Spotting
 Timeline
 Travel Tip
 Trip
 Race
 Social
 Greeting
 Poll
 Img
 PNR
 Pic
 Blog
 News
 Conf TL
 RF Club
 Convention
 Monitor
 Admin
 Bookmark
 Rating
 Correct
 Wrong
 Stamp
 HJ
 Vote
 Pred
 @
 FM Alert
 FM Approval
 Pvt
News Super Search
 ↓ 
×
Member:
Posting Date From:
Posting Date To:
Category:
Zone:
Language:
IR Press Release:

Search
  Go  
Full Site Search
  Full Site Search  
 
Tue Dec 11 11:53:33 IST
Home
Trains
ΣChains
Atlas
PNR
Forum
Gallery
News
FAQ
Trips
Login
Feedback
Advanced Search

News Posts by Vcpl Jbp

Page#    Showing 1 to 5 of 757 news entries  next>>
  
पलपल संवाददाता, जबलपुर. रेल संचालन को सुरक्षित बनाने के नाम पर देश भर में विभिन्न रेल जोनों द्वारा जो ट्रेफिक ब्लाक लेकर लगातार ट्रेनों को टर्मिनेट, रद्द व रेग्युलेट किया जा रहा था, उस पर रेलवे बोर्ड खफा है, उसने स्पष्ट कर दिया है कि यात्रियों की समस्याओं व सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जाए, ब्लाक के नाम पर बेवजह ट्रेनों को रद्द, टर्मिनेट व रेग्युलेट नहीं किया जाना चाहिए.
ट्रॉफिक ब्लॉक के नाम पर ताबड़तोड़ तरीके से ट्रेनों को टर्मिनेट, शॉर्ट टर्मिनेट और री-शेड्यूल करने पर रेलवे बोर्ड ने अब कड़ा ऐतराज जताना शुरू कर दिया है. पिछले दो साल से पश्चिम मध्य रेल सहित देश के सभी रेल जोन में ट्रॉफिक ब्लॉक की आंधी आई हुई थी, जिसकी लहर अभी
...
more...
चल रही है, लेकिन अब रेलवे बोर्ड को यात्रियों की परेशानी भी दिखाई देने लगी है. ऐसे ही एक मामले में रेलवे बोर्ड ने जमकर फटकार लगाई है. इससे ऊपर से नीचे तक हड़कंप मच गई.
पहले इन ट्रेनों को पमरे के भोपाल मंडल ने किया था रेग्युलेट
भोपाल रेल डिवीजन प्रशासन ने गत 7 दिसंबर को जानकारी सार्वजनिक करते हुए प्रेस नोट जारी कर ट्रेफिक ब्लॉक के कारण गाड़ी संख्या 51607/51608 बीना-गुना-बीना पैसेंजर को 9 दिसंबर से आगामी माह 6 जनवरी तक के प्रत्येक रविवार के लिए निरस्त कर दिया. इसके साथ ही इस अवधि में प्रत्येक रविवार को गाड़ी संख्या 19167 अहमदाबाद-वाराणसी साबरमती एक्सप्रेस, 19166 दरभंगा-अहमदाबाद साबरमती एक्सप्रेस व 51612 बीना-कोटा पैसेंजर को रेग्युलेट करने के निर्णय की जानकारी दी थी.
रेलवे बोर्ड ने लगाई फटकार, आदेश लिया वापस
रेल सूत्रों के अनुसार ट्रेनों को निरस्त व रेग्युलेट करने का पुथन्ना जैसे ही रेलवे बोर्ड पहुंचा, तो तत्काल समीक्षा शुरू की गई. रेलवे बोर्ड में समीक्षा होने पर पाया गया कि इन ट्रेनों को निरस्त व रेग्युलेट करने की कोई जरूरत नहीं. इसके बगैर भी ट्रेफिक ब्लॉक लेकर काम कराया जा सकता है. इसके बाद रेलवे बोर्ड ने इस मामले को काफी गंभीरता से लेते हुए जहां जमकर फटकार लगाई, वहीं ट्रेनों को निरस्त व रेग्युलेट करने के फैसले का नकारते हुए अनुमति देने से इंकार कर दिया. फटकार से हड़कंप मच गई और अगले ही दिन आनन-फानन तरीके से भोपाल रेल डिवीजन प्रशासन ने फिर प्रेस नोट जारी कर जानकारी दी कि 7 दिसंबर को जारी प्रेस नोट को निरस्त माना जाए और न ही कोई ट्रेन निरस्त की जाएगी और न ही रेग्युलेट होगी.
आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में
जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य
खबर : चर्चा में
1. RBI के खिलाफ आजादी के बाद पहली बार सरकार ने किया विशेष शक्ति का इस्तेमाल
2. CM योगी का राम मंदिर पर बड़ा बयान- धैर्य रखें, दिवाली पर खुशखबरी दूंगा
3. मध्यप्रदेश स्थापना दिवस विशेष...देखें हैं रंग हजार
4. न्यूनतम वेतन पर 'आप' की जीत, दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर SC ने लगाई रोक
5. सार्वजनिक वाहनों में अब जरूरी होगा लोकेशन ट्रेकिंग एवं आपात बटन
6. 50 पैसे का ये दुर्लभ सिक्का आपको दिला सकता है 51 हजार 500 रुपए, जानें कैसे
7. ईज ऑफ डुइंग बिजनेस: भारत 23 पायदान की छलांग लगा 100 से पहुंचा 77 वें स्थान पर
8. दिवाली पर घर जाने के लिए ऐसे कराएं कन्फर्म तत्काल टिकट
9. MeToo:HC ने खारिज की छानबीन के लिए निर्देश की मांग वाली याचिका
10. भारत में आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित करने एक दशक में 10 करोड़ नए रोजगार की जरूरत
11. मंगलनाथ की भात पूजा सहित इन उपायों से कर्ज संकट कम होता
  
पलपल संवाददाता, जबलपुर. अंग्रेजों के जमाने के रेल इंजिन जो 1926 में बना था, उस इंजिन के साथ सेल्फी लेने इन दिनों पमरे मुख्यालय के जबलपुर स्टेशन के बाहर लोगों में होड़ मची है. जबलपुर स्टेशन के बाहर सर्कुलेटिंग एरिया प्लेटफॉर्म नं. 1 की तरफ रेल प्रशासन के द्वारा सौन्दर्यीकरण किया गया है, जिसके अन्र्तगत पीछे रखे स्टीम लोको इंजन को आगे लाया गया है, साथ ही साथ इसके पास में दोनों ओर फाउंटेन लगाये गये हैं.
स्टेशन पर रखा गया स्टीम इंजन नंबर 718 एफ का निर्माण सन् 1926 में किया गया था, जिसे पंकज के नाम से जाना जाता है, इंजन के साथ ही दोनों तरफ दो रंगीन लाइट से युक्त फाउंनटेन लगाये गये हैं, जिसमें म्यूजिक सिस्टम भी लगा
...
more...
हुआ है. यह फाउंटेन रात में चलते समय अनेक कलर का दिखा देता है, जिससे स्टेशन की सुन्दरता बढ़ जाती हैं, यह म्यूजिक सिस्टम फव्वारा यात्रियों के बीच काफी आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है और इस फव्वारे के म्यूजिक सिस्टम से आम जनता को वहां का वातावरण संगीतमय प्रतीत होता है.
सिग्नल भी लगाया गया
नेरोगेज स्टीम इंजन 718 एफ के सामने सीमाफोर सिंग्नल भी लगाया गया है. इस म्यूजिक सिस्टम फव्वारे को एक छोटे गार्डन में बनाया गया है और चारों तरफ से ग्रील लगाकर सुरक्षित किया गया है.
आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में
जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य
खबर : चर्चा में
1. RBI के खिलाफ आजादी के बाद पहली बार सरकार ने किया विशेष शक्ति का इस्तेमाल
2. CM योगी का राम मंदिर पर बड़ा बयान- धैर्य रखें, दिवाली पर खुशखबरी दूंगा
3. मध्यप्रदेश स्थापना दिवस विशेष...देखें हैं रंग हजार
4. न्यूनतम वेतन पर 'आप' की जीत, दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर SC ने लगाई रोक
5. सार्वजनिक वाहनों में अब जरूरी होगा लोकेशन ट्रेकिंग एवं आपात बटन
6. 50 पैसे का ये दुर्लभ सिक्का आपको दिला सकता है 51 हजार 500 रुपए, जानें कैसे
7. ईज ऑफ डुइंग बिजनेस: भारत 23 पायदान की छलांग लगा 100 से पहुंचा 77 वें स्थान पर
8. दिवाली पर घर जाने के लिए ऐसे कराएं कन्फर्म तत्काल टिकट
9. MeToo:HC ने खारिज की छानबीन के लिए निर्देश की मांग वाली याचिका
10. भारत में आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित करने एक दशक में 10 करोड़ नए रोजगार की जरूरत
11. मंगलनाथ की भात पूजा सहित इन उपायों से कर्ज संकट कम होता
  
पलपल संवाददाता, नई दिल्ली. मात्र 69 दिनों में डीजल इंजिन को इलेक्ट्रिक इंजिन में बदलकर भारतीय रेलवे ने इतिहास रच दिया है. यह कारनामा वाराणसी के डीजल रेल इंजिन कारखाना ने किया है. यहां पर 2600 हॉर्स पावर के डब्लूएजीसी 3 श्रेणी के इंजन को 5 हजार हॉर्स पावर का इलेक्ट्रिक इंजन बनाया गया है.
रेलवे के एक अधिकारी ने कहा कि भारतीय रेलवे के मिशन 100 फीसद विद्युतीकरण और कार्बन मुक्त एजेंडे को ध्यान में रखते हुए डीजल इंजन कारखाना वाराणसी ने डीजल इंजन को नए प्रोटोटाइप इलेक्ट्रिक इंजन में विकसित किया है. इस इंजिन को वाराणसी से लुधियाना भेजा गया है.
इस
...
more...
बदलाव में मात्र ढाई करोड़ का खर्च
रेलवे ने डीजल इंजन का मिड लाइफ सुधार नहीं करने की योजना बनाई है. इसकी जगह इन इंजनों को इलेक्ट्रिक इंजन में बदलने और कोडल लाइफ तक उनका इस्तेमाल करने का फैसला लिया है. रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, केवल ढाई करोड़ रुपये खर्च करके डीजल लोकोमोटिव को इलेक्ट्रिक में बदला गया, जबकि डीजल इंजन का मिड लाइफ सुधार करने में 5-6 करोड़ का खर्च आता है. इस तरह से रेलवे ने आधी लागत पर इलेक्ट्रिक इंजन तैयार किया है. इससे रेलवे का ईधन खर्च बचेगा और कार्बन उत्सर्जन में भी कटौती होगी.
आज का दिन : ज्योतिष की नज़र में
जानिए कैसा रहेगा आपका भविष्य
खबर : चर्चा में
1. RBI के खिलाफ आजादी के बाद पहली बार सरकार ने किया विशेष शक्ति का इस्तेमाल
2. CM योगी का राम मंदिर पर बड़ा बयान- धैर्य रखें, दिवाली पर खुशखबरी दूंगा
3. मध्यप्रदेश स्थापना दिवस विशेष...देखें हैं रंग हजार
4. न्यूनतम वेतन पर 'आप' की जीत, दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर SC ने लगाई रोक
5. सार्वजनिक वाहनों में अब जरूरी होगा लोकेशन ट्रेकिंग एवं आपात बटन
6. 50 पैसे का ये दुर्लभ सिक्का आपको दिला सकता है 51 हजार 500 रुपए, जानें कैसे
7. ईज ऑफ डुइंग बिजनेस: भारत 23 पायदान की छलांग लगा 100 से पहुंचा 77 वें स्थान पर
8. दिवाली पर घर जाने के लिए ऐसे कराएं कन्फर्म तत्काल टिकट
9. MeToo:HC ने खारिज की छानबीन के लिए निर्देश की मांग वाली याचिका
10. भारत में आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित करने एक दशक में 10 करोड़ नए रोजगार की जरूरत
11. मंगलनाथ की भात पूजा सहित इन उपायों से कर्ज संकट कम होता
  
पलपल संवाददाता, जबलपुर. पश्चिम मध्य रेलवे के 50 रेल कर्मचारी सिंगापुर-मलेशिया का भ्रमण कर वापस लौट आए हैं. पहली बार विदेश यात्रा पर रेलवे द्वारा भेजे जाने पर विदेशी दौरे में शामिल सभी रेल कर्मचारियों में गजब का उत्साह नजर आया. कर्मचारियों का कहना था कि रेल प्रशासन को इस तरह के आयोजन लगातार करते रहना चाहिए, ताकि ऐसे सभी कर्मचारी विदेश यात्रा कर सकेें, जो आर्थिक रूप से ऐसी यात्रा एफोर्ड नहीं कर सकते.
उल्लेखनीय है कि पमरे के जबलपुर, भोपाल व कोटा मंडलों के 50 कर्मचारियों का एक दल गत 30 नवम्बर को सिंगापुर-मलेशिया के दौरे पर गया. इस दौरे को रेलवे द्वारा केंद्रीय स्टाफ बेनीफिट फंड के माध्यम से प्रायोजित किया गया था. इस यात्रा का उद्देश्य यह था
...
more...
कि अभी तक इस फंड के माध्यम से रेल कर्मचारियों का दौरा देश के अंदर ही प्रमुख पर्यटन स्थानों पर होता था, किंतु विदेश जाने का अधिकांश कर्मचारियों का सपना, ताउम्र सपना ही रह जाता था, जिस पर रेलवे बोर्ड ने निर्णय लिया कि हर साल स्टाफ बेनीफिट फंड के माध्यम से विदेश यात्रा कराया जाएगा, जिसके बाद पमरे में पहला जत्था गत 30 नवम्बर को दिल्ली से चेन्नई वहां से सिंगापुर-मलेशिया के लिए वायूमार्ग से उड़ान भरा.
विश्व प्रसिद्ध इन पर्यटन स्थानों का रेलकर्मियों ने उठाया लुत्फ
एक सप्ताह के दौरे पर गये दल ने सिंगापुर में प्रथम दिन बस द्वारा 01 दिसम्बर को साइट सीन फिर नाइट सफारी की, 02 दिसम्बर जुरंग बर्ड पार्क एवम बर्ड शो, सी एकवेरियम, मैडम तुसाद म्यूजियम, सेंटोसा आइलैंड, 03 दिसम्बर को यूनीवर्सल स्टूडियो, 04 दिसम्बर बस द्वारा सुबह 09 बजे मलेशिया के लिए प्रस्थान किया, मलेशिया में संसद भवन, ट्विन टावर, किंग रॉयल पैलेस, वाटू केव्स, जेंटिंग हाइलैंड, 06 दिसम्बर को इपो रेलवे स्टेशन जिसे भारतीय रेलवे इंजीनयरों ने 1917 में बनाया था.फिर वाटर थीम पार्क को देखा. उक्त सभी स्थान विश्व प्रसिद्ध हैं और पूरी दुनिया से पर्यटक यहां पर आते हैं.
50 कर्मियों का जत्था गया था विदेश यात्रा
पमरे के महाप्रबंधक अजय विजयवर्गीय की व्यक्तिगत रुचि व पमरे के मुख्य कार्मिक अधिकारी जीएल मीणा के निर्देशन में पमरे के 50 कर्मचारियों के दल के विदेश यात्रा जाना सफल हो सका. इस दल में जबलपुर से 19, कोटा से 15 भोपाल से 16 कुल 50 कर्मचारियों ने विदेश यात्रा की. रेल प्रशासन ने विदेश यात्रा के लिए टूर कम्पनी कॉक्स एंड किंग से कॉंट्रेक्ट किया था. इस पूरे दौरे में कर्मचारियों ने जमकर एंज्वॉय किया. इस दौरे पर सीएसबीएफ कमेटी मेम्बर बीएन शुक्ला, डीपी अग्रवाल, टीएस धाकड़, अशोक दुबे, करतार सिंह, पुरुषोत्तम यादव साथ में रहे. इसके अलावा कैम्पर्स में प्रमुख रूप से नवीन लिटोरिया, सुकन्या शर्मा, रमावती, ममता जैन, इंदिरा महापात्र, मंजू, आलोक रजक, राजदीप ठाकुर, के जी गोस्वामी, मुकेश ज्योतिषी, प्रीतम , राधेश्याम रैकवार, सन्दीप वर्मा, प्रदीप पासवान इत्यादि उपस्थित रहे.

  
887 views
Dec 08 (21:07)
कल हो न हो 😔😔~   1369 blog posts   29 correct pred (54% accurate)
Re# 4081264-1            Tags   Past Edits
फुल मस्ती और सैर सपाटा तो किये ही होंगे ,
वापस आने का मंन तो किया नहीं होगा
  
पलपल संवाददाता, जबलपुर. भारत में स्व-निर्मित पूर्णत: स्वदेशी हाई स्पीड ट्रेन-18 को चलाने के लिए पश्चिम मध्य रेलवे जबलपुर व उत्तर मध्य रेलवे इलाहाबाद के बीच जमकर खींचतान मच गई है. उत्तर रेलवे चाहता है कि इस ट्रेन को नई दिल्ली से वाराणसी के बीच चलाया जाए, वहीं पमरे प्रशासन चाहता है कि इस ट्रेन का संचालन हबीबगंज (भोपाल) से नई दिल्ली के बीच किया जाए.
पमरे के हबीबगंज से इस ट्रेन को चलाने के लिए कई सांसद एकजुट हो गए हैं और आगामी 10 या 11 दिसम्बर को नई दिल्ली में रेलमंत्री पीयूष गोयल से भेंटकर इस ट्रेन को चलाने की मांग करेंगे. वहीं उत्तर-मध्य रेलवे ने इस ट्रेन को चलाने के लिए एक कदम आगे बढ़ाते हुए उसने मुख्य संरक्षा
...
more...
आयुक्त (सीआरएस) से ट्रेन संचालन की अनुमति मांगी है.
बताया जाता है कि रेलमंत्रालय भी चाहता है कि ट्रेन-18 सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेेंद्र मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी से दिल्ली के बीच चलाया जाए और उसका पक्ष पमरे के हबीबगंज से ज्यादा भारी है, क्योंकि बात प्रधानमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र की है, तो अधिकारी दूसरे क्षेत्र के बारे में गंभीर नहीं हैं, लेकिन दूसरी तरफ हबीबगंज से इस ट्रेन को चलाने के लिए कई सांसद मुखर हो गये हैं और वे चाहते हैं कि इस ट्रेन का लाभ मध्य प्रदेश को मिले, इन सांसदों में राज्यसभा सांसद प्रभात झा, भोपाल सांसद आलोक संजर, सागर सांसद लक्ष्मीनारायण यादव, राजगढ़ सांसद रोडमल नागर, होशंगाबाद सांसद राव उदय प्रताप सिंह शामिल हैं, जिन्होंने तय किया है कि वे आगामी 10 या 11 दिसम्बर को नई दिल्ली जाकर रेलमंत्री पीयूष गोयल से मिलेंगे और मांग करेंगे कि देश की सबसे द्रुत गति से चलने वाली इस ट्रेन का सर्वप्रथम संचालन हबीबगंज से ही किया जाए.
उत्तर-मध्य रेलवे ने मांगी सीआरएस की अनुमति.
नयी दिल्ली से वाराणसी के बीच ट्रेन-18 चलाने की कवायद शुरू हो गयी है. इस सेमी हाईस्पीड ट्रेन के लिए कमिश्नर रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) से अनुमति मांगी गयी है. उत्तर मध्य रेलवे ने इस बाबत पत्र भेजा है और जो भी शंकाएं हैं, उनका निवारण किया जा रहा है. अगर सुरक्षा संबंधी अनुमति मिल जाती है तो उम्मीद है कि पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस 25 दिसंबर से इसका परिचालन शुरू होगा. एनसीआर ट्रेन-18 को प्रयाग व फूलपुर के रास्ते चलाने की तैयारी में है. वाराणसी का यही रूट इलेक्ट्रिक इंजन के लिए मुफीद है.
मिली जानकारी के अनुसार नयी ट्रेन सुबह 6.30 बजे नयी दिल्ली से रवाना होगी और आठ घंटे में वाराणसी पहुंचेगी. इलाहाबाद जंक्शन व कानपुर में इसका ठहराव होगा. प्रयागराज के लोगों के लिए यह ट्रेन शताब्दी की तरह होगी. ट्रेन-18 का ट्रायल 180 किमी. प्रति घंटा की रफ्तार से किया जा रहा है, लेकिन इलाहाबाद मंडल में यह ट्रेन अधिकतम स्वीकृत रफ्तार 130 किमी से ही चल सकेगी. राजधानी ट्रेनों के लिए यही अधिकतम स्पीड तय है.
हबीबगंज के पक्ष में सांसदों के यह हैं तर्क
- दिल्ली से झांसी तक गतिमान एक्सप्रेस चल रही है. यानी ट्रैक अच्छा है. बीना से भोपाल तक नई रेल लाइन चालू हो चुकी है, जो ट्रेन-18 के लिए फायदेमंद होगी.
- सबसे पहले शताब्दी एक्सप्रेस नई दिल्ली से आगरा और उसके बाद भोपाल व हबीबगंज तक चलाई गई. ट्रेन-18 का रैक किसी भी शताब्दी को दिया जाता है तो सबसे पहले नई दिल्ली-हबीबगंज शताब्दी का नंबर आना चाहिए.
- मौजूदा समय में नई दिल्ली-हबीबगंज शताब्दी एक्सप्रेस के कोचों की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है. दो महीने पहले एक यात्री भोपाल से ललितपुर के बीच शताब्दी के टायलेट में फंस गया था. कोचों में और भी कई खामियां हैं. इसके कारण रेलवे की साख खराब हो रही है. ऐसे में ट्रेन-18 का रैक शताब्दी को ही मिलना चाहिए.

  
393 views
Dec 09 (08:22)
ग्वालियर एक्सप्रेस   71 blog posts
Re# 4079846-1            Tags   Past Edits
किसी ट्रेन को मात्र उस रूट पर इसलिए चलाया जाए की वह प्रधान मंत्री का निर्वाचन क्षेत्र है यह पूर्ण रूपेण पक्षपात है इस कारण से ही भारतीय रेल गर्त में जा रही है यहॉ र्सिफ नेताओ की पहूँच के कारण उन जगहों पर ट्रेने चलाई जा रही है पटरिया बिछाई जा रही हैजहॉ सवारी नाम मात्र की है ट्रेने खाली जा रही है इटावा से आगरा वाया बटेश्वर लाईन पर पैसा बर्बाद करना इसका अच्छा नमूना ह्रै वो भी अटल जी की चाहत की पेतृक गॉव रेलवे लाइन से ज़ुडे

  
340 views
Dec 09 (08:55)
BJ~   2850 blog posts
Re# 4079846-2            Tags   Past Edits
is ko do no route per kyun chala na chahiye?

  
278 views
Dec 09 (13:44)
Avengers Endgame 😍~   3575 blog posts   12 correct pred (43% accurate)
Re# 4079846-4            Tags   Past Edits
Hottest Debate on IRI right now.
Meanwhile Northern Railways Delhi Division: "Kabhi Kabhi lagta hai apun hi Bhagwan hai" 😂😂😂
Jaana chaahe jahaan ho, chalegi toh Delhi se hi 😂
Page#    757 news entries  next>>

Scroll to Top
Scroll to Bottom
Go to Mobile site
Important Note: This website NEVER solicits for Money or Donations. Please beware of anyone requesting/demanding money on behalf of IRI. Thanks.
Disclaimer: This website has NO affiliation with the Government-run site of Indian Railways. This site does NOT claim 100% accuracy of fast-changing Rail Information. YOU are responsible for independently confirming the validity of information through other sources.
India Rail Info Privacy Policy