एक निजी कंपनी इसका संचालन करती है। नैरो गेज (छोटी लाइन) के इस ट्रैक का इस्तेमाल करने वाली इंडियन रेलवे हर साल 1 करोड़ 20 लाख रुपए की रायल्टी ब्रिटेन की इस कंपनी को देती है।
इस रेल ट्रैक पर आज भी शकुंतला एक्सप्रैस के नाम से सिर्फ एक पैसेंजर ट्रेन चलती है। अमरावती से मुर्तजापुर के 189 किलोमीटर के इस सफर को यह
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6 से 7 घंटे में पूरा करती है। अपने इस सफर में शकुंतला एक्सप्रैस अचलपुर, यवतमान समेत 17 छोटे-बड़े स्टेशनों पर रूकती है। 100 साल पुरानी 5 डिबबों की इस ट्रेन को 70 साल तक स्टीम का इंजन खींचता था। इसे 1921 में ब्रिटेन के मैनचेस्टर में बनाया गया था। 15 अप्रैल 1994 को शकुंतला एक्सप्रैस के स्टीम इंजन को डीजल इंजन से रिप्लेस कर दिया गया। इस रेल रूट पर लगे सिगनल आज भी ब्रिटिशकालीन हैैं। इनका निर्माण इंगलैंड के लिवरपूल में 1895 में हुआ था। 7 कोच वाली इस पैसेंजर ट्रेन में प्रतिनिद एक हजार से ज्यादा लोग ट्रेवल करते हैं।
दरअसल अमरावती का इलाका अपने कपास के लिए पूरे देश में फेमस था। कपास की मुंबई पोर्ट तक पहुंचाने के लिए अंग्रेजों ने इसका निर्माम करवाया था। 1903 में ब्रिटिश कंपनी क्लिक निक्सन की ओर से शुरु किया गया। रेल ट्रैक को बिछाने का काम 1916 में जाकर पूरा हुआ। 1857 में स्थापित इस कंपनी को आज सैंट्रल प्रोविन्स रेलवे कंपनी के नाम से जाना जाता है। ब्रिटिशकाल में प्राइवेट फर्म ही रेल नैटवर्क को फैलाने का काम करती थी। 1951 में भारतीय रेल का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया। सिर्फ यही रूट भारत सरकार के अधीन नहीं था। इस रेल रूट के बदले भारत सरकार हर साल कंपनी को 1 करोड़ 20 लाख की रायल्टी देती है।
खस्ताहाल है ट्रैक
क्योंकि यह आज भी इंडियन रेलवे के अधीन नहीं है तो किसी भी बजट में इस रेल लाइन या इस पर चलने वाली ट्रेन के बारे में सोचा नहीं जाता है और न ही आज तक किसी सरकार ने इसे इंडियन रेलवे के अंतगर्त करने की योजना तैयार की है। यहीं कारण है कि हर साल पैसा देने के बावजूद यह ट्रैक बेहद जर्जर हो चुका है। पिछले तकरीबन 60 साल से इसकी मुरम्मत भी नहीं हुई है। इस पर चलने वाले जे.डी.एम. सीरिज के डीजल लोको इंजन की अधिकतम गति 20 किलोमीटर प्रति घंटे रखी जाती है। इस सैंट्रल रेलवे के 150 कर्मचारी इस घाटे के मार्ग को संचालित करने में आज भी लगे हैं।
दो बार बंद भी हुई रेल
इस ट्रैक पर चलने वाली शकुंतला एक्सप्रैस पहली बार 2014 में मोदी सरकार आते ही और दूसरी बार अप्रैल 2016 में बंद किया गया था। मगर स्थानीय लोगों की मांग और सांसद आनंद राव के दबाव में सरकार को फिर से इसे शुरु करना पड़ा। सांसद आनंद राव का कहना था कि यह ट्रेन अमरावती के लोगों की लाइफ लाइन है। अगर यह बंद हुई तो गरीब लोगों को बहुत दिक्कत होगी। आनंद राव ने इस नैरो गेज को ब्राड गेज में कन्वर्ट करने का प्रस्ताव भी रेलवे बोर्ड को भेजा है। भारत सरकार ने इस ट्रैक को कई बार खरीदने का प्रयास किया, मगर तकनीकी कारणों से वह संभव नहीं हो सका।

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Feb 08 2018 (14:29)
a2z
A2Z~   17321 blog posts
Re# 3083758-1            Tags   Past Edits
एक तरफ देश बुलेट ट्रेन के सपने देख रहा है और हमारे देश का रेल बजट लाखों-करोड़ों का है। वहीं दूसरी तरफ रेल की बात करें तो इसी देश में शकुंतला एक्सप्रैस जैसी ट्रेन भी चल रही है।
Today along with 20kmph Shakuntala express 160kmph gatimaan express is also speeding on the tracks
Tomorrow 320kmph Bullet trains shall also be speeding on the tracks with Shakuntala and gatimaan
One
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one hand are Mumbai Local trains with 500 paxs sweatily compressed in a coach
On the other hand are luxury trains with royal stay of just 4/8 paxs in a coach.
On one hand a pax travel 500kms in less than 100Rs,
while other have Suvidha of paying 4000 Rs for 500kms.
India is a country of extremes and diversities in all respects
There is a place for all in this great country!!.
Jan 12 2017 (11:30) ‘शकुंतला’ करणार आज विश्राम! (www.lokmat.com)
Commentary/Human Interest
CR/Central

News Entry# 291060   
  Past Edits
Jan 12 2017 (11:30)
Station Tag: Murtizapur Junction/MZR added by ameyambre/16020

Jan 12 2017 (11:30)
Station Tag: Yavatmal/YTL added by ameyambre/16020

Jan 12 2017 (11:30)
Train Tag: Yavatmal - Murtajapur (NG) Passenger/52132 added by ameyambre/16020

Jan 12 2017 (11:30)
Train Tag: Murtajapur - Yavatmal NG Passenger/52131 added by ameyambre/16020
अकोला, दि. ११- कधीकाळी वर्‍हाडवासीयांची लाइफलाइन समजली जाणारी शकुंतला रेल्वे गाडी थकली असून, शंभर वर्षांंपेक्षाही अधिक काळ लोटल्यामुळे जागोजागी ढासळत चाललेला रेल्वे मार्ग आणि वारंवार उद्भवणार्‍या इतर तांत्रिक अडचणींमुळे मूर्तिजापूर-यवतमाळदरम्यान धावणार्‍या लेकुरवाळय़ा 'शकुंतलेला' गुरुवारी एक दिवसाची विश्रांती देण्यात आली आहे.
डीझल इंजिनच्या साहाय्याने धावत असलेल्या 'शकुंतले'ला मूर्तिजापूर ते यवतमाळ हे ११२ कि.मी. अंतर कापण्यासाठी सात तास लागतात. किनखेड, विळेगाव, भडशिवणी, पोही, कारंजा लाड, सोमठाणा, सांगवी, वरूडखेड, दारव्हा, तपोना, लाडखेड, लासिनासह आसपाच्या इतर वर्‍हाडवासीयांना अंगाखांद्यांवर घेऊन धावणार्‍या शकुंतलेचा ११२ वर्षांंहून अधिक काळ उलटला आहे. या कालखंडात एकदाही न बदललेल्या नॅरोगेज रेल्वे मार्गाची अवस्था अत्यंत दयनीय झाली असून, वातावरणातील बदलांमुळे तो जागोजागी जीर्ण झाला आहे. लोहमार्गाच्या दुरुस्तीचे कारण स्पष्ट करीत, गुरुवारी एक दिवसाकरिता ५२१३१/५२१३२ मूर्तिजापूर-यवतमाळ-मूर्तिजापूर ह्यशकुंतलाह्ण पॅसेंजर रद्द करण्यात आली असल्याची माहिती मध्य रेल्वेच्या
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भुसावळ येथील जनसंपर्क अधिकार्‍यांनी ह्यलोकमतह्णला दिली.
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