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Ranikhet Express - रेगिस्तान में हरियाली

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Train Running Status: रेलवे से हर रोज लाखों लोग सफर करते हैं. वहीं कई रेलवे स्टेशन के नाम के साथ सेंट्रल, जंक्शन और टर्मिनस जुड़ा होता है लेकिन इसका मतलब बहुत ही कम लोग जानते हैं.

Indian Railway: देश का आम नागरिक लंबी दूरी के सफर के लिए रेलवे को चुनता है. रेलवे का सफर आरामदायक तो होता ही है साथ ही किफायती भी पड़ता है. हालांकि रेलवे के कई नियम-कायदे भी हैं जो लोगों को फॉलो भी करने पड़ते हैं. वहीं कुछ चीजें लोगों के सामने होती है लेकिन उनके बारे
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में कुछ ही लोगों को जानकारी होती है. ऐसे ही रेलवे से जुड़े कुछ शब्द हैं जिनमें सेंट्रल, जंक्शन और टर्मिनस भी शामिल हैं. लोगों ने ये नाम पढ़े जरूर होंगे लेकिन इनका मतलब कम ही लोग जानते हैं.



ये जुड़े होते हैं नाम

दरअसल, कई रेलवे स्टेशन के नाम के साथ सेंट्रल, जंक्शन और टर्मिनस जुड़ा होता है. ऐसे में लोगों के मन में सवाल भी आता है कि आखिर ऐसा क्यों लिखा होता है. तो आज हम आपको इन्हीं के बारे में बताने जा रहे हैं कि आखिर इनका मतलब क्या होता है. इस तरह की जानकारी से आपको अपने ज्ञान को बढ़ाने में फायदा होगा.

जंक्शनअगर किसी रेलवे स्टेशन के नाम के आगे जंक्शन लिखा होता है तो इसका मतलब है कि इस स्टेशन पर ट्रेन के आने और जाने के लिए एक से ज्यादा रास्ते मौजूद हैं. इसका मतलब है कि अगर कोई ट्रेन एक रास्ते से आ रही है तो वो दो रास्तों से जा भी सकती है.

सेंट्रलकुछ रेलवे स्टेशन के नाम के आगे सेंट्रल भी लिखा होता है. इसका मतलब है कि उस शहर में कई रेलवे स्टेशन मौजूद हैं और जिस स्टेशन के आगे सेंट्रल लिखा होता है वो उस शहर का सबसे पुराना रेलवे स्टेशन होता है. साथ ही अगर किसी रेलवे स्टेशन के नाम के आगे सेंट्रल लिखा होता है तो इसका मतलब है कि वो स्टेशन उस शहर का सबसे ज्यादा बिजी रहने वाला स्टेशन है.

टर्मिनस या टर्मिनलकुछ रेलवे स्टेशन ऐसे भी होते हैं जिनके नाम के आगे टर्मिनस या टर्मिनल लिखा होगा. इसका मतलब है कि ट्रेन जिस तरफ से आती है वो वापस उसी तरफ चली भी जाती है. इसका मतलब होता है कि ट्रेन आगे नहीं जा सकती क्योंकि उस स्टेशन के आगे रेलवे के ट्रैक मौजूद नहीं है.
Today (21:21) जनता को समर्पित हुआ रीवा का गोड़हर-रेलवे ओव्हर ब्रिज, वाहन चालक मारने लगे फर्राटे (www-rewariyasat-com.cdn.ampproject.org)
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Jun 29 2022 (21:21)
Station Tag: Rewa (Terminal)/REWA added by भारतीय/778285
Stations:  Rewa (Terminal)/REWA  
गोड़हर-रेलवे ओव्हर ब्रिज जनता को किया गया समर्पित.
रीवा। जनता की सुविधा और आवागमन को सुगम बनाने तथा रेल लाइन के चलते गोड़हर-रेलवे मोड़ में ओव्हर ब्रिज का निर्माण कराया गया है और यह निर्माण कार्य अब पूरा कर लिया गया है। इस ब्रिज का निर्माण करने वाले संविदाकार ने विजय मिश्रा बुधवार को विधिवत पूजा-पाठ करके ब्रिज जनता को समर्पित कर दिए है। जिसके बाद आवागमन इसमें चालू हो गया है और वाहन चालक इस ब्रिज का उपयोग करते हुए उसमें से वाहनों को फर्राटे मारते हुए दौड़ा रहे है।
34 करोड़
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की लागत से बना ब्रिज
बताया जा रहा है कि इस ब्रिज का निर्माण कार्य 34 करोड़ रूपये की लागत से किया गया है। खास बात यह है कि यह ब्रिज तीन तरफ के मुख्य मार्गो को जोड़ता है। जिसमें रीवा और सतना आने-जाने वाले वाहनो के साथ ही रेलवे स्टेशन के वाहनों को भी सुविधा देगा। तीनों मार्गो को ब्रिज से जोड़ा गया है।
कोविड के चलते काम हुआ प्रभावित
इस ब्रिज के निर्माण कार्य में देरी भी हुई है। वजह रही कि दो वर्षो से कोविड संक्रमण के चलते निर्माण कार्य में प्रभाव पड़ा और समय पर ब्रिज का काम पूरा नही हो पाया था, लेकिन अब यह ब्रिज जनता को समर्पित हो जाने के बाद रीवा में विकास की एक और कड़ी जुड़ गई है।
होगा जलसा
संविदाकार विजय मिश्रा ने बताया कि ब्रिज बनकर तैयार हो गया है। जिसके चलते उसे जनता को समर्पित किया जा रहा है। आचार संहिता सामाप्त होने के बाद इसका विधिवत शुभारंभ किया जाएगा। ज्ञात हो कि रीवा विधायक एवं पूर्व मंत्री राजेन्द्र शुक्ला के प्रयासों से रीवा में एक और ब्रिज का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। शहर में बढ़ते आवागमन के दबाव में वाहनों चालकों को काफी सुविधा मिलेगी।
पूर्वोत्तर रेलवे में लीज पर ट्रेन चलाने के लिए कोई तैयार नहीं है। योजना शुरू होने के नौ महीने बाद भी रेल प्रशासन को आवेदकों का इंतजार है। एक तो सिक्योरिटी डिपॉजिट ज्यादा है, दूसरे 14 कोच के लिए यात्री जुटा पाना आसान नहीं है। ...
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भारत गौरव ट्रेन चलाने के लिए बोर्ड ने इंडियन रेलवे की वेबसाइट पर भारत गौरव ट्रेन नाम से पोर्टल जारी किया है। ट्रेन का संचालन कोई भी व्यक्ति या संस्था कर सकती है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। ट्रेन के संचालन के लिए जन सहभागिता बढ़ाने के लिए बिजनेस डेवलपमेंट यूनिट (बीडीयू) ने प्रचार-प्रसार कर भी किया, लेकिन सिक्योरिटी मनी और प्रति व्यक्ति किराया ज्यादा होने से कोई फर्म या एजेंसी तैयार नहीं हो रही है। उन्हें डर है कि यात्री नहीं मिलेंगे, क्योंकि कम से कम 14 बोगी बुक करानी होगी। यानी एक हजार यात्री की जरूरत पड़ेगी। भारत दर्शन ट्रेन चलाने वाली आईआरसीटीसी भी हिम्मत जुटा नहीं पा रही है। रेलवे वाणिज्य विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि पोर्टल पर अब तक एक भी आवेदन नहीं आया है। न ही किसी ने अभी तक संपर्क किया है।  

गोरखपुर से एलटीटी तक 20 कोच चलाने का खर्च 3.32 करोड़गोरखपुर से एलटीटी तक अगर 20 कोच की रेक लगाकर ट्रेन चलाई जाती है, तो कुल खर्च 3.32 करोड़ आएगा। इसमें रेक सिक्योरिटी डिपॉजिट में एक करोड़ रुपये (दो वर्ष के लिए), राइट टू यूज में कोच खर्च 3761004 रुपये (एसी 3, एसी 2 के छह-छह कोच व एसएलआर दो व एक पैंट्रीकार), स्टेबलिंग चार्ज पहले 100 दिन के लिए एक लाख रुपये तथा अगले 50 दिन के लिए 425000 रुपये, फिक्स हैंडिल चार्ज में 25294606 रुपये तथा वैरिबल हैंडल चार्ज में 3703160 रुपये देने होंगे।पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने कहा कि भारत गौरव ट्रेन को कोई व्यक्ति, संस्था व कंपनी चला सकती है। इस ट्रेन से यात्री देश के विभिन्न स्थानों पर स्थित धार्मिक एवं अन्य पर्यटन स्थलों तक जा सकते हैं। अभी एक भारत गौरव ट्रेन 21 जून को आईआरसीटीसी की ओर से चलाई गई है। पूर्वोत्तर रेलवे में भी इस तरह की ट्रेन चलाने के लिए प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।
Today (19:52) दो साल से बंद ग्रामीणों की लाइफ लाइन मेला यात्री ट्रेन फिर प्रारंभ करने की उठी मांग (www.naidunia.com)
Commentary/Human Interest
WCR/West Central
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News Entry# 490854  Blog Entry# 5394974   
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Jun 29 2022 (19:52)
Station Tag: Ratlam Junction/RTM added by Adittyaa Sharma/1421836

Jun 29 2022 (19:52)
Station Tag: Kota Junction/KOTA added by Adittyaa Sharma/1421836

Jun 29 2022 (19:52)
Station Tag: Shamgarh/SGZ added by Adittyaa Sharma/1421836
शामगढ़ (नईदुनिया न्यूज)। दो साल से बंद कोटा-रतलाम मेला यात्री गाड़ी को प्रारंभ करने की मांग यात्रियों ने की है। मेला गाड़ी कोटा से रतलाम तक सभी छोटे बड़े स्टेशन पर रुकती थी, इसके कारण इस गाड़ी को ग्रामीणों की लाइफ लाइन मानी जाती है। इसके अलावा प्रतिदिन आवागमन करने वाले नौकरीपेशा, व्यापारियों व मजदूरों के लिए बहुत ही सुलभ ट्रेन मानी जाती है, लेकिन ना तो इस ओर रेलवे प्रशासन ध्यान दे रहा है ना ही जनप्रतिनिधिगण।
बताया जाता है कि कोटा एवं रतलाम रेल मंडल में आपसी सामंजस्य के अभाव के चलते मेला गाड़ी रतलाम तक नहीं जा रहीं है। जिसके कारण यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मेला सवारी गाड़ी कोटा से रतलाम जाने के
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लिए सुबह छह बजे बांद्रा हरिद्वार देहरादून एक्सप्रेस के बाद 10.40 बजे कोटा वड़ोदरा पार्सल चलती है। वहीं रतलाम से प्रतिदिन दोपहर दो बजे के बाद अगले दिन सुबह सात बजे तक कोटा के लिए कोई पैसेंजर ट्रेन नहीं है। हाल ही में रेल विकास संघ के प्रमुख पंकज सोनी ने पश्चिम मध्य रेलवे महाप्रबंधक सुधीर गुप्ता से जबलपुर मुलाकात कर मेला गाड़ी को रतलाम तक चलाने की मांग की। पश्चिम मध्य रेलवे की सांसदों के साथ बैठक में भी जनप्रतिनिधियों ने इस ट्रेन को रतलाम तक चलाने की मांग की थी। रेल विकास संघ के श्री सोनी ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रेल मंत्री एवं रेलवे बोर्ड को पत्र लिखकर मेला गाड़ी के बंद होने के कारणों को बताते हुए इस अविलंब प्रारंभ करने की मांग की है। यही मांग नगर से रेलवे परामर्शदात्री समिति के नारायणभाई गुजराती व नरेन्द्रकुमार यादव ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव व जीएम गुप्ता से की है।
Today (16:25) India’s First Rajdhani Express Set To Pick Up Pace, Travel Time Between Howrah And Delhi To Shrink By 2.5 Hours (swarajyamag-com.cdn.ampproject.org)
New Facilities/Technology
ER/Eastern
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Jun 29 2022 (16:25)
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Jun 29 2022 (16:25)
Station Tag: Howrah Junction/HWH added by बिप्लब कागयुगँ/1329476

Jun 29 2022 (16:25)
Train Tag: New Delhi - Howrah Rajdhani Express (Via Patna)/12306 added by बिप्लब कागयुगँ/1329476

Jun 29 2022 (16:25)
Train Tag: Howrah - New Delhi Rajdhani Express (Via Patna)/12305 added by बिप्लब कागयुगँ/1329476

Jun 29 2022 (16:25)
Train Tag: New Delhi - Howrah Rajdhani Express (Via Gaya)/12302 added by बिप्लब कागयुगँ/1329476

Jun 29 2022 (16:25)
Train Tag: Howrah - New Delhi Rajdhani Express (Via Gaya)/12301 added by बिप्लब कागयुगँ/1329476
The Howrah-New Delhi Rajdhani, which started its maiden journey on March 1, 1969, currently takes 17.15 hours to travel the distance of 1525 kilometres.
The increase in the speed of the train will reduce the travel time to 14 hours and 35 minutes.
Indian Railways will reduce the travel time on the country’s first Rajdhani Express between Howrah (Kolkata) and New Delhi by increasing its speed to 160 kilometres per hour.
The
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Howrah-New Delhi Rajdhani, which started its maiden journey on March 1, 1969, now takes 17.15 hours to travel the distance of 1525 kilometres between the two terminal stations via Gaya in Bihar.
The increase in the speed of the train — a project undertaken under the Indian Railways’ ‘Mission Raftar’ (read this) — will reduce the travel time to 14 hours and 35 minutes.
The top speed of the train was increased to 130 kilometres per hour in November 2019 with the introduction of an additional locomotive at the rear of the train. That reduced the journey time between Howrah and New Delhi by about 90 minutes.
WAP7 locomotives were attached to both ends of the 22 coach LHB rake and ‘push-pull’ technique was deployed to increase the top speed of the train to 130 kilometres per hour. The two locomotives were hard-wired to function as one so that when brakes are applied or released together in unison, the time for deceleration and acceleration is reduced significantly. The two engines also provide more power to the train.
At present, the train leaves Howrah at 1650 hours (4.50 pm) and reaches New Delhi at 1005 hours (10.05 am). The train now travels at speeds between 85 and 130 kilometres an hour. Soon, the train will travel at speeds varying from 110 to 160 kilometres per hour.
Senior Eastern Railway (ER) officials told Swarajya that the railway headquarters has already sanctioned works to increase the speed of the train. Track improvement works, including erection of fences along the tracks in some sections, overhead equipment modification and automatic train protection measures, are in progress and are expected to be completed soon, said the ER officials.
The modifications of overhead equipment include the use of the latest technology that is deployed in China, Germany, France and South Africa.
On its maiden journey, the Howrah-New Delhi Rajdhani Express took 17 hours and 20 minutes to travel the 1450 kilometres between the two terminal stations. The top speed of the train was 120 kilometres per hour.
That train, pulled by a WDM-4 class locomotive, had nine coaches — one AC first class, five AC chair cars, one dining car and two generator cars. But with the passage of time, more and more coaches were introduced and the dining car as well as the chair cars were replaced by AC two and three tier coaches. That, and the introduction of more stoppages by successive railway ministers to cater to their states and constituencies, significantly reduced the speed of the train.
It was only after the National Democratic Alliance government returned to power in 2014 that work on improvement and upgradation of tracks, rolling stock and other equipment to increase the speed of trains was undertaken.
© Kovai Media Private Limited

Rail News
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Rang De Basanti^   50557 blog posts
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It was only after the National Democratic Alliance government returned to power in 2014 that work on improvement and upgradation of tracks, rolling stock and other equipment to increase the speed of trains was undertaken.
important statement..
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