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News Entry# 456505
दुनिया में विकिपीडिया को जानकारी का एक विश्वसनीय स्रोत माना जाता है। इसके संस्थापक और प्रकाशक बड़े गर्व से दावा करते हैं कि यहाँ बिन तथ्यों को जाँचे कोई जानकारी नहीं दी जाती। ऐसे में वामपंथ की ओर खास दिलचस्पी रखने वाली इस वेबसाइट ने कई दक्षिणपंथी वेबसाइटों को भी ब्लैक लिस्ट में रखा हुआ है, जिसका मतलब साफ है कि ये साइट उन मीडिया हाउसों को जानकारी का एक प्रमाणिक स्रोत तक नहीं मानती।

हालाँकि, इस बीच ध्यान देने वाली बात ये है कि इसी साइट को एक आभासी ट्रेन से
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जुड़ी जानकारी विश्वसनीय लगती है, जिसका जिक्र पाकिस्तान इस्टर्न रेलवे के विकिपीडिया के पेज पर करीब 3 साल मौजूद रही। इसके हवाला देकर न केवल आम लोगों को बल्कि लाहौर की पंजाब यूनिवर्सिटी को भी बेवकूफ बनाने का काम हुआ। बता दें कि पूर्वी पाकिस्तान को स्वतंत्रता मिलने और बांग्लादेश बनने के बाद पाकिस्तान पूर्वी रेलवे का नाम बदलकर बांग्लादेश रेलवे कर दिया गया था।

ऐसे में 28 नवंबर 2016 को, विकिपीडिया के एक संपादक ने PAKHIGHWAY यूजरनेम से पाकिस्तान पूर्वी रेलवे के विकि पेज पर एडिट किया, जहाँ यूजर ने ट्रेन संख्या 5214 के साथ मशरिक-मघरेब एक्सप्रेस नामक एक ट्रेन के बारे में विवरण डाला। एडिट में कहा गया कि ट्रेन 1950 से 1955 तक चली और इस बीच पश्चिमी पाकिस्तान के कोह-ए-ताफ्तान से पूर्वी पाकिस्तान के चटगाँव तक संचालित हुई। विकि पेज ने यह भी कहा कि ट्रेन में अटारी और बेनापोल के बीच भारतीय रेलवे ट्रैक और रोलिंग स्टॉक का इस्तेमाल किया गया था।



Wikipedia page before the detail of the train was removed
इस एडिट के बाद जल्द ही इस ट्रेन का विवरण फेसबुक पोस्ट और ब्लॉग पर दिखाई देने लगा और कुछ समय बाद लाहौर में पंजाब विश्वविद्यालय द्वारा प्रकाशित एक शोध पत्र में भी इसका उल्लेख देखने को मिल गया।

“क्यों पाकिस्तान रेलवे प्रदर्शन करने में विफल रहा है: यात्री परिप्रेक्ष्य पर एक विशेष फोकस” शीर्षक वाले शोध पत्र में विकिपीडिया लेख से मशरिक-मघरेब एक्सप्रेस के बारे में लाइनें कॉपी-पेस्ट की गई थी।



Paper by Punjab University, Lahore
ट्रेन को लेकर विकिपीडिया पर प्रकाशित जानकारी स्पष्ट रूप से फर्जी थी। इस बात के कोई भी सबूत नहीं है कि भारत के रास्ते पश्चिम पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान के बीच कोई सीधी ट्रेन चलती थी। यदि ऐसा होता तो अब तक यह एक मशहूर ऐतिहासिक तथ्य होता। दरअसल, मुहम्मद अली जिन्ना ने उस समय पाकिस्तान के दो हिस्सों के बीच 1,280 किलोमीटर लंबे ट्रांजिट कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा था, लेकिन न तो ब्रिटिश सरकार और न ही कॉन्ग्रेस पार्टी इस पर राजी हुई।

विकिपीडिया के इन एडिट किए गए दावों ने ऐसे लॉजिकों को भी खारिज कर दिया कि आखिर इतनी महत्वपूर्ण ट्रेन कोह-ए-ताफ्तान, पाकिस्तान के सबसे पश्चिमी रेलवे स्टेशन, जो एक छोटे से पहाड़ी सीमावर्ती शहर में स्थित है, वहाँ से क्यों चलेगी। इतनी जरूरी ट्रेन को तो लाहौर, कराची जैसे शहरों से चलना चाहिए। इसी तरह चटगाँव तो बांग्लादेश के सबसे पूर्वी तरफ स्थित है। यदि कोई ट्रेन चलती भी तो ढाका से चलती।

ट्रेन के बारे में कोई भी प्रमाणिक स्रोत या तर्क न होने के बावजूद मशरिक-मघरेब एक्सप्रेस के बारे में जानकारी विकिपीडिया पेज पर 3 साल तक रही। फिर पिछले साल अगस्त में ही किसी ने उस वाक्य को हटा दिया, क्योंकि दूसरी बार एडिट करने वाले को इससे जुड़ा कोई लिंक वहाँ नहीं मिला और न किसी विश्वसनीय स्रोत में इसका उल्लेख दिखा।

अब यह तो ज्ञात नहीं है कि PAKHIGHWAY यूजरनेम वाले यूजर ने ऐसी एडिटिंग क्यों की। लेकिन संयोग से, उस यूजर को किसी दूसरे कारण के चलते विकिपीडिया से स्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया गया है। विकिपीडिया के अनुसार, कई अकाउंट्स का दुरुपयोग करने और अन्य यूजर के साथ बहस करने के लिए टॉक पेज का उपयोग करने को लेकर यूजर को अनिश्चित काल के लिए प्रतिबंधित किया गया है।

एडिट के पीछे संदिग्ध दावे
बता दें कि विकिपीडिया पर करीब 3 साल तक फर्जी जानकारी रखने का यह मामला सोशल मीडिया पर एक फेसबुक पोस्ट के बाद सामने आया, जहाँ लोगों ने दावा किया कि उसने NALSAR क्विज़िंग वेबसाइट पर “गूगलर्स को रोकने” के लिए ऐसा एडिट किया था। फेसबुक पर कई लोगों द्वारा पोस्ट किए गए दावे में कहा गया है कि एडिट करने के बाद, व्यक्ति इसे वापस सही करना भूल गया और बाद में ऐसा करना लगभग असंभव हो गया, क्योंकि तब तक कुछ अकादमिक लेखों और यहाँ तक कि आधिकारिक पाकिस्तान रेलवे वेबसाइटों में भी इसके उल्लेख किया जा चुका था।


हालाँकि, यह दावा करने वाले अधिकांश लोग भारतीय हैं, और PAKHIGHWAY के एडिट हिस्ट्री से, जिन्होंने विकिपीडिया पेज में परिवर्तन किया था, यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि वह यूजर पाकिस्तानी है क्योंकि यूजर द्वारा किए गए अन्य सभी एडिट पाकिस्तान से संबंधित हैं।

फेसबुक पोस्ट में यह भी कहा गया है कि उस समय ऐसी कोई ट्रेन नहीं हो सकती थी, क्योंकि गेज के टूटने से यह असंभव हो जाता। हालाँकि, यह सच नहीं है, क्योंकि पश्चिम पाकिस्तान, पूर्वी पाकिस्तान और भारत, तीनों को ब्रिटिश सरकार द्वारा निर्मित एक ही रेलवे बुनियादी ढाँचा विरासत में मिला था और स्वतंत्रता से पहले इन तीन क्षेत्रों में नियमित रूप से ट्रेनें चलती थीं। इसलिए, यह सच है कि विकिपीडिया लेख में तीन साल तक काल्पनिक जानकारी थी, लेकिन हो सकता है कि इसे लेकर किए जा रहे दावे भी गलत हों।
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